सभी पक्षकार यथास्थिति बनाए रखें
   Date17-Oct-2020

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खासगी ट्रस्ट को सर्वोच्च न्यायालय से राहत : हाई कोर्ट के फैसले पर रोक , कहा-
नई दिल्ली/ इंदौर द्य 16 अक्टूबर (वा)
सुप्रीम कोर्ट से खासगी ट्रस्ट को शुक्रवार को बड़ी राहत मिल गई। सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर 5 अक्टूबर को उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए निर्णय के अमल पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा है कि जब तक अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक सभी पक्षकार यथास्थिति बनाए रखें। इस मामले में अब 2 दिसंबर को सुनवाई होगी। ध्यान रहे की देशभर में फैली खासगी ट्रस्ट की संपतियों को प्रशासन ताबड़तोड़ अपने कब्जे में ले चुका है।
उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में माना था कि ट्रस्ट को संपत्तियां मात्र देखरेख के लिए दी गई थीं। उसे संपत्तियों को बेचने का अधिकार नहीं था। न्यायालय के आदेश पर मप्र शासन ने ट्रस्ट की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू करते हुए कई संपत्तियों को कब्जे में ले भी लिया है। 2012 में कलेक्टर ने खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों का नामांतरण शासन के नाम करने का आदेश जारी किया था। ट्रस्ट ने इसके खिलाफ दो अलग-अलग याचिकाएं उच्च न्यायालय में दायर कीं। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने 2014 में कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर दिया था। एकल पीठ के निर्णय को चुनौती देते हुए शासन ने उच्च न्यायालय में अपील की। इस बीच एक जनहित याचिका ट्रस्ट की संपत्तियों को लेकर दायर हो गई। इसमें कहा कि ट्रस्ट कौडिय़ों के दाम संपत्तियों को बेच रहा है, जबकि उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है। उसे मात्र संपत्तियों की देखभाल की जिम्मेदारी दी गई थी, बेचने की नहीं। उच्च न्यायालय के निर्णय के अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों की बैठक लेकर कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। इसके बाद देशभर में फैली ट्रस्ट की संपत्तियों को मप्र शासन ने अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस बीच ट्रस्ट ने उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देते हुए तीन अलग-अलग याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में दायर कर दीं। हरिद्वार का कुशावर्त घाट खरीदने वाले अनिरुद्ध सिखोला ने भी एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की। शुक्रवार को इन सभी पर सुनवाई हुई। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस बीआर गोवई ने तर्क सुनने के बाद 5 अक्टूबर को उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।