दुनिया की प्राचीनतम वैज्ञानिक और समृद्ध भाषा संस्कृत
   Date14-Oct-2020

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धर्मधारा
(गतांक से आगे)
ये सब तथ्य शोधों पर आधारित हैं। संस्कृत ध्वनि शास्त्र के नियमों पर पूर्णतया खरी उतरती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए संस्कृत बहुत उपयोगी है। संस्कृत धरती की सबसे स्पष्ट भाषा है। 2035 तक आने वाले छठे और सातवें जनरेशन के सुपरकम्प्यूटर के लिए संस्कृत भाषा सर्वोत्तम भाषा होगी। हमारी भाषा संस्कृत जिसको दुनिया पूजा-पाठ की भाषा बोलती थी, लेकिन आज दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत को कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए सबसे अच्छी भाषा माना जाता है। इसका कारण है संस्कृत में जैसा बोला जाता है, वैसे लिखा जाता है, जैसे लिखा जाता है, वैसे पढ़ा जाता है। विवेकहीन कम्प्यूटर भला कैसे समझ पाएगा कि ्यठ्ठश2 बोला जा रहा है या हृश बोला जा रहा है, स्शठ्ठ बोला जा रहा है या स्ह्वठ्ठ बोला जा रहा है। ष्टद्धद्गद्वद्बह्यह्लह्म्4 को केमिस्ट्री कहते हैं, जबकि ष्टद्धशश्चह्म्ड्ड को कोपरा नहीं, बल्कि चोपड़ा कहते हैं। क्कह्वह्ल और क्चह्वह्ल समान होते हुए भी दोनों का उच्चारण बिल्कुल अलग हैं। कब कहां क्या साइलेंट हो जाए, समझ के परे है। भाषा वही श्रेष्ठ होती है, जो विचार उत्पन्न करती है, जो विचार लाती है, दुनिया को देखने और समझने में मददगार होती है, नजरिया बदलती है। संस्कृत में ये सब गुण विद्यमान हैं। संस्कृत में समस्त विश्व को परिवार कहा गया है, जबकि अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में विश्व को बाजार समझा जाता है। बाजार में व्यापार होता है, जबकि परिवार में प्यार होता है। फैसला हमें करना है कि हमें प्यार की भाषा को बढ़ावा देना है या व्यापार की। संस्कृत में जब मंगल कामना की जाती है तो ऐसा नहीं कि अपनों के लिए ही की जाती है। संस्कृत में मंगल कामना भी चराचर, सम्पूर्ण सृष्टि के लिए होती है, सभी के लिए होती है, विराट सोच के साथ होती है। संस्कृत के जानने वाले लोगों की सोच विराट होती है। तभी हमारे ऋषि-मुनियों की हजारों साल पहले कितनी विराट सोच थी -
अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
सनातन धर्म के सभी ग्रंथ संस्कृत भाषा में हैं - वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता। रामानुज, कपिल, जैमिनी जैसे दार्शनिक, पाणिनि जैसे व्याकरण के ज्ञाता, पतंजलि जैसे योगगुरु, आर्यभट्ट जैसे गणितज्ञ, कालिदास और दंडी जैसे रचनाकार, वशिष्ठ जैसे ज्ञानी, चरक और सुश्रुत जैसे आयुर्वेद और शल्य चिकित्सक संस्कृत भाषा के ज्ञान से बने। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्कृत के पठन-पाठन पर विशेष जोर दिया गया है। संस्कृत जानने वाले व्यक्ति का सम्मान होता है, लोग पैर छूते हैं। दुनिया में ऐसी कोई और भाषा नहीं है, जिसके जानकार व्यक्ति के लोग पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। (समाप्त)