सीएए का समर्थन और राष्ट्रधर्म की सीख...
   Date14-Jan-2020

vishesh lekh_1  
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की पुण्यधरा इंदौर प्रत्येक मामले में अपनी अलग भूमिका, पहचान और राय रखती है... लेकिन उसका कहीं-न-कहीं संदेश यही रहता है कि उसके लिए राष्ट्रहित पहले पायदान पर है, क्योंकि यहां की माटी के कण-कण में मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव अनेकों बार जन ज्वार के रूप में सामने आ चुका है... अयोध्या आंदोलन के दौरान यहां से बड़ी संख्या में कारसेवकों का काफिला अयोध्या पहुंचा था... आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को तानाशाही की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए यहां पर असंख्य राष्ट्रनिष्ठों ने जेल में तीन से 19 माह तक निरुद्ध रहकर भयावह प्रताडऩा सहकर राष्ट्र आराधना की... रामसेतु को बचाने के लिए या फिर अमरनाथ श्राइन बोर्ड को लेकर भी इंदौर का राष्ट्रनिष्ठ और हिन्दुत्वनिष्ठ कार्य-व्यवहार देश के लिए मिसाल बन चुका है... अगर ऐसे में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर पूरे देश को एक अनोखा संदेश इंदौरवासियों ने रविवार को दिया है, तो यह बहुत मायने रखता है... यही कि किसी भी व्यक्ति, समाज, संस्था, संगठन और धर्म-मजहब के लिए सबसे सर्वोपरि या पहले पायदान पर राष्ट्रधर्म यानी राष्ट्र का भला हो, यही भाव हिलौरे लेना चाहिए... क्योंकि जब राष्ट्र के विषय में सोचकर हम अपने क्षणिक और तुच्छ स्वार्थ को तिरोहित करते हैं, तभी एक मजबूत राष्ट्र निर्माण की कड़ी जुड़ती चली जाती है... यही तो इंदौरवासियों ने रविवार को सीएए के समर्थन में उतरकर दिखाया...
15 दिनों की रणनीति के तहत इंदौर जिले में विशेष रूप से इंदौर शहर व आसपास के क्षेत्रों में 400 से अधिक बैठकें करके नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) से देश को क्या लाभ होगा और इससे भारत में निवासरत किसी भी धर्म-मजहब को रत्तीभर नुकसान नहीं है, इसका भी बकायदा विवरण रखा गया है.. इस पूरे सीएए समर्थन हेतु आयोजित कार्यक्रम को 'तिरंगा यात्रा/मौन यात्राÓ नाम दिया गया था... जिसमें 100 से अधिक संगठनों के लोग अपने कार्यकर्ताओं के साथ पूरे 15 दिन जुटे हुए हैं और रविवार को भी उन्होंने अपनी एकजुटता का अहसास कराया... इस तिरंगा यात्रा में 60 से अधिक धर्मगुरु-प्रबुद्धजन भी मंच पर विराजमान होकर सीएए के समर्थन में लोगों की राष्ट्रनिष्ठा को ऊर्जा देते रहे... तभी तो शहर के कोने-कोने से दोपहर से शाम तक जो वंदे मातरम्, जय श्रीराम, भारत माता की जय, जो हिन्दू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा जैसे नारों के साथ गूंजते वाहन और उनके साथ लहराते तिरंगे ध्वज, भगवा पताकाएं एवं भगवान श्रीराम व हनुमानजी के चित्रों वाली पताकाएं शहर के जन-जन के रोम-रोम को प्रफुल्लित कर रही थी... क्योंकि दशहरा मैदान और अन्नपूर्णा रोड पर लाखों का काफिला सीएए का समर्थन कर राष्ट्रधर्म का पाठ पूरे देश को पढ़ा रहा था... इस भाव के साथ कि प्रत्येक देशवासी के लिए राष्ट्र प्रथम है और राष्ट्र से जुड़े नीति-निर्णय को लेकर धर्म के आधार पर थोथी विवेचना स्वीकार नहीं होगी... संभवत: सीएए के समर्थन में इंदौर ने अपना नंबर वन का रिकार्ड कायम रखा, जो एक मंच पर एक साथ लाखों लोगों को घर से निकालकर ले आया...
दृष्टिकोण
गुलाम कश्मीर पर सेना प्रमुख का मत...
इसमें कोई दो राय नहीं है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और उससे जुड़े अन्य क्षेत्र (बलूचिस्तान-बाल्टिस्तान) भी भारत के ही नैसर्गिक क्षेत्र हैं... फिर चाहे गुलाम कश्मीर यानी पाकिस्तान द्वारा जबरिया कब्जाए गए 'पीओकेÓ की ही चर्चा क्यों न हो.., क्योंकि पीओके को लेकर भारतीय संसद अनेकों बार अपने वक्तव्यों में कह चुकी है कि वह भारत का अभिन्न हिस्सा है... इस संबंध में भारतीय संसद ने फरवरी 1994 में प्रस्ताव पारित किया था कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के उन क्षेत्रों को बिल्कुल खाली कर दे, जिस पर उसने आक्रमण/अतिक्रमण करके जबरिया कब्जा जमा लिया है... यानी उन्हें गुलाम बना लिया है... अत: गुलाम कश्मीर को पाकिस्तान से मुक्त कराकर पुन: भारत में विलय के लिए भारतीय संसद और सरकार कृत संकल्पित है... अगर इसी बात को थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे यह कहकर आगे बढ़ा रहे हैं कि संसद यानी सरकार कहे तो पीओके को भारत में मिलाने हेतु सैन्य कार्रवाई के लिए सेना हरदम तैयार है... इस वक्तव्य का सीधा-सा अर्थ पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में यह बता देना भी है कि वह पीओके, बलूचिस्तान, बाल्टिस्तान में मानवाधिकार का उल्लंघन करना बंद करे, जिस एकजुटता के साथ यहां के स्थानीय निवासी पाकिस्तान के खिलाफ आएदिन सड़कों पर उतर रहे हैं, नारेबाजी कर रहे हैं और पाकिस्तान से आजाद होने की हुंकार भर रहे हैं, उसी को मजबूती देने के लिए सेना प्रमुख ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है... गृहमंत्री शाह भी अनेकों बार संसद में पीओके वापस लेने की बात कह चुके हैं... अब यह चर्चा सेना के स्तर पर चल निकली है तो दूर तलक जाएगी...पाकिस्तान को पीओके के संबंध में अपना मानस तैयार कर लेना चाहिए...