आभासी दुनिया के बीच डगमगाता बचपन
   Date07-Sep-2019

धर्मधारा
21वीं सदी नया विकास, नई चुनौतियां और नई आशाओं को पूरा करने की क्षमताओं को लेकर हमारे सामने उपस्थित हुआ जो कुछ स्वप्नातीत था वो हमारे सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। मोबाईल क्रांति ने हर एक को एक नए विश्व का भागीदार बनाया। जो सच था भी और नहीं भी। किंतु ये नई उपलब्धि अपने साथ कुछ दुष्परिणाम लेकर आई और इसका किसी को पता भी न चला कि कब जाकर एक नए विषाद का ये कारण बन गई। जो आज भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में दु:ख का कारण साबित हुई। इसकी गहनता का आभास तब हुआ जब बच्चे या युवा इसका शिकार होने लगे। व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर नाम के शिकंजे बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को पकड़ चुके थे। किंतु सबसे भयावह बात बच्चों की है जो साईबर खेलों से प्रभावित होकर आत्महत्या तक पहुंच गए। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि आठ साल की उम्र तक बौद्धिक और सोलह साल की उम्र तक पूर्ण शारीरिक विकास होता है। यही ये दो मुख्य पड़ाव होते हैं जहां पूर्ण व्यक्तित्व की नींव रखी जाती है। अगर इन दोनों में से एक भी पड़ाव गड़बड़ा गया तो समझो आगे की इमारत डगमगा जाना तय है। पहले ही एकल कुटुंब व्यवस्था में घर में लोगों की संख्या सीमित हो जाती है। वहां बच्चों की निगरानी में होती है। दादा, दादी, चाचा, चाची और घर में अनेकों बच्चे एक-दूसरे के साथ बढ़ते थे और यहीं उनका सामान्य विकास यूं ही हो जाता था। लेकिन फ्लैट कल्चर में बच्चे एक छोटे-सी दुनिया में कैद हो जाते हैं। वहां मनोरंजन का कोई भी अन्य साधन नहीं होता। वहीं अगर बच्चा रोता है तब उसे न परियों की कहानी रूझाती है और न ही पंचतंत्र की कोई सीख समझ में आती है, क्योंकि मां-बाप के पास उनके लिए समय कहां होता है। तब उस रोते हुए बच्चों के हाथ में मोबाईल थमा दिया जाता है और बच्चे वहीं से इन आभासी चीजों के अधीन हो जाते हैं। आंखों पर अल्प आयु में चश्मा लेकर बच्चे वहीं से बुढ़ापे का शिकार बन जाते हैं। कई जगह पर घर के आसपास झुग्गियां होती हैं। जहां कम स्तर वाले बच्चे रहते हैं। कई बार कक्षा में भी कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो पालकों को पसंद नहीं आते। फिर उनके साथ मत खेलो, इनको दोस्त मत बनाओ जैसी मर्यादाओं ने बच्चों को साहचर्य कौशल्य से परे बना दिया और फिर विकल्प यही होता गया कि मोबाईल में गेम खेलों। कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं। डिप्रेशन ये शब्द अब इतना सामान्य हो चुका है कि छोटा बच्चा भी इसका इस्तेमाल करता है।