वैश्विक अर्थव्यवस्था के आकलन...
   Date15-Oct-2020

vishesh lekh_1  
विश्व की अर्थव्यवस्था वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लंबे समय से हिचकौले खा रही है... स्थिति इसलिए लगातार विकट होती रही है, क्योंकि सारी बाजार व्यवस्था, कारोबार एवं हर तरह के व्यवसाय को इस महामारी ने बुरी तरह से प्रभावित किया है... इसी बीच विश्व के तमाम देशों में बड़ी-बड़ी कंपनियां एवं उद्यमी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी की गई, तो तालाबंदी ने संगठित, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों-मजदूरों को भी दुविधा में डाला है... अगर ऐसी स्थिति में विश्व के तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं संकट से घिरी नजर आ रही है तो इसका आगे जाकर लंबा असर दिखना तय है... भारत-चीन-अमेरिका और जापान जैसी अर्थव्यवस्था भी इस कोरोना के कारण बुरी तरह से प्रभावित हुई है... चीन तो पहले से ही लडख़ड़ा रहा है... अमेरिका में भी स्थिति अच्छी नहीं है... इन सभी बातों का असर कहीं न कहीं भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है... लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जो अनुमान मंगलवार को जारी किया, उसके अनुसार कोरोना के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में इस वर्ष 10.3 फीसदी की गिरावट के साथ इसके 4.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है... लेकिन 2021 में इसमें 5.2 फीसदी के सुधार के साथ 8.8 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है... यानी भारतीय अर्थव्यवस्था से उम्मीद बनी हुई है... क्योंकि भारत 2021 में चीन की अर्थव्यवस्था को पछाडऩे में सक्षम होगा... लेकिन इस बीच यह भी चिंता का विषय हो सकता है कि भारत के पड़ौसी पाकिस्तान और बांग्लादेश की खस्ताहाल स्थिति का भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कहीं न कहीं भारत पर असर पडऩा है... क्योंकि ये देश जब भारी तंगी एवं आर्थिक मजबूतों से घिरते हैं तो आतंकवादी हरकतों को तेजी से बढ़ाने लगते हैं... क्योंकि फिलहाल भारत प्रति व्यक्ति आय में बांग्लादेश से भी पीछे है... भारत में प्रति व्यक्ति जीडीपी 10.5 फीसदी की गिरावट के साथ .1877 तक गिरने की संभावना जताई जा रही है... लेकिन जिस तरह से केन्द्र सरकार ने लगातार आर्थिक पैकेजों की घोषणा की और बाजार में तरल पूंजी का प्रवाह बनाए रखने के लिए हर तरह के जोखिम उठाए है, उसका असर भी दिखने लगा है कि भारत चीन के साथ अर्थव्यवस्था के मामले में पीछे नहीं रहने वाला है... पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था का असर तो उसकी तरफ से लगातार किए जा रहे आतंकी खुराफातों से पता चल ही रहा है... स्थिति यह है कि पाकिस्तान ने अपनी बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए नोटों को छापने की संख्या तेजी से बढ़ा दी है... क्योंकि समाप्त हुए इस वित्तीय वर्ष में 1.1 ट्रिलियन की बढ़ोत्तरी पाकिस्तान के नोटों में दर्ज की गई है... कहने का तात्पर्य यह है कि वैश्विक आर्थिक संकट के बीच भारत की स्थिति अभी भी न केवल देशवासियों को, बल्कि विश्व को आशावान बनाए हुए है...
दृष्टिकोण
विज्ञापन के जरिये खुराफाती खेल...
तनिष्क शोरूम द्वारा जारी विज्ञापन को लेकर बहुसंख्यक हिन्दुओं का आक्रोशित होना स्वाभाविक था... क्योंकि हर तरह के विज्ञापन करने के लिए और किसी भी तरह के उत्पाद देखने के लिए क्या बड़े-बड़े शोरूम, कंपनियां अपने ब्रांड के प्रचार-प्रसार के लिए हिन्दुओं को, उनके धर्म को, उनकी मान्यताओं को और उनकी सहज-सरल छवि को हमेशा विकृत रूप में दिखाने की आदी हो चुकी है... आखिर होली के रंग को लेकर भी इसके पहले ऐसा ही विवाद हुआ था, जैसा इस बार तनिष्क ने ब्रांड के प्रचार के जरिये 'लव जिहादÓ की प्रवृत्तियों को बड़े ही तरीके से परोसने का प्रयास किया... आखिर सारी अच्छाइयां मुस्लिमों में ही क्यों दिखलाई जाती है... इसके विपरीत जाने का साहस किसी नामी ब्रांड या कंपनी का क्यों नहीं होता... तनिष्क के इस 43 सेकंड के विज्ञापन में एक गर्भवती महिला को उसकी गोद भराई की रस्म के लिए एक महिला द्वारा ले जाते हुए दिखाया गया था... बाद में लोगों को एहसास हुआ कि जो महिला उसे ले जा रही थी वह उसकी सास थी... विज्ञापन में साड़ी और बिंदी लगाए जवान महिला अधिक आयु वाली महिला को मां कहकर संबोधित करती है, जिसने सलवार कुर्ता पहन रखा है और अपना सिर दुपट्टे से ढंक रखा है... जवान महिला सवाल करती है, 'आप यह रस्म नहीं करतीं?Ó इस पर मां जवाब देती है, 'पुत्रियों को खुश रखने की परंपरा हर घर में होती है...Ó ऐड में संयुक्त परिवार को दिखाया गया है, जिसमें हिजाब पहने एक महिला, साड़ी पहनी महिलाएं और नमाजी टोपी पहने एक व्यक्ति दिखता है... क्या सामान्य हिन्दू परिवार या फिर सिर्फ हिन्दू परिवार में किसी मुस्लिम महिला को इस तरह से दिखाने का तनिष्क या अन्य कोई ब्रांड साहस दिखा सकते हैं... सही मायने में ये हिन्दुओं के खिलाफ रह रहकर प्रयोग हो रहे हैं... अगर वे समय रहते नहीं जागे तो बहुत देर हो जाएगी...