निर्भया के चारों दोषियों के डेथ वारंट जारी 22 जनवरी को सुबह 7 बजे दी जाएगी फांसी
    Date08-Jan-2020

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नई दिल्ली द्य 7 जनवरी (वा)
16 दिसम्बर 2012 की रात निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार और बाद में उसकी मौत से देश को हिला देने वाले इस वीभत्स कांड के चारों दोषियों को फांसी पर लटकाये जाने के लिए मंगलवार को पटियाला हाउस अदालत ने डेथ वारंट जारी कर दिया। चारों दोषियों पवन, विनय, मुकेश और अक्षय को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फंदे पर लटकाया जाएगा।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने सात साल पुराने इस मामले में फैसला सुनाते हुए दोषियों को अपनी कानूनी औपचारिकताएं पूरा करने के लिए 14 दिन का समय दिया है।
फैसला सुनाये जाने के समय अदालत कक्ष में न्यायाधीश अरोड़ा, जेल के अधिकारी और दोनों पक्षों के वकील मौजूद थे। चारों को तिहाड़ जेल में फांसी दी जाएगी। डेथ वारंट जारी करने से पहले चारों दोषियों की न्यायाधीश अरोड़ा के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी की गई। साकेत कोर्ट ने 13 सितम्बर 2013 को इन चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। इस मामले में कुल छह लोग गिरफ्तार किए गए थे, जिसमें से एक रामसिंह ने जेल में ही खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक अन्य नाबालिग था, जो तीन साल सजा काटने के बाद सुधार गृह से छूट गया था। निर्भया के अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा है कि वह उच्चतम न्यायालय में क्यूरेटिव याचिका दायर करेंगे।
राजधानी में 16 दिसम्बर 2012 की रात को निर्भया के साथ एक चलती बस में सामूहिक बलात्कार करने के बाद उसे बुरी तरह से घायल कर दिया गया था। बाद में उसकी उपचार के दौरान सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी।
जानिए क्या है निर्भया के हैवानों के लिए जारी ब्लैक डेथ वारंट? जिसके बाद जज तोड़ देते हैं पेन की निब
-कानून के अनुसार ये वारंट दोषी के खिलाफ सभी कानूनी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही जारी किया जाता है। ये वारंट आरोपी व उसके वकील की अनुपस्थिति में नहीं जारी किया जा सकता है। इसके लिए दोषी और उसके परिवार को 14 दिन पहले सूचना दी जाती है ताकि दोषी के पास अपने परिवार से आखिरी बार मुलाकात करने का पर्याप्त समय हो।
-ब्लैक डेथ वारंट के फॉर्म नंबर 42 के पहले कॉलम में फांसी दिए जाने वाली जेल का नाम, जिन्हें फांसी दी जानी है, उन दोषियों के नाम और इसके बाद केस का नंबर लिखा जाता है, जो केस दोषियों के खिलाफ चलाया जा रहा है। इसके बाद फांसी दिए जाने की तारीख और साल लिखा जाता है। इसके अलावा केस से जुड़े कोर्ट का जिक्र भी किया जाता है।
-ब्लैक डेथ वारंट के फॉर्म नंबर 42 के अनुसार- फांसी दिए जाने वाले को तब तक गले से लटकाये रखा जाए, जब तक उसकी जान न निकल जाए। कोर्ट की ओर से जेल प्रशासन को आदेश होता है कि ब्लैक डेथ वारंट दोषियों के डेथ वारंट के साथ वापस कोर्ट भेज दिया जाए। फॉर्म के सभी कॉलम भर देने के बाद सबसे नीचे हस्ताक्षर करने के साथ ही ये मौका होता है, जब जज अपने पेन की निब तोड़ देते हैं।
निर्भया के दोषियों को मेरठ का पवन जल्लाद देगा फांसी, बाप-दादा-परदादा सभी थे जल्लाद
मेरठ। निर्भया सामूहिक बलात्कार व हत्या मामले में तिहाड़ जेल में बंद चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी। दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए पवन जल्लाद को पहले ही सूचित कर दिया गया है। दिसम्बर माह में कारागार महानिदेशक आनंद कुमार ने तिहाड़ को पवन जल्लाद के बारे में पत्र मिलने की पुष्टि की थी। बता दें कि उत्तरप्रदेश में सिर्फ दो जल्लाद हैं, पहला मेरठ का पवन और दूसरा लखनऊ का इलियास जल्लाद।
दादा ने दी थी इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी
पवन जल्लाद मेरठ में रहता है। पहले उसके पिता मम्मूसिंह, दादा कल्लूसिंह और परदादा लक्ष्मणसिंह फांसी देते थे। पवन देश का एकमात्र ऐसा जल्लाद है, जो अपने पुश्तैनी धंधे को संभाले हुए है। कल्लूसिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी दी थी।
-7 दिन पहले सजा की तारीख से फांसी का फंदा जेल में पहुंचाया जाता है, उसके बाद कई बार ट्रायल किया जाता है।
-10 फांसी के फंदे बक्सर के सेंट्रल जेल से तिहाड़ में निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए मंगाए गए हैं।