8 फसलों की 17 जैव- संवर्धित किस्मों को प्रधानमंत्री मोदी ने किया राष्ट्र को समर्पित
   Date17-Oct-2020

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नई दिल्ली द्य 16 अक्टूबर (वा)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के कृषि एवं खाद्य संगठन (एफएओ) की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर 75 रुपए का स्मारक सिक्का जारी करने के साथ आठ फसलों की 17 जैव-संवर्धित किस्में भी राष्ट्र को समर्पित की।
ये किस्में पोषण के मामले में सामान्य फसलों की तुलना में डेढ़ से तीन गुना अधिक हैं। चावल की किस्म सीआर धान 315 जस्ता की अधिकता वाली है। गेहूं की एचडी 3298 किस्म, डीबीडब्ल्यू 303 और डीडीडब्ल्यू 48 प्रोटीन और लौह से समृद्ध है। मक्का की हाईब्रिड किस्म एक, दो और तीन लाइसिन और ट्राइप्टोफैन से, बाजरे की सीएफएमवी एक और दो फिंगर किस्म कैल्शियम, लोहा और जस्ता से भरपूर है। छोटे बाजरे की सीसीएलएमवी एक किस्म लौह और जस्ते से भरपूर है। पूसा सरसों 32 कम एरियूसिक एसिड से जबकि मूंगफली की गिरनार चार और पांच किस्म बढ़े हुए ओलिक एसिड से तथा रतालू की श्री नीलिमा और डीए 340 किस्म एंथोसायनिन से भरपूर है।
इस अवसर पर श्री मोदी ने कहा कि फसलों की ये किस्में, जिन्हें स्थानीय भूमि और किसानों द्वारा विकसित किस्मों का उपयोग करके विकसित किया गया है, वे खाद्य सामग्री के साथ सामान्य भारतीय थाली को पोषक तत्वों वाली थाली में बदल देंगी। उन्होंने बताया कि उच्च जस्तायुक्त चावल की किस्म गारो पर्वतीय क्षेत्र तथा गुजरात के डांग जिले से संग्रहित की गई है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक रूप से समृद्ध खाद्य सामग्री के माध्यम से भारत को कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए जैव-फोर्टिफाइड फसलों की किस्मों के उत्पादन को बढ़ावा देकर इन्हें मध्यान्ह भोजन, आंगनवाड़ी आदि जैसे सरकारी कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाएगा। यह किसानों के लिए अच्छी आमदनी सुनिश्चित करेगी तथा उनके लिए उद्यमिता के नए रास्ते खोलेगी।
भारत के निर्माण के लिए किसानों का सशक्तिकरण जरूरी
कुपोषण सहित कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत आधार के तौर पर नीति-निर्माताओं, अन्नदाता किसान, कृषि वैज्ञानिक तथा आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सुदूर भारत के गरीबों और सरकार के बीच इन सभी ने कड़ी का काम किया है। उन्होंने कहा कि कुपोषणरहित भारत के निर्माण के लिए किसानों का सशक्तिकरण अनिवार्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एफएओ के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंधों को दर्शाने के साथ ही भूख, अल्पपोषण और कुपोषण को पूरी तरह से खत्म करने के सरकार के संकल्प को मजबूत करने में योगदान देने वाला यह आयोजन सरकार द्वारा कृषि और पोषण क्षेत्र को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि भारतीय सिविल सेवा के अधिकारी डॉ. बिनय रंजन सेन 1956-1967 के दौरान एफएओ के महानिदेशक थे तथा विश्व खाद्य कार्यक्रम की स्थापना उनके समय में ही की गई थी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वर्ष 2016 को अंतरराष्ट्रीय दलहन और 2023 को अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किए जाने के भारत के प्रस्तावों को भी एफएओ द्वारा समर्थन दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 10 करोड़ से अधिक लोगों को लक्षित करते हुए एक महत्वाकांक्षी पोषण अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य शारीरिक विकास में बाधा, कुपोषण, एनीमिया और जन्म के समय कम वजन जैसी समस्या से निजात पाना है।