राष्ट्र निर्माण का मंत्र 'कुशल युवाशक्ति'...
   Date12-Jan-2020

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ब्रेक
के बाद
ञ्च शक्तिसिंह परमार
भा रत के शाश्वत विचारों, संस्कारों, संस्कृति, सभ्यता एवं मान्यताओं की पताका विश्व में फहराने वाले और वसुधैव कुटुम्बकम् के भाव को विश्वव्यापी बनाने वाले स्वामी विवेकानंद की आज जयंती है... जी हाँ, 12 जनवरी को स्वामीजी की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में भी मनाई जाती है... भारत में 1985 से स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की पहल हुई थी... क्योंकि स्वामीजी के विचार-कार्य और प्रेरणाएं आज भी समाज-राष्ट्र का मजबूत निर्माण करके विश्व में शांति का संदेश देने वाली प्रासंगिकता लिए हुए है... इस राष्ट्रीय युवा दिवस के बहाने विवेकानंदजी का दर्शन, उनका जीवन भारतीय युवाओं के लिए किस तरह से प्रेरणा का उच्चतम केन्द्र बिन्दु है..? यह समझाने के लिए इस दिन देशभर में अब तो विश्व में भी विवेकानंदजी को स्कूल से लेकर महाविद्यालय तक में पढ़ाया और सुनाया जाता है... विवेकानंदजी के विचारों और प्रेरणाओं को केन्द्र में रखकर रैलियां, व्याख्यान, विविधतापूर्ण स्पर्धाएं और साहित्य प्रदर्शनी का भी क्रम चलता है... सही मायने में अगर आज भारत राष्ट्र के एक बड़े युवा वर्ग जो कि भटकाव, भ्रम और दिशाभ्रमित स्थिति से जूझ रहा है, उसे विवेकानंदजी के विचारों, प्रेरणाओं के आलोक में दिशा निर्देशित करने में समाज, राष्ट्र सफल हो जाए तो देश की करीब 90 फीसदी समस्याओं का समाधान स्वत: हो जाएगा...
आज किसी भी बड़ी समस्या के कारण और निवारण के पीछे युवा आबादी ही केन्द्र बिन्दु में रहती है... आज छोटे से बड़ा चुनाव राजनीतिक दल युवाओं को केन्द्र में रखकर लड़ते हैं, उनके लिए लोक-लुभावन घोषणाओं से लेकर कौशल विकास की वचनबद्धता दोहराते हैं... आज बेरोजगारी का प्रभाव युवाओं पर है... वाहनों की बढ़ती दुर्घटना से प्रभावित होने वाले सर्वाधिक युवा हैं... आबादी से लेकर राष्ट्र की अन्य समस्याएं चाहे फिर वह सीमा सुरक्षा या फिर पारदर्शिता का विषय हो अथवा राष्ट्रीय दायित्वों के निर्वहन का मसला हो... हर मामले में सिर्फ युवाओं की तरफ निगाहें टिक जाती हैं... बस इसी भरोसे कि अगर चुनाव में युवा शत-प्रतिशत मतदान करेंगे..? राष्ट्रीय विषयों पर खुलकर बेबाक तरीके से अपनी राय रखेंगे और उस पर अडिग रहेंगे... देश में सबके लिए समान अधिकार और समान कर्तव्य की पहल युवा करेंगे... ऊंच-नीच, जात-पात के बंधनों से मुक्ति की पहल युवा करेंगे... और देश में ईमानदार शासन व्यवस्था के लिए अगर युवा समर्थन हुंकार भरेंगे..? तो सच मानिए कि देश की सभी समस्याओं के समाधान का केन्द्र युवा होंगे और यह कुशल युवाशक्ति ही संभव कर सकती है...
जब नए भारत के निर्माण का सिलसिला अभियान के रूप में सामने आ रहा है, उस स्थिति में भारत एक विकासशील देश से विकसित देशों की श्रेणी में खड़े होने को तेजी से फर्लांग भी लगा रहा है... किसी भी समाज-राष्ट्र के लिए आबादी बोझ नहीं हो सकती, क्योंकि वह आबादी तो उसके लिए एक ऐसा अवसर है, जो उसके लक्ष्यों को संधान करने का निमित्त बन जाती है... स्वामी विवेकानंद ने युवाओं का आव्हान करते हुए कठोपनिषद का मंत्र उच्चारित किया था-
'उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।Ó
अर्थात् : उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक कि अपने लक्ष्य तक न पहुंच जाओ...Ó आज भारत की आबादी 130 करोड़ के करीब बताई जा रही है... 2020-21 की जनगणना के बाद यह आंकड़ा और ऊपर जाएगा... लेकिन फिलहाल सवा अरब की आबादी में 65 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है... यह दावा कोई भारतीय एजेंसी नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट करती है... जिसमें कहा गया है कि भारत सबसे 'युवा आबादीÓ वाला देश है... यहां करीब 60 करोड़ लोग 25-35 आयु वर्ग के हैं... यह स्थिति आने वाले वर्ष 2045 तक बनी रहेगी... यानी विश्व की लगभग आधी जनसंख्या भारत में 25 वर्ष से कम आयु की है... जब अमेरिका, चीन, जापान जैसे विकसित देश बुढ़ापे का सामना तेजी से कर रहे हैं, वहां पर भारत युवा आबादी की ताकत के साथ खड़ा हुआ है... यह भारत के लिए युवाओं के रूप में किसी स्वर्णिम अवसर से कम नहीं है... क्योंकि अन्य आंकड़े भी यही दावा करते हैं कि भारत की जनसंख्या का 62 फीसदी हिस्सा 15 से 59 वर्ष की आयु वर्ग के बीच का है... यहां तक कि 25 वर्ष से कम आयु वाले लोगों की जनसंख्या का आंकड़ा भारत में 54 फीसदी आंका गया है... जो कि विश्व का सर्वाधिक है... अब विचार किया जा सकता है कि क्या यह आबादी प्रत्येक क्षेत्र में स्वयं को दक्ष बनाकर देश का नवश्रृंगार करने की क्षमता नहीं रखती है..? क्योंकि आज हर क्षेत्र में भारतीय युवा अपनी प्रतिभा का लौहा मनवा रहे हैं.., लेकिन एक बड़ा युवा वर्ग है, जो चुनौती भी है...
सबसे बड़ी समस्या आज भारत के युवाओं के सामने यही है कि उनका उचित और आवश्यक मार्गदर्शन/दिशा निर्देशन समय के साथ नहीं हो पाता.., इसलिए भारत में डिग्रीधारी युवाओं की फौज तो खड़ी हो रही है, लेकिन कर्मण्यता व योग्यता के मान से उनका प्रदर्शन कसौटी पर खरा नहीं उतरता... क्योंकि हमारी शिक्षा पद्धति ही युवाओं को सिर्फ या तो मशीन बनाती है या फिर बेकार... और ये दोनों ही स्थितियां युवाओं के लिए घातक हैं... जो मशीन बना हुआ है, वह समाज-राष्ट्र के लिए रत्तीभर नहीं सोचता... वह उत्पादन और अपनी इनकम बढ़ाने के लिए समाज-राष्ट्र, परिवार को भुला देता है... जो बेकार है, वह और ज्यादा स्थितियां बिगाडऩे का निमित्त बनता है... चाहे फिर देशभर के आहतों, कलालियों में ग्लास के साथ जाम छलकाते 25 से कम आयु की पौध को देख लो... यह दोनों ही विषय चिंतन का कारण हैं... देश में बेरोजगारी की संख्या अनेक समस्याओं का कारण है... युवाओं में दिशा भ्रम इससे और तेजी से फैल रहा है... आज देश में बेरोजगारी संख्या 11.3 करोड़ से अधिक है... 15 से 60 वर्ष आयु के 74.8 करोड़ लोग बेरोजगार हैं... यानी काम करने वाले लोगों की संख्या महज 15 प्रतिशत है... अगर जनगणना के मान से देखें तो 2001 में जहां भारत में 23 फीसदी लोग बेरोजगार थे, वही संख्या 2011 की जनगणना में बढ़कर 28 फीसदी हो गई... 2020-21 की जनगणना में यह युवा आबादी की बेरोजगार फौज कहां पहुंचेगी..? अनुमान लगाना आसान है... जब युवा बेरोजगार होंगे तो वह तमाम तरह के अपराधों, व्यसनों, बुराइयों और अपराधों में न चाहकर भी संलिप्त होते चले जाएंगे... आज जितने भी अपराध या घटनाक्रम होते हैं, उसमें 70 फीसदी युवा होते हैं... क्योंकि उनके ऊपर नकारात्मकता का भाव बहुत ज्यादा हावी है... यह भी देखने में आया है कि उच्च शिक्षित तकनीकी दक्ष, कम्प्यूटर व अन्य क्षेत्र में महारत हासिल करने वाले बेरोजगार युवा भी बड़े-बड़े अपराध और सायबर क्राइम में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आ रहे हैं... क्योंकि वे शार्टकट से थोड़े समय में लखपति नहीं, करोड़पति-अरबपति बनने में अपराधों को अंजाम देते हैं... बेरोजगारी के खिलाफ सरकार को अभियान लेना होगा... केन्द्र सरकार ने कौशल उन्नयन के जरिए एक बड़ी आबादी को रोजगार के लिए दक्ष बनाया है। 2022 तक 40 करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य लिया गया है... 12,000 करोड़ खर्च करके मोदी सरकार 10 लाख युवाओं को रोजगार का लाभ दिलाने को संकल्पित है... अगर ऐसा हुआ तो देश की कुशल युवाशक्ति नए भारत के निर्माण का आधार बनेगी...