कोरोना से बचाव के अभियान की गति...
   Date12-Oct-2020

vishesh lekh_1  
देश में अनलॉक-5 के तहत जो ढील दी जानी थी, वह अंतिम मानी जानी चाहिए... लेकिन जैसे ही सर्दियां बढ़ेंगी, वैसे ही कोरोना के खतरे को लेकर भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ भी चेतावनियां जारी कर रहे हैं... अत: कोरोना का खतरा टला नहीं है... अब समय आ गया है, जब कोरोना के खिलाफ अच्छा काम करने वालों का सम्मान भी किया जाए... ऐसे संस्थानों को सम्मानित किया जाए, जिन्होंने सतर्कता और जागरुकता के लिए अपना तन-मन-धन लगाया हो... विभिन्न संस्थानों को भी खुद से जुड़े सेवाभावियों की पीठ थपथपानी चाहिए... कुल मिलाकर, आभार प्रदर्शन इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए... कोरोना से बचाव का संदेश गली-गली तक हरसंभव माध्यम से पहुंचाना चाहिए... ऐसे व्यापक अभियान की जरूरत आज भारत में सर्वाधिक है... हमारे यहां न केवल कोरोना बढ़ रहा है, बल्कि त्योहार भी आ रहे हैं... बेशक, यह अभियान हमारे त्योहारों का हिस्सा बन जाए, तो इससे बेहतर कुछ नहीं... अनलॉक होते देश में फैलते कोरोना पर शिकंजा कसने के लिए लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के प्रयास जितने भी किए जाएं, कम होंगे... हल्की सर्दी और उसके साथ ही त्योहारों का दौर शुरू होने वाला है... अर्थव्यवस्था भी रफ्तार पकडऩे लगी है... ऐसे में, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जागरुकता अभियान की शुरुआत स्वागतयोग्य है। कोरोना से निपटने और बचने के लिए जरूरी है, हम पहले से कहीं ज्यादा सावधान रहें... जीविका के लिए घर से निकल रहे लोगों के मन में डर भले कम हुआ हो, लेकिन खतरा कम नहीं हुआ, बल्कि पहले की तुलना में बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस जरूरी अभियान को बुधवार को ही मंजूरी दे दी थी... सरकार चाहती है कि यह अभियान जन-आंदोलन की तरह चले... इसमें जनता की पूरी भागीदारी हो... मास्क पहनने, शारीरिक दूरी बनाए रखने और हाथ धोने के मोर्चे पर कोई कोताही न बरते। यह कोरोना से सबसे सस्ता और कारगर बचाव है... विशेषज्ञ भी अनेक बार दोहरा चुके हैं कि किसी दवा या कोरोना की वैक्सीन के अभाव में मास्क, शारीरिक दूरी और हाथ धोना सुरक्षित रहने के प्रभावी हथियार हैं... आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य क्षेत्र, खेल, संस्कृति, फिल्म उद्योग, रेलवे इत्यादि के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस अभियान से जोडऩे और सतर्क करने का काम किया जाना है... आज वाकई कोविड के खिलाफ संकल्प लेने और दोहराने की जरूरत है... सभी केंद्रीय और प्रांतीय मंत्रालयों और विभागों को इस अभियान के तहत पूरी सतर्कता के साथ काम करना होगा... सरकार के स्तर पर दिग्गज नेताओं और अधिकारियों को भी अपने आपको सुरक्षित रखते हुए पूरे देश को प्रेरित करना होगा... यह देखना दुखद है कि बड़े-बड़े नेता संक्रमण की चपेट में आए हैं। खासतौर पर पुलिसकर्मियों के संक्रमित होने के जो आंकड़े मुंबई से आ रहे हैं, वे निराश करते हैं...
दृष्टिकोण
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी रूद्रम...
भारत निर्मित अर्थात स्वदेशी एनटी रेडियेशन मिसाइल 'रूद्रमÓ की सफलता ने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का नया आयाम गढ़ा है... इस परीक्षण के सफल होने के बाद उम्मीद करनी चाहिए कि जल्द ही हमारे युद्धक विमानों में इसकी तैनाती होगी... सुखोई और स्वदेशी तेजस में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है... बेशक, डीआरडीओ के लिए ये खुशी के पल हैं, लेकिन अभिभूत होने की जरूरत नहीं... भारत को सुरक्षित बनाने की दिशा में बहुत काम बाकी हैं... हम प्रतिकूल परिस्थितियों से घिरते जा रहे हैं... हमें उस दिशा में और तेजी से बढऩा होगा, जहां हमें विदेश से एक भी मिसाइल या विमान खरीदने की जरूरत न पड़े। हमारी सामरिक आत्मनिर्भरता हमें आर्थिक व सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मददगार होगी... रक्षा के मोर्चे पर हमारे देश का कदम-दर-कदम सशक्त होना सुखद ही नहीं, बल्कि गौरवान्वित करने वाला सिलसिला भी है... गत दिनों रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया... भारत निर्मित एंटी रेडिएशन मिसाइल रूद्रम का परीक्षण पूरी तरह से सफल होना यह साबित करता है कि भारत की वायुसेना पहले की तुलना में और अधिक शक्तिशाली होने जा रही है... युद्धक विमान तो मात्र वाहन की तरह हैं, फर्क इस बात से पड़ता है कि युद्धक विमानों को हमने किन आधुनिक हथियारों से लैस कर रखा है... जैसे रूद्रम का परीक्षण सुखोई-30 एयरक्राफ्ट के जरिए किया गया है... रूद्रम विमानों में तैनात की जाने वाली ऐसी पहली भारतीय मिसाइल है, जो किसी भी ऊंचाई से दागी जा सकती है... यह मिसाइल किसी भी तरह के सिग्नल और रेडिएशन को न केवल पकड़ सकती है, बल्कि उसे नष्ट भी कर सकती है...