रिपोर्ट : आतंक के लिए इस्तेमाल हुआ कश्मीर में इंटरनेट व सोशल मीडिया
   Date13-Jan-2020

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नई दिल्ली ठ्ठ 12 जनवरी (वा)
जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान, उसके प्रायोजित आंतकवादी और अलगाववादी संगठनों ने इंटरनेट और सोशल मीडिया का आतंकवाद को बढ़ावा देने, घाटी में भारत विरोधी भावनाएं भड़काने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फेक न्यूज अभियान चलाने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है।
यह खुलासा नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्टस इंडिया (एनयूजेआई) द्वारा यहां प्रगति मैदान में इन दिनों चल रहे विश्व पुस्तक मेले में जारी की गई एक रिपोर्ट 'कश्मीर का सचÓ में किया गया है। इस अध्ययन रिपोर्ट का माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रिकारिता जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी.के. कुठियाला, वरिष्ठ पत्रकार उमेश उपाध्याय, राज्यसभा टीवी के कार्यकारी संपादक राहुल महाजन, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने विमोचन किया। रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर को दो भागों में विभाजित करने एवं अनुच्छेद 370 की धारा दो एवं तीन को विलोपित करने और 35-ए को समाप्त करने के बाद करीब छह महीने के दौरान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में ऐतिहासिक बदलाव के पलों को, इस दौरान घटी घटनाओं, राजनीतिक और सामाजिक तानेबाने से संबंधित विभिन्न पहलुओं, कश्मीर में इंटरनेट पर पांबदी से लेकर सुरक्षा और आतंक के फलने-फूलने जैसे मुद्दों का विश्लेषण किया गया है।
केन्द्र शासित प्रदेश में अलगाववादियों एवं स्थानीय राजनीतिक दलों के तीखे विरोध एवं मीडिया की रिपोर्टों में एक खास प्रकार की तस्वीर उभारे जाने के बीच ज़मीनी हालात का जायजा लेने के लिए एनयूजेआई के नेतृत्व में विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकारों के तीन प्रतिधिनिधिमंडलों ने सितंबर 2019 में जम्मू, लद्दाख एवं कश्मीर घाटी का दौरा किया था। एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा और दिल्ली जर्नलिस्टस एसोसिएशन के महासचिव सचिन बुधौलिया ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत के भीतर और अंतरराष्ट्रीय फलक पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं होती रही हैं। चर्चा होना अच्छी बात है लेकिन चर्चाओं को एक खास रूख देने वाले लोग जो जम्मू कश्मीर और लद्दाख के भूगोल से भी परिचित नहीं हैं जब वे कोई चर्चा करते हैं तो उसे भांपने, परखने और सही तथ्यों को दुनिया के सामने रखने की जिम्मेदारी मुख्य धारा के मीडिया तंत्र की हो जाती है इसलिए नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्टस इंडिया के पत्रकार साथियों ने इस पुस्तिका के जरिए कश्मीर के सच को दुनिया के सामने रखने की पहल की है। मीडिया की, मीडिया के द्वारा, मीडिया के लिए यह पहल है ताकि संवाददाता बेहतर सवालों, तथ्यों के साथ न्याय कर सकें। फेक न्यूज के कुचक्र से बच सकें और मीडिया की साख कायम हो सके।