जितना बन पड़ेगा, उतना गांव गरीबों के लिए करूंगा- मोदी
   Date12-Oct-2020

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प्रधानमंत्री ने ग्रामीणों के लिए किया स्वामित्व योजना का शुभारंभ
नई दिल्ली द्य 11 अक्टूबर (वा)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश के ग्रामीणों के लिए स्वामित्व योजना का शभारंभ किया। उन्होंने इस योजना को ग्रामीण भारत के लिए बड़ा बदलाव लाने वाला बताया है। इसका एक लाख परिवारों को फायदा मिला है। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संपत्ति कार्ड मिलने पर आज लाभार्थी सबसे ज्यादा खुश होंगे। आज की शाम उनके लिए खुशियों की शाम है, नए सपने बुनने का समय है। प्रधानमंत्री ने इस दौरान विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले सत्ता में बैठे लोग बड़े-बड़े वादे किया करते थे, लेकिन मैं ऐसा नहीं करूंगा। मुझसे गरीब, दलितों के लिए जितना हो सकेगा, मैं उनका काम करूंगा।
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने विभिन्न लाभार्थियों से बात की। श्री मोदी ने मध्यप्रदेश के हितग्राहियों में से चयनित डिंडोरी जिले के एक हितग्राही दशरथ सिंह मरावी से चर्चा भी की। हितग्राही ने श्री मोदी के सवालों के जवाब में कहा कि उन्हें इस कार्य में कोई परेशानी नहीं हुयी। श्री मोदी ने लाभान्वित हितग्राहियों से कहा कि अब उनकी संपत्ति पर कोई भी गलत नजर नहीं रख पाएगा। वहीं हरियाणा के एक लाभार्थी से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने उससे पूछा कि अब तो आपको पक्के कागज मिल गए तो कोई दिक्कत तो नहीं हुई। तो लाभार्थी ने कहा- नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मकान के कागज मिल गए, बैंक से कर्ज मिल जाएगा तो क्या आप अपने काम को आगे बढ़ाएंगे, इस पर लाभार्थी ने कहा कि जरूर। लाभार्थी ने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्हें मकान के पक्के कागज पर बैंक तीन लाख तक का कर्ज दे रहा है। प्रधानमंत्री ने उनसे बच्चों को पढ़ाने और राजमिस्त्री बनने को मजबूर न करने को कहा। उत्तरप्रदेश की लाभार्थी रामरति देवी ने प्रधानमंत्री को बताया कि मकान के पक्के कागज मिलने से अब उन्हें कोई उनके घर से नहीं निकाल सकता है।
अब वे सुरक्षित महसूस कर रही हैं। महाराष्ट्र के लाभार्थी विश्वनाथ से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब आपके गांव के लोग खुश होंगे तो उन्होंने कहा- हां, प्रक्रिया शुरू हो गई है।
संबोधन की मुख्य बातें
ठ्ठगांव के लोगों को, गरीबों को अभाव में रखना कुछ लोगों की राजनीति का आधार रहा है। ये भूतकाल बताता है। हमने गरीबों को अभावों से मुक्ति का अभियान चलाया है।
ठ्ठकिसान और खेत मजदूर को मिल रही बीमा, पेंशन जैसी सुविधाओं से जिनको परेशानी है, वो आज कृषि सुधारों के विरोध में हैं। देश ने ठान लिया है कि गांव और गरीब को आत्मनिर्भर बनाना, भारत के सामथ्र्य की पहचान बनाना है। इस संकल्प की सिद्धि के लिए स्वामित्व योजना की भूमिका भी बहुत बड़ी है।
ठ्ठछोटे किसानों, पशुपालकों, मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड मिलने से जिनकी काली कमाई का रास्ता बंद हो गया है, उनको आज समस्या हो रही है। यूरिया की नीमकोटिंग से जिनके गैर-कानूनी तौर-तरीके बंद हो गए, दिक्कत उन्हें हो रही है। किसानों के बैंक खाते में सीधा पैसा पहुंचने से जिनको परेशानी हो रही है, वो आज बेचैन हैं।
ठ्ठगांव और गरीबों को अभाव में रखना कुछ लोगों की राजनीति का आधार रहा है। आजकल इन लोगों को खेती में जो ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं, उनसे भी दिक्कत हो रही है। ये बौखलाए हुए हैं, ये बौखलाहट किसानों के लिए नहीं, खुद के लिए है।
ठ्ठवर्षों तक जो लोग सत्ता में रहे, उन्होंने बातें बहुत बड़ी-बड़ी की, लेकिन उन्होंने गांव और ग्रामीणों को ऐसी ही मुसीबतों में छोड़ दिया। मैं ऐसा नहीं कर सकता, आपके आशीर्वाद से जितना बन पड़ेगा, उतना आपके लिए, गांव, गरीब, दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित के लिए करना है।
ठ्ठदशकों तक गांव के करोड़ों परिवारों के पास अपना घर नहीं था। आज गांव के करीब-करीब 2 करोड़ गरीब परिवारों को पक्के घर मिल चुके हैं। स्वामित्व योजना से हमारी ग्राम पंचायतों का भी नगर पालिकाओं और नगर निगमों की तरह व्यवस्थित तरीके से मैनेजमेंट आसान होगा।ठ्ठ छह दशकों तक गांव के करोड़ों लोग बैंक खातों से वंचित थे। ये खाते अब जाकर खुले हैं। छह दशकों तक, गांव के करोड़ों परिवार शौचालय से वंचित थे। आज घर-घर में शौचालय भी बन गए हैं। दशकों तक गांव का गरीब गैस कनेक्शन से वंचित था। आज गरीब के घर भी गैस कनेक्शन पहुंच गया है।
ठ्ठपिछले छह वर्षों में पुरानी कमी को दूर करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। आज देश में बिना किसी भेदभाव, सबका विकास हो रहा है, पूरी पारदर्शिता के साथ सबको योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
ठ्ठगांव के कितने ही नौजवान हैं, जो अपने दम पर कुछ करना चाहते हैं। लेकिन घर होते हुए भी उन्हें, अपने घर के नाम पर बैंक से कर्ज मिलने में कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। स्वामित्व योजना के तहत बने प्रॉपर्टी कार्ड को दिखाकर, बैंकों से बहुत आसानी से कर्ज मिलना सुनिश्चित हुआ।
ठ्ठजब संपत्ति का रिकॉर्ड होता है, जब संपत्ति पर अधिकार मिलता है तो नागरिकों में आत्मविश्वास बढ़ता है। जब संपत्ति का रिकॉर्ड होता है तो निवेश के लिए नए रास्ते खुलते हैं। संपत्ति का रिकॉर्ड होने पर बैंक से कर्ज आसानी से मिलता है, रोजगार-स्वरोजगार के रास्ते बनते हैं।
ठ्ठपूरे विश्व के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते रहे हैं कि जमीन और घर के मालिकाना हक की, देश के विकास में बड़ी भूमिका होती है।