कपास खरीदी में सीसीआई की उदासीनता ने खड़े किए कई सवाल
   Date15-Oct-2020

de5_1  H x W: 0
छोटे व मजबूर किसान
कम दाम में व्यापारियों को
बेच रहे कपास फसल
इंदौर द्य संदीप निरखीवाले
मौसम व कोरोना की मार से किसान बेहाल है। तमाम तरह के वादे केंद्र व राज्य सरकारें कर रही है लेकिन किसानों को फायदा होते दिख नहीं रहा है। किसान साढ़े पांच हजार प्रति क्विंटल से अधिक भाव का कपास व्यापारियों को औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर है, क्योंकि भारतीय कपास निगम (सीसीआई) ने खरीदी शुरू नहीं की है।
निमाड़ के किसानों ने अतिवृष्टि व कोरोना की मार झेलने के बाद भी कपास की पैदावार की है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक कपास खरीदने की कोई निश्चित दिनांक तय नहीं की है इसके चलते किसान औने-पौने दाम में कपास बेचने को मजबूर है। इसकी वजह है भारतीय कपास निगम (सीसीआई) हमेशा की तरह कपास की खरीददारी बहुत देर से प्रारंभ करेगा और तब तक छोटा किसान अपनी फसल बेच चुका होगा और इस मौके का फायदा व्यापारी उठा रहे हैं। वे कपास सस्ते दाम पर खरीद रहे हैं, जबकि सांसद, मंत्रीगण केंद्र के कृषि अधिकारियों से सीसीआई के मनमानी पर बात कर चुके हैं, लेकिन आश्वासन के बाद भी सीसीआई ने अब तक कपास की खरीदी प्रारंभ नहीं की है और केवल पंजीयन ही कर रही है। यह देरी छोटे किसानों के लिए तो जानलेवा ही है।
हर बार यही स्थिति बनती है - किसानों की बेहतरी के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश लाई किसानों को उपज का सही दाम व समर्थन मूल्य दिलाने में लगी केंद्र की मोदी सरकार के सीसीआई जैसे विभाग ही किसानों की खराब हालात के दोषी है।ये विभाग नहीं चाहते कि किसानों को लाभकारी भाव मिले। सीसीआई की देरी बताती है कि यह विभाग व्यापारियों के हाथों की कठपुतली है। किसानों का कहना है कि सीसीआई कमजोर किस्म का कपास नहीं लेता है लेकिन यह प्रत्येक सीजन में हमेशा देरी से मंडियों में खरीददारी करने आता है, तब तक छोटे किसान व्यापारियों द्वारा लूट चुका होता है और उसका उच्च गुणवत्ता वाला कपास भी कम दाम पर वह बेचने को मजबूर हो जाता है। सीसीआई का यह विलंब व्यापारियों व भारतीय कपास निगम के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका को बल देती है।
समर्थन मूल्य पर सीसीआई ही कपास खरीदता है और वहीं (सीसीआई) किसानों के साथ होने वाली लूट-खसोट का कारण बनता है। यदि सीसीआई कपास की फसल आते ही समर्थन मूल्य पर खरीदी करने लगे तो किसानों का भला होगा और उनका कपास सस्ता नहीं बिकेगा।
सीसीआई को सुधारे सरकार - छोटे व कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान कपास का संग्रहण साधन व सुविधा के अभाव में नहीं कर पाते और ऐसे किसान ज्यादा है। यह किसान सीसीआई के आने का इंतजार नहीं कर सकते। ऐसे में इन्हें व्यापारियों को कम दाम में फसल बेचना पड़ रही है। निमाड़ के किसानों का कहना है कि मोदी सरकार के किसान हितैषी प्रयासों के चलते हम चाहते हैं कि कपास की फसल जिस गुणवत्ता की हो उसकी खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही हो साथ ही सीसीआई को भ्रष्टाचार से मुक्त करके समय पर खरीदी प्रारंभ करने की व्यवस्था करें तो किसान कपास की फसल में हुआ खर्च निकाल पाएगा। अन्यथा किसानों के हालात नहीं सुधरेंगे। यदि इसी हफ्ते से सीसीआई खरीदी प्रारंभ कर दें तो कई किसानों को लाभ होगा।