महंगाई और बेरोजगारी की चिंता...
   Date16-Jan-2020

vishesh lekh_1  
आर्थिक हालातों के मामले में जैसा संचार माध्यम यानी मीडिया जिसमें अखबार, टीवी चैनल, यूट्यूब अन्य सोशल साईट्स जो कुछ कुछ बयां कर रही है, उससे स्थिति अलग नजर आती है, लेकिन एक भेड़चाल की भांति जो चीज एक बार चर्चा में आ जाए तो उसका अच्छा-बुरा पक्ष जाने बिना उसकी तह में जाने के विपरीत सिर्फ सरसरी अफवाह की भांति लोगों को भ्रमित करने का खेल खेला जाता है... रोजगार और महंगाई को लेकर भी ऐसा ही मामला सामने आ रहा है... जब-जब आंकड़े सामने आते हैं, महंगाई दर बढऩे या फिर विकास दर घटने अथवा रोजगार की कमी या छंटनी तब मिर्च मसाला लगाकर पुराने आंकड़ों को नई पैकेजिंग के साथ अपने-अपने तरीके से परोसने में संचार माध्यम पीछे नहीं है... लेकिन इसके पीछे की वास्तविक स्थितियां क्या रही..? किन कारणों से महंगाई को बढ़ावा मिल रहा है या विकास दर की सुस्ती के कौन-कौन से कारण हैं..? इन पर लंबी चर्चा करने, बहस करवाने या फिर आलेख छापना मानो नजरअंदाज ही किया जाता है... इसमें कोई दो राय नहीं है कि आंकड़ों के मान से खुदरा मुद्रास्फीति पांच साल के उच्चतम स्तर यानी दिसंबर 2019 में सामान्य सूचकांक के 7.35 प्रतिशत पर रही... जिसका असर सब्जियों की महंगाई से लेकर दालों, दूध व अन्य चीजों पर भी देखने को मिला... अरहर दाल दिसंबर 2018 में 85.55 प्रति किलो थी, जो दिसंबर 2019 में 97.39 पर पहुंच गई... मूंग 88 थी, जो 98.3 पर पहुंची... अगर इस मान से लोगों की आमदनी का आंकड़ा निकालें तो वह भी इसी रफ्तार से बढ़ी है... आमदनी और खर्च का असंतुलन ही महंगाई बढ़ाता है, लेकिन इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि महंगाई के मान से खर्चों में भी वृद्धि हुई है... अन्य तरह के जो विलासतापूर्ण जीवन की आवश्यकताओं की बाढ़ सी आ गई है, उसने भी खर्चों को बेजा बढ़ा दिया है... आज हर घर में मोबाइल फोन वह भी महंगा और उसका रिचार्ज ही 400-500 रु. होता है... ऐसे में अगर घर में पांच सदस्य हैं और तीन के पास यह फोन है तो विचार किया जा सकता है कि उनका मासिक या फिर त्रैमासिक खर्च कितना बैठता होगा..? इसी तरह के मनोरंजन से जुड़े अन्य खर्चों ने भी लोगों की दिनचर्या एवं महंगाई-आमदनी को भी बेजा तरीके से बिगाड़ दिया है... इसमें संतुलन से ही स्थितियां सुधरेगी... क्योंकि हर समस्या के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता... ठीक ऐसा ही मामला रोजगार में कमी या बेरोजगार को लेकर भी है... जब देश में युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य चल रहे हैं, तेजी से नए वाहनों की बिक्री और संख्या बढ़ रही है, तब क्या इनमें कार्यरत जनशक्ति का आंकड़ा व दायरा भी नहीं बढ़ रहा होगा..? बिना रोजगार मिले क्या वाहन की संख्या बढ़ सकती है..? या हर तरह के निर्माण कार्य सिर्फ मशीनों से ही हो रहे हैं..? कहने का तात्पर्य यही है कि निर्माण और विकास के मान से रोजगार का सृजन भी हो रहा है... बस देखने-समझने का नजरिया ध्यान में रखना होगा...
दृष्टिकोण
एनआरसी पर नीतीश की उलटबासी...
फिलहाल पूरे देश में चर्चा का विषय राष्ट्रीय नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) बना हुआ है... इस पर विरोधी धड़े के लोगों से लाखों गुना ज्यादा समर्थक सड़कों-मैदानों पर 'मैं सीएए के समर्थन में हूँ...Ó की हुंकार भर रहे हैं... कहने का मतलब यही है कि देश में फिलहाल सीएए की चर्चा हो रही है.., लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रह रहकर राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का राग अलाप रहे हैं... आखिर नीतीश कुमार सीएए से इतर सिर्फ एनआरसी को लेकर अपना पक्ष बार-बार क्यों दोहरा रहे हैं..? यह उनकी भाव, भंगिमाओ और बयानों से समझा जा सकता है कि बिहार में विधानसभा के चुनाव आसन्न है... ऐसे में उन्हें अपना लालू यादव वाला मुस्लिम समीकरण बेचैन किए हुए है... क्योंकि वे भी मुस्लिमों के वोट के लिए कहीं न कहीं तुष्टीकरण की नीति को बढ़ावा देने में पीछे नहीं हैं... बिहार में नीतीश कुमार एनआरसी लागू होने नहीं देंगे, ऐसा वे बिहार विधानसभा में आहुत एक दिवसीय विशेष सत्र में कह चुके हैं... नीतीश तो एनआरसी के विरोध में यहां तक भी कह रहे हैं कि देशव्यापी एनआरसी अनावश्यक और औचित्यहीन है... आखिर नीतीश इस तरह के बयानों से सिर्फ केन्द्र सरकार के विरोध में ही खड़े होने की नोटंकी नहीं कर रहे, बल्कि बिहार में भी वह अपने पैर मजबूती से जमाए हुए हैं, बल्कि ऐसा अहसास विपक्षी दलों को करा रहे हैं... यह कहकर कि वे जब तक हैं बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा.., लेकिन नीतीश कुमार यह भूल जाते हैं कि जनता लंबे वादों और बातों को याद नहीं रखती... इसलिए फिलहाल बिहार के विकास पर ध्यान दें तो बेहतर होगा... क्योंकि एनआरसी तो देश में लागू होकर रहेगा... फिर क्या बिहार क्या महाराष्ट्र..? इसलिए नीतीश एनआरसी के नाम पर उलटबासी करना जितनी जल्दी बंद करंेगे, उतना गठबंधन हित में होगा...