विकास की यात्रा में डग भरने को आतुर जम्मू-कश्मीर
   Date07-Sep-2019

मुरारी शरण शुक्ल
उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि धारा 370 ही भारत और जम्मूृ-कश्मीर के बीच का एकमात्र लिंक है। धारा 370 हटते ही जम्मू-कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा। किंतु अब धारा 370 हटने के बाद भी जम्मू-कश्मीर भारत में बना हुआ है। महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि धारा 370 हटा तो कश्मीर घाटी में तिरंगे को कोई कंधा देने वाला नहीं मिलेगा। परंतु धारा 370 हटते ही 15 अगस्त को कश्मीर में रिकार्डतोड़ स्थानों पर तिरंगा फहराया गया। जम्मू-कश्मीर के सौदागर राजनीतिक खानदानों को उम्मीद थी कि जब धारा 370 हटेगा तो राज्य में व्यापक हिंसा होगी। किंतु उनकी यह हसरत पूूरी नहीं हुई। अब ये तीनों खानदान और इनका आका पाकिस्तान इस बात से परेशान है कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा हो क्यों नहीं रही? ये परेशान हैं कि न कश्मीर के अंदर से कोई गड़बड़ी की संभावना दिख रही है न ही सीमा पार से कोई गड़बड़ी होती दिखाई दे रही है। जिस गड़बड़ी को बेचकर ये विगत 72 वर्षों से अपनी राजनीति चला रहे थे उनकी वह दुकान अब बंद हो चुकी है। अपनी डूबती राजनीतिक नैया को बचाने के लिए ये प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चल रहे खानदानी राजनीतिक दलों के सौदागर नेता अब फडफ़ड़ा रहे हैं किंतु परवाज को पंख अब नदारद है। धारा 370 का सहारा अब समाप्त हो चुका है। पाकिस्तान अपनी सेना की संख्या पाक अधिकृत कश्मीर में बढ़ा रहा है और उसके मंत्री बयान दे रहे हैं कि भारत पीओके पर आक्रमण का साहस न करे। अर्थात उनको अब समझ में आ गया है कि भारत धारा 370 हटाने के बाद पीओके को हासिल करने का प्रयास निश्चित रूप से करेगा। यदि पीओके भी पाकिस्तान के हाथ से चला गया तो वह विश्व में उसे चंदा देने वाले देशों को दिखाएगा क्या? जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पाक अधिकृत कश्मीर दुनिया को दिखा-दिखाकर अभी तक पाकिस्तान चंदा बटोरता रहा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का मूल राजस्व यह चंदा ही है। इसी चंदे पर उसके सारे खर्च निर्भर करते हैं। इसी कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान के राजनीतिक दलों की राजनीति भी जीवित रहती है। पाकिस्तान जैसा आतंक का निर्यातक देश, एक विफल अर्थव्यवस्था वाला देश, खैरात के धन से पलने वाला देश, दुनियाभर में कश्मीर का मुद्दा बेचकर कटोरी में भीख जुटाने वाला देश, केवल कश्मीर ही जिसके अस्तित्व का एकमात्र कारण था, जम्मू-कश्मीर का धारा 370 ही जिस देश की जीविका का एकमात्र कारण था वह भिखारी देश अब संकट में आ गया है। धारा 370 हटने के बाद अब उसका क्या होगा? उसकी कटोरी में अब सिक्के कहां से आएंगे? भाजपा नारा लगाती है कि जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है। जो कश्मीर हमारा है वह सारा का सारा है। अर्थात भाजपा का नारा केवल भारत के कब्जे वाले कश्मीर की बात नहीं करता। पाक अधिकृत कश्मीर पर भी यह नारा अधिकार जताता है। पाक अधिकृत कश्मीर से हिन्दू भगाए गए 1947 के आसपास और भारतीय कश्मीर से हिन्दू भगाए गए 1989 के आसपास। दोनों के पीछे पाकिस्तान था। पाकिस्तान के मंसूबों को पूरा करने वाले आतंकी और राजनीतिक दल सभी पाक समर्थित थे। आतंकी भी पाकिस्तान की भाषा बोलते थे और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के लोग भी पाकिस्तान की भाषा बोलते थे। उन राजनीतिक दलों के नेता खानदानी कुनबे बनाकर लगातार पाक परस्ती करते रहे, कश्मीर में आग लगाते रहे, वहां की निरीह जनता का कत्लेआम करते रहे और देश की सत्ता में बैठे लोग तमाशबीन बनकर तमाशा देखते रहे। 1989 और उसके बाद के वर्षों में तो इन्हीं लोगों ने वहां मौत, बलात्कार, लूट, आगजनी, का तांडव मचा दिया था। मस्जिदों से लाउडस्पीकर से घोषणा की जाती थी कि हिन्दुओं कश्मीर छोड़ कर चले जाओ अन्यथा मरने के लिए तैयार हो जाओ। जम्मू-कश्मीर में लगातार हिंसा हुई, अनगिनत लोग मारे गए, असंख्य बलात्कार हुए, हिन्दुओं के घर जलाए गए, उनकी संपत्ति लूटी गई, लाखों लोगों का पलायन हुआ। किन्तु यह सब करने वाले एक भी अपराधी को आज तक सजा नहीं हुई। आखिर इसके पीछे कारण क्या था? अपराधियों को अपराध करने का सुरक्षित माहौल देने वाला, अपराध करने के बाद भी उन्हें सुरक्षित बचा लेने वाला, देशद्रोह करने पर भी उनको सुरक्षा देने वाला, तिरंगा समेत राष्ट्रीय प्रतिमानों का अपमान करने पर भी उनको बचा लेने वाला एक ही ढाल था जम्मू-कश्मीर में धारा 370 और 35-ए का अस्तित्व। यह वो प्रावधान थे जो राज्य में मुस्लिम मेजोरिटी को अत्यधिक अधिकार और इम्युनिटी देते थे। कहने को तो कश्मीर के स्थाई नागरिकों के अधिकारों की चर्चा की गई थी कानून में किंतु यथार्थ में विधानसभा का परिसीमन कश्मीर घाटी को वरियता देते हुए किया गया था, घाटी की विरल आबादी को ही दो तिहाई सीटें दे दी गई थी और जम्मू व लद्दाख को राजनीतिक हासिये पर डाल दिया गया था। जिससे सारा राजनीतिक पॉवर सुन्नी मुसलमानों के हाथों में केंद्रित हो चुका था। ऐसे में जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन सत्ता इस्लामिक स्टेट की परिकल्पना से संचालित होती थी। सारा आतंक, सारी मनमानी का मौलिक कारण 370 की आड़ में भारत के संविधान के विरूद्ध मिला उनको असीमित ताकत था जिसके बल पर वो भारत की संप्रभुता को लगातार चुनौती देते रहे। स्वतंत्रता के पहले जम्मू-कश्मीर में चार क्षेत्र थे- जम्मू, कश्मीर, लद्दाख और गिलगिट। चारों क्षेत्रों को मिलाकर 2,22,236 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल था। स्वतंत्र भारत में जम्मू-कश्मीर में तीन क्षेत्र ही बच गए-जम्मू, कश्मीर और लद्दाख। जिनका क्षेत्रफल है 1,01,387 वर्ग किलोमीटर। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मीरपुर, मुजफ्फराबाद, गिलगिट और बाल्टिस्तान है तथा चीन के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में सक्षगाम और अक्साई चीन है। पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाले कुल क्षेत्र का क्षेत्रफल 1,20,849 वर्ग किलोमीटर है। वर्तमान जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ा क्षेत्र लद्दाख है जिसका क्षेत्रफल 59 हजार वर्ग किलोमीटर है। दूसरा बड़ा क्षेत्र है जम्मू जिसका क्षेत्रफल 27 हजार वर्ग किलोमीटर है और सबसे छोटा क्षेत्र है कश्मीर जिसका क्षेत्रफल मात्र 15 हजार वर्ग किलोमीटर है। सबसे छोटे क्षेत्र कश्मीर घाटी के मुसलमानों को सत्ता सौंपने वाला धारा 370 ही मुख्य फसाद की जड़ था जिसके कारण जम्मू और लद्दाख के साथ लगातार सौतेला व्यवहार हुआ तथा घाटी को इस्लामिक स्टेट बनाने की नीयत से हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ, उनकी आबरू और संपत्ति की खुलेआम लूट हुई। सबका गुनाहगार धारा 370 और 35-ए ही था। गिलगिट बाल्टिस्तान में कई सुंदर घाटियां है। यहां हुंजा घाटी है। यह कश्मीर का सबसे सुंदर क्षेत्र है जो सदा टूरिस्टों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है। हुंजा समुदाय के लोग औसत 120 वर्ष की आयु तक जीवित रहते हैं। गोरीकोट घाटी एस्टोर जिले की सबसे बड़ी घाटी है। रूपल घाटी ट्रैकिंग के लिए बहुत प्रसिद्ध है। नागर घाटी लगभग 8 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। नालतार घाटी समुद्र तल से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हिसपर घाटी भी ट्रैकिंग के लिए बहुत प्रसिद्ध है। इश्कोमान घाटी अफगानिस्तान सीमा से सटा हुआ है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 6 से 12 हजार फीट है। चपुरसन घाटी अफगानिस्तान चीन सीमा पर स्थित है। कटपना घाटी स्कार्डु के निकट स्थित है। इसे ठंडा मरूस्थल भी कहा जाता है। स्कार्दू घाटी में कई सुंदर झील और पहाड़ है जिससे यह अत्यंत सुंदर टूरिस्ट क्षेत्र है।
उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट होता है कि यदि यह क्षेत्र भारत के पास हो तो भारत जमीनी मार्ग से सीधा-सीदा अफगानिस्तान, मंगोलिया, रसिया, चाईना, यूरोप से जुड़ जाएगा।