निजी को टक्कर देंगे जल्दी ही सरकारी विद्यालय, मिलेगी बस सुविधा भी
   Date19-Oct-2020

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ठ्ठअजय जैन 'विकल्पÓ
इंदौर द्य राज्य शिक्षा केंद्र ने 'सीएम राईजÓ योजना के अंतर्गत विद्यालयों का चयन करने संबंधी जो निर्देश कलेक्टर, डीपीसी और डीईओ को जारी किए थे, उसके तहत इंदौर जिले में पहले चरण में भोपाल द्वारा 243 स्कूल चयनित किए गए हैं। इनका अब सत्यापन और उसके बाद क्रास चेकिंग का सत्यापन होगा। तत्पश्चात इनकी कमियां पूरी करते हुए इन्हें सर्वसुविधायुक्त बनाकर निजी स्कूलों के मुकाबले में खड़ा किया जाएगा। 20 किमी के दायरे में विद्यार्थियों को यहां बस से पढ़ाई के लाया-छोड़ा जाएगा। नई शिक्षा नीति का ध्यान रखते हुए सरकारी स्कूलों के बेहतर से बेहतर परिणाम लाने के साथ ही इन्हें
सर्वसुविधायुक्त विद्यालय के रूप में विकसित करने का लक्ष्य मप्र शासन ने अब तैयार कर लिया है। इस लक्ष्य का उद्देश्य विद्यार्थियों का स्कूलों को छोडऩे की दर को कम करना भी है।
सरकारी को अच्छा बनाकर निजी का आकर्षण रोकने की कोशिश-सीएम राईज स्कूल विकसित करने का उदद्ेश्य पहली से 12वीं तक समग्र विद्यालय संचालित कर बच्चों की ट्रांजिशन दर को बढ़ाना और ड्राप आउट दर को घटाना है। इन्हें तकनीक से सुसज्जित करने के साथ ही खेलकूद, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आदि गतिविधियों हेतु उपयुक्त वातावरण निर्मित करना तथा पालकों में अशासकीय विद्यालयों के प्रति बढ़ रहे आकर्षण को रोकना और ऐसी शालाओं को सीबीएसई मान्यता शाला के रूप में परिवर्तन करना भी है।
प्रति जनशिक्षा से चुनेंगे 5 विद्यालय-राज्य शिक्षा केंद्र से निर्देशित किया गया है कि डाटा के विश्लेषण के आधार पर प्रति जनशिक्षा 5 विद्यालयों का चिन्हांकन 6 बिंदुओं के आधार पर किया गया है। इसमें भविष्य में न्यूनतम 1 हजार बच्चों को लिए कक्षा कक्ष, खेल मैदान, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब आदि हेतु भूमि की उपलब्धता के साथ ही स्कूल तक आने में कम से कम दूरी और विद्यालय का एकीकृत तथा नामांकित होना भी जरूरी है। यह सत्यापन संकुल प्राचार्य एवं जनशिक्षक के माध्यम से कराया गया है। सत्यापन प्रक्रिया हेतु डीईओ सहित डीपीसी आदि को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
संभावित सुविधायुक्त स्कूल-पहले चरण में इंदौर के अंतर्गत जिन विद्यालयों का चयन किया गया है उसमें संभाग के झाबुआ में थांदला से 31 स्कूल के अंतर्गत 3 को लक्ष्य के रूप में लिया गया है। ऐसे ही झाबुआ तथा थांदला के अन्य छोटे-छोटे क्षेत्रों से भी स्कूलों का चयन लक्ष्य के रूप में किया गया है, जबकि धार से भी चयन किया है। बात करें इंदौर की तो इंदौर शहरी से बिजलपुर स्थित कन्या स्कूल के अंतर्गत 2 को लक्ष्य में लिया गया है, जबकि महाराजा शिवाजीराव, मालव कन्या मोतीतबेला, शारदा कन्या, कस्तूरबा कन्या, एचएसएस बाणगंगा, नेहरू नगर कन्या, विजयनगर, संयोगिजागंज, नंदानगर को भी शामिल किया गया है। ऐसे ही इंदौर के अंतर्गत महू, देपालपुर, सांवेर और इंदौर ग्रामीण में जवाहर टेकरी, बिचौली मर्दाना, गांधीनगर, हातोद, खुड़ैल, कनाडिय़ा, कम्पेल, रालामंडल, राऊ सेभी स्कूलों को लक्ष्य के रूप में जोड़ा गया है। कुल मिलाकर उक्त 243 में स तकरीबन 50 से 100 स्कूल अंतिम तौर पर उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर चयनित होने की प्रबल संभावना है।
65 से 70 प्रतिशत चुने जाएंगे शहर से-243 में से इंदौर से लगभग 65 से 70 फीसदी स्कूल सर्वसुविधायुक्त के रूप में इस योजना के तहत चुने जाने की प्रबल संभावना है। एक जानकारी के मुताबिक अधिकारियों का मानना है कि मालव कन्या (मोतीतबेला), अहिल्याश्रम, मल्हाराश्रम सहित उत्कृष्ट बाल विनय मंदिर और कुछ माडल स्कूल भी पहले दौर में चयनित कर लिए जाएंगे। दरअसल उक्त स्कूलों में पहले से ही 90 फीसदी सुविधाएं निजी जैसी उपलब्ध हैं। हालांकि प्राइमरी और मिडिल के स्कूल इससे बाहर हो जाएंगे।