समाज सेवा
   Date15-Oct-2020

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
रा जा बालीक के प्रधानमंत्री भद्रजित अत्यंत सेवा परायण एवं ईश्वर भक्त थे। एक बार राजा ने उन्हें किसी बात पर नाराज होकर प्रधानमंत्री पद से हटा दिया। भद्रजित शालीनतापूर्वक दरबार से चले गए एवं अपना समय लोगों की सेवा और ईश्वर भक्ति में लगाने लगे। एक दिन राजा बालीक को इच्छा हुई कि भद्रजित की स्थिति का पता लगाया जाए। उनको लगता था कि प्रधानमंत्री पद से हटाने पर भद्रजित की स्थिति दयनीय हो जाएगी, परन्तु उनके घर पहुंचकर स्थिति का आंकलन करने पर राजा को पता चला कि वे अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं। राजा को देख भद्रजित बोले - 'राजन्! यदि आप मुझे राजपद से न हटाते तो मुझे समाज सेवा का यह सौभाग्य न मिल पाता।Ó राजा उनके इस गुण को देखकर हतप्रभ रह गए।