दुनिया की प्राचीनतम वैज्ञानिक और समृद्ध भाषा संस्कृत
   Date13-Oct-2020

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धर्मधारा
सं स्कृत के बिना भारतीय संस्कृति अधूरी है। संस्कृत दुनिया की प्राचीनतम भाषा होते हुए भी प्रासंगिक, पूर्ण, नवीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा है। संस्कृत देववाणी के साथ ही साथ मनुष्यवाणी भी है। संस्कृत आध्यात्मिक भाषा के साथ ही साथ वैज्ञानिक भाषा भी है। संस्कृत परलोक की भाषा के साथ ही साथ इस लोक की भी भाषा है। संस्कृत ज्ञान और विज्ञान की भाषा है। संस्कृत दुनिया की सबसे स्पष्ट भाषा है। कम से कम शब्दों में अधिक बात कहने की क्षमता संस्कृत में है। संस्कृत के अतिरिक्त कोई भाषा नहीं है, जो जैसी बोली जाती हो, वैसी लिखी जाती हो और जैसे लिखी जाती हो, वैसे ही समझी और पढ़ी जाती हो। संस्कृत एक ऐसी भाषा है, जिसके शब्दों को वाक्य में इधर उधर करने से भी वाक्य के अर्थ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है जैसे - 'मैं कृष्ण के घर जाता हूँÓ, अहं कृष्णस्य गृहं गच्छामि या गच्छामि कृष्णस्य गृहं अहं या अहं कृष्णस्य गच्छामि गृहं सबका अर्थ एक ही होगा - मैं कृष्ण के घर जाता हूँ। अब जरा अंग्रेजी में देखिए जैसे 'राम वाज सन ऑफ दशरथÓ (क्रड्डद्व 2ड्डह्य ह्यशठ्ठ शद्घ ष्ठड्डह्यद्धह्म्ड्डह्लद्ध), अब दशरथ और राम के शब्दों के क्रम को बदल देते हैं 'दशरथ वाज सन ऑफ रामÓ (ष्ठड्डह्यद्धह्म्ड्डह्लद्ध 2ड्डह्य ह्यशठ्ठ शद्घ क्रड्डद्व)। दूसरी भाषा में अर्थ का अनर्थ हो जाएगा अगर शब्दों के स्थान को बदल दिया जाए तो।
संस्कृत मस्तिष्क को तेज बनाती है। संस्कृत सतोगुण में वृद्धि करती है और नैतिक मूल्यों का सृजन करती है। संस्कृत एकाग्रता बढ़ाती है। संस्कृत बोलने में जीभ के सभी मांसपेशियों का इस्तेमाल होता है। इसी कारण स्पीच थेरेपी में भी संस्कृत का इस्तेमाल किया जाता है। ब्लड प्रेशर संस्कृत के प्रयोग से कम होता है और मधुमेह जैसी समस्याओं में भी संस्कृत सुनने और बोलने का सकारात्मक असर पड़ता है। (क्रमश:)