जन्म से ही नहीं आचरण से भी हिंदू बनें -श्री भैयाजी
    Date03-Jan-2020

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इंदौर ठ्ठ स्वदेश समाचार
इंदौर-3 के विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा रचित देव से महादेव पुस्तक के मराठी संस्करण का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी (भैयाजी) के मुख्य आतिथ्य में प.पूज्य संत उत्तम स्वामी महाराज की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। देव से महादेव का मराठी अनुवाद मराठी की सशक्त हस्ताक्षर व प्रसिद्ध लेखिका श्रीमती मेघना मधुकर निरखीवाले ने किया है। उक्त कार्यक्रम में भैयाजी ने उन्हें सम्मानित किया।
इस अवसर पर माननीय सरकार्यवाहजी ने कहा कि यह पुस्तक का मराठी में अनुवाद करना मराठी भाषियों के लिए महादेव को जानने और समझने हेतु सहायक सिद्ध होगी। युवाओं और सर्वहारा वर्ग को अध्यात्म एवं ईश्वर से जोडऩे में सहायक सिद्ध होगी। श्री भैयाजी ने कहा आज मीडिया का विजन व मिशन नहीं बचा है, वह व्यवसाय बनकर रह गया है। समाज का प्रबुद्ध वर्ग समाज में भ्रम फैला रहा है। सिविल सोसायटी के नाम से नवीन-नवीन शब्दावली गढ़ी जा रही है, मानव अधिकार का उपयोग भी राजनीति से प्रेरित होकर किया जा रहा है। इन सब से निपटना चुनौती है। सभ्य लोगों के मौन रहने से असभ्य लोग आगे बढ़ते हैं। सज्जन आदमी निष्क्रिय है वहीं किसी झंझट में नहीं पड़ऩा चाहता, वहीं दुर्जन सक्रिय हैं, संगठित है प्रभावी भी है। आज बोलने वाले हिंदू नहीं, हिंदू होना ही काफी नहीं। आचरण से हिंदू होना चाहिए। आचरण ही हमारा सामथ्र्य है। हम आचरण से हिंदू बनें।
आकाश विजयवर्गीय ने अपने उद्बोधन में कहा कि देव से महादेव पुस्तक की रचना आज के आधुनिक युग में युवा एवं सर्वहारा वर्ग के जीवन में सुख, समृद्धि एवं शांति स्थापित करना है। युवाओं में अपने अंदर के ईश्वरत्व को जगा कर सही दिशा में अपनी ऊर्जा को लगाकर राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनाने के उद्देश्य के लिए की है। मराठी समाज के प्रबुद्धजनों की पुस्तक के प्रति रूचि को देखते हुए देव से महादेव पुस्तक का मराठी संस्करण का प्रकाशन किया गया है। समारोह में विशिष्ठ अतिथि के रूप में पद्मभूषण आचार्य डॉ. गोस्वमी गोकुल उत्सव महाराजजी, पद्मश्री अभय छजलानीजी, पद्मश्री भालू मोंढे, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वी.एस. कोकजेजी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री रमेश मैंदोला उपस्थित थे। कार्यक्रम में विशिष्ठ रूप से मराठी समाज के प्रबुद्धजनों सहित समाजसेवी मुख्य रूप से शामिल थे। पुस्तक का मराठी अनुवाद श्रीमती मेघना मधुर निरखीवाले ने किया। सरकार्यवाह भैयाजी ने उनका शाल, श्रीफल से सम्मान किया।