हम संविधान से अलग कोई सत्ता केंद्र नहीं चाहते- डॉ. भागवत
   Date19-Jan-2020

f_1  H x W: 0 x
बरेली द्य 19 जनवरी (वा)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि हम शक्ति का कोई दूसरा केंद्र नहीं चाहते, संविधान के अलावा कोई शक्ति केंद्र होगा, तो उसका विरोध करेंगे।
डॉ. भागवत रविवार को बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 'भविष्य का भारत : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोणÓ विषय पर बोल रहे थे। इस मौके पर सरसंघचालक ने संविधान से लेकर हिंदुत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि संघ का कोई एजेंडा नहीं है, संघ भारत के संविधान को मानता है। हम शक्ति का कोई दूसरा केंद्र नहीं चाहते, संविधान के अलावा कोई शक्ति केंद्र होगा, तो हम उसका विरोध करेंगे, क्योंकि ये विचार पहले से तय है। संघ को खत्म करने वाले कितने लोग आए और चले गए, लेकिन संघ को समाप्त नहीं कर सके। डॉ. भगवत ने कहा की सत्य पर आधारित विरोध करने पर सुधार होता है, लेकिन बिना सोचे-समझे गुमराह किया जाना अनुचित है। उन्होंने संघ के दृष्टिकोण को विस्तार से समझाते हुए कहा कि भारत एक मजबूत देश है, दुनिया में उसकी पहचान बन चुकी है, इसे और मजबूत करना है। डॉ. भागवत ने कहा कि संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन भावना क्या है। वह भावना है, यह देश हमारा है, हम अपने महान पूर्वजों के वंशज हैं और हमें अपनी विविधता के बावजूद एक साथ रहना होगा। इसे ही हम हिंदुत्व कहते हैं।
जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर समस्या तो समाधान भी -उन्होंने साफ किया किसी का विचार किसी राजनीति से जुड़ा नहीं, लेकिन जब-जब कोई विचार होता है तो प्रकट किया जाता है। उन्होंने कहा कि संघ का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि एक गंभीर समस्या है, तो समाधान भी है, कुछ लोग भ्रमवश यह कह रहे हैं कि संघ दो बच्चों तक परिवार को सीमित करने की इच्छा रखता है। पिछले दोनों जनसंख्या नियंत्रण संबंधी मेरे बयान पर भ्रम फैलाया गया, जबकि ऐसा नहीं कहा गया था। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। कुछ लोग हम पर आरोप लगाते हैं, वो हमारे दुश्मन नहीं हैं, वह भी हमारे हैं। उन्होंने कहा कि हम बच्चे पैदा करके भीड़ जमा कर रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना है।
संघ के पास कोई रिमोट कंट्रोल नहीं-डॉ. भागवत ने कहा कि संघ को लेकर तमाम भ्रांतियां फैलाई जाती हैं, इन भ्रांति का समाधान तभी हो सकता है, जब संघ को कोई नजदीक से समझे। संघ के पास कोई रिमोट कंट्रोल नहीं है और न ही किसी को अपने हिसाब से चलाता है। अन्य लोग कहते हैं विविधा एकता है, जबकि हम एकता में विविधता मानते हैं। उन्होंने भविष्य के भारत पर संघ का दृष्टिकोण समझाते हुए कहा कि हमें जाति, प्रांत और क्षेत्रवाद को छोड़कर हिंदू होने पर गर्व करना होगा, क्योंकि जो भी भारत में पैदा हुआ, उसके वंशज यहीं के हैं। वह सब हिन्दू ही हैं।उन्होंने कहा कि सत्य पर आधारित विरोध करने पर सुधार होता है, लेकिन बिना सोचे-समझे गुमराह किया जाना अनुचित है। उन्होंने संघ के दृष्टिकोण को विस्तार से समझाते हुए कहा कि भारत एक मजबूत देश है, दुनिया में उसकी पहचान बन चुकी है, इसे और मजबूत करना है। उन्होंने साफ किया- संघ किसी राजनीति से जुड़ा नहीं, लेकिन जब-जब कोई विचार होता है तो प्रकट किया जाता है।डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि देश के संविधान में भविष्य के भारत की कल्पना की गई है। इजरायल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह दुनिया में सम्पन्न देश है। आज दुनिया में उसकी धाक है। उसको हाथ लगाया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हमारा देश करोड़ों की जनसंख्या वाला हो गया है, देश के खजाने में 16 हजार करोड़ बाकी है। वहीं, इंग्लैंड से हमको 30 हजार करोड़ वसूलना है। उन्होंने कहा कि हम बार-बार गुलाम होते रहे, इसलिए बार-बार स्वतंत्र होते रहे।
जब-जब हिंदुत्व कमजोर हुआ तब-तब भारत का भूगोल बदला
डॉ. भागवत ने कहा कि हम कहते हैं कि यह देश हिंदुओं का है और 130 करोड़ लोग हिंदू हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी के धर्म, भाषा या जाति को बदलना चाहते हैं। हम संविधान से अलग कोई सत्ता केंद्र नहीं चाहते हैं, क्योंकि हम इस पर विश्वास करते हैं और वही भविष्य का भारत पर संघ का दृष्टिकोण है। उन्होंने दोहराते हुए कहा कि भारत में हम सब हिंदूवासी हैं, जाति पंथ, संप्रदाय, प्रांत और तमाम विविधताओं के बावजूद हम एक सभी को मिलकर भारत का निर्माण करना है। जब-जब हिंदुत्व कमजोर हुआ, तब-तब भारत का भूगोल बदला है, इसलिए हमें विभिन्न संस्कृति और विविधाओं के बीच एक रहना है।