निर्मोही अखाड़े ने क्या सेवा का अधिकार कायम किया था ?
   Date06-Sep-2019

नई दिल्ली द्य 5 सितम्बर (वा)
उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी ढांचा जमीन विवाद की सुनवाई के दौरान गुरुवार को एक मुस्लिम पक्षकार से पूछा कि क्या उनकी आपत्तियों के बावजूद निर्मोही अखाड़े ने रामलला की सेवा और मंदिर प्रबंधन का अधिकार कायम कर रखा था।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने मुस्लिम पक्ष के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन से पूछा कि क्या निर्मोही अखाड़े ने उनकी आपत्तियों के बावजूद रामलला की सेवा का अधिकार कायम कर रखा था। इस पर डॉ. धवन ने कहा- मुझे इसके बारे में पता लगाना होगा। मैं इसके बारे में न्यायालय को सूचना दूंगा, कृपया मुझे इसके लिए कुछ दिन का समय दें। उच्चतम न्यायालय अपने समक्ष इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के उस फैसले के खिलाफ दायर कई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है, जिसके तहत अयोध्या की विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया गया था।
ठ्ठ डॉ. धवन ने मामले की सुनवाई के 20वें दिन न्यायालय के समक्ष दलील दी कि भगवान राम की प्रतिमा को आंगन में रखा गया था। उन्होंने कहा कि बाहरी आंगन पर निर्मोही अखाड़े का विशेष कब्जा था।
ठ्ठ उन्होंने कहा कि मुसलमानों की आस्था के कारण यह मसला न्यायालय में पहुंचा है। यह मामला बहुत संवेदनशील है और हमें पता है कि यह अदालत जो भी फैसला सुनाएगी, वह सभी संबंधित पक्षों के लिए अच्छा होगा।
ठ्ठ पांच सदस्यीय संविधान पीठ में न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण तथा न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर भी सदस्य हैं। गौरतलब है कि इस विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने की सभी कोशिशें विफल रहने के बाद उच्चतम न्यायालय में गत छह अगस्त से रोजमर्रा के आधार पर इस मामले की सुनवाई की जा रही है।