व्याधियों का अंत है टहलना
   Date17-Oct-2020

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धर्मधारा
पैदल चलना दैनिक जीवन का एक सामान्य-सा कृत्य है, लेकिन इसे दैनिक जीवन में एक व्यायाम का स्थान दिया जा सकता है। विशेषकर बुजुर्ग, बीमार या शारीरिक रूप से भारी व्यायाम न कर पाने की स्थिति में व्यक्ति के लिए यह बिना खर्च की एक उपयोगी क्रिया है। यह एक सरल प्रक्रिया है, जिसमें अपना भार ही व्यायाम का माध्यम बनता है। इसे यदि दिन में आधा घंटा भी नियमित रूप से समय दिया जाए तो इसके लाभ अनेक हैं, जो व्यक्ति के तन से लेकर मन को स्वस्थ एवं निरोग रखने में कारगर भूमिका निभा सकते हैं। सामान्यतया हम इसके प्रति लापरवाह पाए जाते हैं व इसके लाभों को नजरअंदाज कर रहे होते हैं, जबकि यह तन-मन के लिए तमाम फायदे लिए होता है। चलते रहने से सीधे हमारे अंग-प्रत्यंगों की विशेषकर पैरों की मांसपेशियां व हड्डियां मजबूत होती हैं, घुटनों का व्यायाम होता है। इसके साथ हमारा रक्त संचार गतिशील होता है तथा हृदय व फेफड़े सशक्त बनते हैं, मस्तिष्क अधिक सक्रिय हो जाता है, मन की एकाग्रता बढ़ती है। इनके साथ ही उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, स्मृतिलोप एवं मोटापे जैसे रोगों में प्रत्यक्ष लाभ होता है। सैर को व्यायाम के रूप में कभी भी व किसी भी समय शुमार किया जा सकता है। हालांकि प्रात:काल का भ्रमण सबसे अधिक लाभदायक रहता है। उस समय वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी-चढ़ी होती है, वातावरण सकारात्मक स्पंदनों से भरा होता है, लेकिन टहलने के प्रयोग को दिन के किसी भी खाली समय में आजमाया जा सकता है। इसके लिए आधा घंटा पर्याप्त माना जा सकता है। यदि एक साथ इतना समय नहीं प्राप्त हो पाए तो इसे दस-दस मिनट के तीन टुकड़ों में बांटा जा सकता है। यदि बाहर टहलने की स्थिति न हो तो घर की छत, आंगन या बरामदे में भी अपने कदमों के नाप के हिसाब से या मिनटों के हिसाब से इसको पूरा किया जा सकता है। नियमित व निर्धारित समय पर टहलने के साथ हम इसे विभिन्न रूपों में अपनी दिनचर्या का अंग बना सकते हैं। यदि भवन कई मंजिल ऊंचा हो तो लिफ्ट के बजाय सीढिय़ों का उपयोग करते हुए व्यायाम का लाभ ले सकते हैं। सार्वजनिक वाहन में यात्रा करते समय निर्धारित बस स्टॉप से पहले स्टेशन पर उतरकर कुछ दूर पैदल चल सकते हैं। कैम्पस में वाहन के बजाय पैदल टहलते हुए आ-जा सकते हैं। घर के पास के गली-मोहल्लों व दुकानों तक पैदल जा सकते हैं।