विकास व शिक्षा से होगा जनसंख्या का समाधान
   Date16-Jan-2020

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खंडवा द्य स्वदेश समाचार
जनसंख्या समस्या नहीं हो सकती, विकास, शिक्षा और नवीन शोध से इस जनसंख्या समस्या का समाधान हो सकता है।
उक्त विचार गौरीकुंज सभागृह में आयोजित स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला के अंतिम दिन 'भविष्य का भारत समान नागरिक संहिता एवं जनसंख्या नियंत्रणÓ विषय पर राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने व्यक्त किए। डॉ. स्वामी ने कहा हमारे देश में भड़काने वाले लोग अधिक है, जैसे नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर जमकर अफवाह फैलाई जा रही है।
जबकि हकीकत ये है कि 1947 में बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान बना, फिर बांग्लादेश बना। उस समय कहा गया था कि जो यहां रहना चाहते रह सकते हैं। बाद में पं. जवाहरलाल नेहरू व लियाकत अली समझौता हुआ, जिसमें अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा की बात कही गई, लेकिन 10 दिन बाद ही लियाकत अली को मार दिया गया, उनके साथ वचन भी चला गया। नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान 22 प्रतिशत हिंदू अब डेढ़ फीसदी बचे हैं। प्रताडि़त होते हुए जो 1947 से यहां आ रहे हैं, उन्हें पर्चा दिया लेकिन नागरिकता नहीं दी। डॉ. स्वामी ने कहा हमने कहा कि 31 दिसंबर 2014 के पहले जो यहां आए हैं, 5 साल यहां रहे हैं, उन्हें नागरिकता दी जाएगी। 2003 में जब अटलजी की सरकार थी तब सांसद डॉ. मनमोहन सिंह ने खड़े होकर आडवाणीजी से कहा कृपया जो लोग धर्म के आधार पर आए हैं, उनको नागरिकता देना चाहिए। पाकिस्तान का मुसलमान नहीं आना चाहता तो क्या उसे घसीटकर लाए। सीएए महात्मा गांधी व कांग्रेस का वचन था कि नागरिकता देंगे, जिसे अब मोदी सरकार निभा रही है।
डॉ. स्वामी ने कहा जनसंख्या समस्या नहीं हो सकती, विकास, शिक्षा और नवीन शोध से इस समस्या का समाधान हो सकता है। शिक्षा पर डेढ़ नहीं 6 फीसदी जीडीपी खर्च हो, देश का भविष्य उज्जवल तब होगा, जब हम सोच में बदलाए लाएंगे। जनसंख्या को कम करने के लिए आपातकाल (इमरजेंसी) में इंदिरा गांधी ने प्रयास किया। क्या हुआ वे खुद चुनाव हार गई। 2025 में हम दुनिया में जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर आ जाएंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रह्मपुर के उद्योगपति संजय अग्रवाल ने की। परिचय व्याख्यानमाला समिति संयोजक संतोष गुप्ता ने दिया। जयदीप पाटीदार ने सम्मान किया तथा आभार महेंद्र शुक्ला ने माना। व्याख्यान के अंतिम दिन बड़ी संख्या में शहरवासी गौरीकुंज सभागृह में पहुंचे।