साहसिक निर्णयों के 100 दिन
   Date09-Sep-2019

नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के सौ दिन न केवल तेजी से उपलब्धियां प्राप्त करने के रहे, लेकिन साहसिक निर्णय लेने के लिए भी जाने जाएंगे। जिस तरह सरदार पटेल ने सभी रियासतों को मिलाकर भारत के एक स्वरूप का सीमांकन किया, हैदराबाद, जूनागढ़, केनवालो ने आनाकानी की, तो बलपूर्वक उन्हें ठंडा कर दिया। नेहरूजी के पास कश्मीर का मामला रहने से उसे राष्ट्रसंघ में उलझाना और शेख अब्दुल्ला की दोस्ती के कारण जम्मू-कश्मीर के लिए अस्थाई प्रावधान अनुच्छेद 370 का प्रावधान रखा गया। इसके बाद इसमें 35(ए) जोड़ा गया। इससे जम्मू-कश्मीर की भारत से अलग पहचान बनी। अलगाववाद, परिवारवाद और आतंकवाद 360 के अस्थाई प्रावधान के कारण पनपा। गत 70 वर्षों में इस अस्थाई प्रावधानों को हटाने की बजाय कश्मीर समस्या नासूर बन गई। इस नासूर का ऑपरेशन मोदी सरकार ने किया। संसद के दोनों सदनों के दो तिहाई सदस्यों के समर्थन से 370 एवं 35(ए) के प्रावधानों को खत्म करने का विधेयक पारित कर दिया। गुलाम नबी आजाद के शब्दों में यह बम का विस्फोट था यह सच्चाई है कि कांग्रेस के लिए यह बम के विस्फोट जैसा इसलिए रहा कि कांग्रेस ने समझौतावादी और तुष्टीकरण की राजनीति को इस धमाके ने समाप्त कर दिया। गुलाम नबी, राहुल आदि नेता जो यह उम्मीद कर रहे थे कि 370 के खात्मे से कश्मीर में विद्रोह होगा, हिंसा का तांडव होगा, लेकिन इस साहसिक निर्णय के बाद भी न उपद्रव हुआ और न आग लगी। ईद, जुम्मे की नमाज में भी शांति रही। चाहे सेना एवं सुरक्षाबलों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया हो, चाहे उन लोगों को जेल में डाला हो, जो कश्मीर में आग लग जाएगी कि चेतावनी देते थे, जिनके मंसूबे कश्मीर के उपद्रव करने के थे, ऐसे कुछ लोगों को जेल में जमा कर दिया हो, लेकिन 370 के बाद एक माह में भी कश्मीर में एक भी धमाका नहीं हुआ और न गोली चली। सरदार पटेल ने रियासतों को भारत में विलय कराया था, उसी तरह मोदी सरकार ने 370 के नासूर के सफल ऑपरेशन ने भारत को एकरूपता प्रदान की। अब तो कश्मीरघाटी में भी वंदे मातरम, भारत माता की जय के जयकारे की गूंज सुनाई दे रही है। इसी तरह तीन तलाक, मुस्लिम महिलाओं को शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा का मुख्य कारण रहा है। राज्यसभा में एनडीए का बहुमत नहीं होने से दो बार तीन तलाक के विधेयक को पारित नहीं होने दिया। इसलिए मोदी सरकार को इस बारे में अध्यादेश लाना पड़ा। दूसरे कार्यकाल के संसद के प्रथम सत्र में यह विधेयक दोनों सदनों में पारित करा कर मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की पीड़ा से मुक्त किया। एनआईए एजेंसी को आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष अधिकार देने का विधेयक भी पारित हो गया। इस प्रकार मोदी सरकार ने साहसिक निर्णय लेकर अपने संकल्प को पूरा किया। इसी तरह असम में विदेशियों की पहचान के लिए एनआरसी लागू की।
दृष्टिकोण
चंद्रयान-2 सफलता के निकट
उसी नेतृत्व को सफल माना जाता है, जो कठिन चुनौती और संकट के समय विचलित नहीं हो और अपने सहयोगियों को भी कभी हताशा नहीं होने दे, जो असफलताओं के समय भी उमंग-उत्साह से लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लोगों को प्रेरित कर सके। ऐसे नेतृत्व का नाम है, नरेन्द्र मोदी। चांद की सतह पर लंैडर विक्रम की चाहे साफ्ट लैंडिंग नहीं हो पाई हो, लेकिन चंद्रयान-2 से इसरो की उम्मीदें कर्इं गुना बढ़ गई है। भारतीय अनुसंधान संगठन (इसरो) का कहना है कि लैंडिंग के पहले तक यान की प्रतिक्रियाएं इतनी सटिक रही कि आर्बिटर की उम्र सात गुना तक बढ़ गई। अब आर्बिटर पहले से निर्धारित एक साल की बजाय सात वर्ष तक अध्ययन करता रहेगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा है कि अभियान से जुड़े 90 से 95 प्रतिशत के लक्ष्य हासिल हो चुके हैं। सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने भी यही बात दोहराई है। 6 सितंबर का दिन पूरे देश में चंद्रयान-2 की सफलता के लिए उत्साहित था। देर रात तक देश जागकर चंद्रयान-2 के चांद को चूमने के दृश्य को देखता रहा। इसके साफ्ट लैडिंग की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई थी। चांद से 2-1 किलोमीटर की दूरी पर संपर्क टूट गया। इससे उत्साह के वातावरण में मायूसी छा गई। इसरो प्रमुख के सिवन की आंखों से आंसू टपक पड़े। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जो चंद्रयान-2 की लैंडिंग का नजारा देख रहे थे, अचानक यान से संपर्क टूटने पर उन्होंने वैज्ञानिकों के बीच आकर इसरो प्रमुख सिवन को गले लगाकर उनकी पीठ थपथपाते हुए ढांढस बंधाया।