शेयर बाजार की गिरावट अब रुकने के आसार
   Date07-Sep-2019

 
इंदौर (व्यापार प्रतिनिधि)।
चालू सप्ताह में शेयर बाजार में जहां जीडीपी की दरों से मंगलवार को सूचकांक 770 अंक की बड़ी भारी गिरावट में रहा तो वही सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस शुक्रवार को सरकार की राहतों, अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध नरम पडऩे की उम्मीदों से 337 अंक उछल गया। परंतु इस बीच निवेशकों को भारी घाटा भी उठाना पड़ा। हालांकि सरकार के नीतिगत कदमों से नहीं सुधरा बाजार, ब्रोकरेज सतर्क है। मुुंबई स्टाक एक्सचेंज में 200 के ज्यादातर शेयरों की लक्षित कीमत घटाई है। हालांकि चार महीने में सबसे ज्यादा सरकारी उपक्रमों के शेयरों में तेजी रही। अभी भी पांच फीसदी जीडीपी पर देशी उद्योग जगत में हायतौबा मची हुई है। हालांकि वाहन उद्योग को सरकार से मिले आश्वासनों से इनके शेयर सुधरे है। अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक बातचीत शुरू होने के आसार है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार से भी इस समय सकारात्मक संकेत मिल रहे है। वाहन उद्योगों को भी आश्वासन मिल रहे है। इसके चलते सप्ताह के अंत में शुक्रवार को मुंबई स्टाक एक्सचेंज में तेजी रही तथा सूचकांक 337.30 अंक उछलकर 36981.80 अंक व निफ्टी 98.30 अंक बढ़कर 10946.20 अंक पर बंद हुआ।
जून तिमाही के दौरान जीडीपी वृद्धि में भारी गिरावट ने भारतीय उद्योग जगत को काफी निराश किया है। लेकिन यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। उपभोक्ता पैकेट बंद वस्तु, वाहन, पूंजीगत वस्तु और इस्पात जैसे क्षेत्रों की कंपनियां पिछली तीन तिमाहियों से खपत में अप्रत्याशित रूप से कमी देख रही थी। विभिन्न कंपनियों के ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान जीडीपी वृद्धि में तिमाही दर तिमाही लगातार गिरावट को लेकर वे कहीं अधिक चिंतित है। जीडीपी वृद्धि जून 2018 तिमाही में 8 फीसदी थी जो घटकर जून 2019 तिमाही में 5 फीसदी रह गई है। उन्होंने कहा कि लघु अवधि और दीर्घावधि उपायों से वृद्धि को रफ्तार मिल सकती है और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना फिलहाल समय की जरूरत है। बजट के बाद से आमसहमति का मामला नाटकीय रूप से निराशावादी हो गया है। ब्रोकरेज ने कहा कि शेयर कीमतों में तेज गिरावट से पैदा हुई नकारात्मक प्रक्रिया फंडामेंटल राय पर असर डाल रही है जो पिछले एक महीने से नहीं बदली है। विशेषज्ञों ने कहा कि लक्षित कीमतों में और कमी हो सकती है। क्योंकि बाजार का मौजूदा स्तर फंडामेंटल के लिहाज से बाजार की वास्तविक ताकत नहीं बता रही और दूसरी तिमाही भी विशेष रूप से शानदार नजर नहीं आ रही है। सेंसेक्स 18.72 गुने पर कारोबार कर रहा है। जो वित्त वर्ष 2020 के आय अनुमान पर आधारितज है, जो लंबी अवधि के औसत से काफी ऊपर है। विश्लेषकों की तरफ से शेयरों की लक्षित कीमतों में कटौती पहली तिमाही के नतीजे के आधार पर हुई है जो ज्यादातजर मामले में उम्मीद से कमजोर रही है, साथ ही अर्थव्यवस्था में मंदी की ताजा आंकड़ों का भी इसमें योगदान रहा है। जसानी ने कहा कि हाल के समय में विश्लेषकों के लिए उन कारणों का अनुमान लगाना मुश्किल होता जा रहा है, जो शेयर कीमतों पर असर डाल सकते हों, क्योंकि नियमन व भूराजनैतिक घटनाक्रम इतनी तेज रफ्तार से हो रहे हैं, जैसा विगत में नहीं देखा गया था। हालांकि एफपीआई पर कर वृद्धि को वापस लिए जाने से निफ्टी 100 की उन कई कंपनियों के शोयरों में तेजी आई है, जिनमें एफपीआई का निवेश पारंपरिक तौर पर ऊंचा रहा है। हाउसिंग डेवपलमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन (एचडीएफसी) में पिछले सप्ताह 6 फीसदी की तेजी आई। 30 जून तक इस शेयर में विदेशी निवेस 75 प्रतिशत था। ज्यादा एफपीआई भागीदारी वाले बैंकों एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड बैंक के शेयरों में 3-6 प्रतिशत की तेजी आई। बाजार के तेज ध्रुवीकरण और संस्थागत निवेशकों द्वारा कुछ खास कंपनियों पर ध्यान दिए जाने से ये शेयरों की एफपीआई प्रवाह में किसी तरह की तेजी का लगातार लाभ मिल सकता है। हालिया नीतिगत कदम मसलन वाहन क्षेत्र को उबारने के लिए उठाए गए कदम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलंब की सरकारी योजना, बजट में प्रस्तावित विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों पर अधिभार की वापसी, सुस्त अर्थव्यवस्था व घटती उपभोग के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से सरकारी खजाने में करीब 1.76 लाख करोड़ रु. का हस्तांतरण बाजार के माहौल को सुधारने में नाकाम रहे है। लेकिन बाजाट सुधरे नजर आ रहे है। ज्यादातर ब्रोकरेज भी सतर्कता के साथ स्थिति की समीक्षा कर रहे है और अर्थव्यवस्था व बाजार को लेकर अपने आउटलुक में बदलाव करने की हड़बड़ी में नजर नहीं आ रहे हैं। बाजार के लिए उनका नजरिया कंपनियों की आय के परिदृश्य के हिसाब से है, जिसके बारे में उनका माननाहै कि नीतिगत कदम उठाए जाने के बावजूद इनमें सुधार में लंबा वक्त लगेगा।