खाड़ी में तनाव और बम का भय...
   Date15-Jan-2020

vishesh lekh_1  
जब ईरान ने यह घोषणा कर दी कि वह 2015 का परमाणु समझौता मानने को बाध्य नहीं है, तो किसी को हैरत नहीं हुई... यूरोपीय देशों ने ईरान से यह अनुरोध जरूर किया है कि वह अपने इस फैसले पर फिर से विचार करे और परमाणु समझौते का पालन बरकरार रखे, लेकिन सभी को यह पता है कि वह अब इस समझौते की पाबंदियों को नहीं मानने वाला... दरअसल हैरत तो तब होती, जब इस तनाव के बाद भी वह समझौते को मानने की बात करता... काश, ऐसा होता... लेकिन इस परमाणु समझौते को तोडऩे का बड़ा आरोप किसी भी सूरत में ईरान पर नहीं आएगा, क्योंकि इस समझौते में प्रमुख भूमिका निभाने वाला अमेरिका दो साल पहले ही इससे खुद को बाहर कर चुका है... जिसे हम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति कहते हैं, वह दरअसल अमेरिका के इस समझौते से अलग होने के साथ ही शुरू हुई थी... और उसी के साथ जो सिलसिला शुरू हुआ, जो कि ईरान के सैन्य प्रमुख कासिम सुलेमानी की ड्रोन हमले में हत्या तक पहुंच गया... 2015 में परमाणु समझौते के साथ उम्मीद की जो एक नींव तैयार हुई थी, वह अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है... इसके लिए अमेरिका प्रमुख जिम्मेदार है...
कोई बड़ा युद्ध होगा या नहीं, अभी नहीं कहा जा सकता। अगर ऐसा हुआ, तो बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया में चिनगारियों की संख्या जरूर बढ़ जाएगी... अमेरिका से कहीं ज्यादा इसकी चिंता पश्चिम एशिया में उसके बड़े सहयोगी इजरायल को है... बहुत दूर अमेरिका पर निशाना साधने के मुकाबले ईरान के लिए इजरायल पर निशाना साधना ज्यादा आसान होगा... इस मामले में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि शांति की कोई पहल कहीं नजर नहीं आ रही... राजनयिक स्तर पर वे चैनल कहीं सक्रिय नहीं दिख रहे, जो दोनों देशों को एक साथ बैठा सकें... लेकिन ईरान के सैन्य प्रमुख ने भारत की तरफ आशाभरी नजरों से देखा और कहा कि विश्व में शांति बहाली के मामले में भारत का रुख हमेशा से सक्रिय एवं शिरोधार्य रहा है, इसलिए भारत को वर्तमान घटनाक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच समन्वय स्थापित करवाना चाहिए... यह भारत की नए दौर में बढ़ती और बदलती भूमिका के रूप में भी देखा जाना चाहिए... इस परमाणु समझौते ने ईरान के खिड़की-दरवाजों को पूरी दुनिया के लिए खोला था... ईरान पर लगी तमाम तरह की पाबंदियां हटीं, तो यह उम्मीद भी बनी थी कि वह जल्द ही अपने चरमपंथ को छोड़ दुनिया की मुख्यधारा में सक्रिय हो जाएगा... भारत जैसे देशों के लिए तो यह एक अच्छी उम्मीद इसलिए भी थी कि नई दिल्ली के तेहरान से पुराने आपसी और कारोबारी संबंध रहे हैं, जो लगातार प्रगाढ़ हो रहे हैं, लेकिन अमेरिकी पाबंदियों के चलते भारत पर भी अक्सर रिश्ते तोडऩे के लिए दबाव बनाया जाता था.., लेकिन ट्रंप के शासन संभालते ही ये सारी उम्मीदें ध्वस्त होने लगीं... हालांकि ईरान ने यही कहा है कि वह परमाणु संधि की पाबंदियों को नहीं मानेगा, लेकिन यह भी जोड़ दिया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय परमाणु अप्रसार के विरुद्ध नहीं है... पाबंदियों को न मानने का अर्थ यह है कि वह यूरेनियम के संवद्र्धन को संधि के अनुसार कम करने की बजाय फिर से बढ़ाना शुरू कर देगा... यानी ईरान वही रास्ता अपनाएगा, जो आगे चलकर उसे परमाणु बम बनाने की ओर ले जाएगा...
दृष्टिकोण
बजट पूर्व रेल मंत्री की सौगात...
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए आम बजट और रेल बजट आने में समय है.., लेकिन इसके पूर्व ही रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन और माँ अहिल्या की नगरी इंदौर को सौगात देने की घोषणा कर दी है... यह इंदौर-उज्जैन के ही नहीं, बल्कि आसपास के असंख्य श्रद्धालुओं और उन यात्रियों का भी मान बढ़ाने वाली घोषणा है, जिसकी लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी... इंदौर-बनारस रेल को महाशिवरात्रि से चलाने की घोषणा पीयूष गोयल ने की है... हो सकता है इसमें थोड़ा-बहुत विलंब या आगे-पीछे हो सकता है, लेकिन यह सौगात लोगों को इंदौर-उज्जैन को बनारस से जोडऩे की कड़ी का काम करेगी और यह महाकाल एक्सप्रेस के जरिए संभव होगा... यह महाकाल के श्रद्धालुओं के लिए भी श्रद्धा-आस्था को द्विगुणित करने वाली पहल है कि आजादी के बाद पहली बार किसी रेल का नाम बाबा महाकाल के नाम पर होगा... क्योंकि अभी तक देश-दुनिया के असंख्य श्रद्धालु यहां आते-जाते रहे हैं... लेकिन एक रेल का नामकरण न कर पाना इससे पूर्व की सरकारों के मानस को बयां करने के लिए पर्याप्त है... यह सौगात सिर्फ आस्था के मान से ही महत्व नहीं रखती है, बल्कि इससे जो यात्रियों को सुविधा होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वह भी मध्यप्रदेश के लिए बहुत मायने रखता है... रेल मंत्री ने तो यहां तक कहा कि रेलवे के निजीकरण से रेलवे के संसाधनों, सुविधाओं, ट्रेनों के फेरों और ट्रेनों की सुविधाओं में व्यापक स्तर पर सुधार हुआ है... जनता पीपीपी मॉडल के तहत रेलवे के निरंतर सुधार को स्वीकार कर चुकी है... रेलवे के सर्वांगीण विकास को हम निरंतर आगे बढ़ाएंगे...