स्कूली शिक्षा में आदर्श नागरिक की बुनियाद - राष्ट्रपति कोविंद
   Date06-Sep-2019

नई दिल्ली द्य 5 सितम्बर (वा)
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि ज्ञान तथा कौशल बाद में भी हासिल किया जा सकता है, लेकिन आदर्श नागरिक बनने के लिए चरित्र निर्माण की जो मजबूत नींव विद्यालयों में रखी जाती है, देश के लिए एक शिक्षक का यह महत्वपूर्ण योगदान है। श्री कोविंद ने शिक्षक दिवस पर गुरुवार को यहां राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चरित्र निर्माण की आधारशिला स्कूलों में रखी जाती है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थी को अच्छा नागरिक बनाना है और एक शिक्षक ही यह कार्य विद्यार्थियों में ईमानदारी और अनुशासन का महत्व बताकर बखूबी कर सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूलों में यदि ईमानदार, अनुशासित तथा सत्यनिष्ठ चरित्र की नींव वाली शिक्षा बच्चे को मिलती है तो वह बच्चा बड़ा होकर समाज का चरित्रवान आदर्श नागरिक बनता है।
जीवन मूल्यों से सम्पन्न अच्छा इंसान समाज के हर क्षेत्र में अच्छा साबित होता है। वह डॉक्टर, अध्यापक, वकील, व्यापारी, कारोबारी या किसी भी क्षेत्र में जाता है तो वह अच्छा ही नागरिक साबित होता है। यही नहीं, वह घर-परिवार में भी एक अच्छा पुत्र, पुत्री, भाई-बहिन या पति-पत्नी साबित होता है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति राधाकृष्णन का मानना था कि एक शिक्षक हमेशा एक विद्यार्थी की तरह सीखता रहता है और वह जीवनभर विद्यार्थी ही बना रहता है। शिक्षक किताबों से नहीं, विद्यार्थियों से भी सीखता है। उन्होंने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक, चिंतक, राजनेता और शिक्षाविद् थे तथा विद्यार्थियों में उनके लिए प्रेम और आदर की गहरी भावना थी। इस महान शिक्षक के प्रति छात्रों का जो भाव रहा है, शिक्षकों के लिए आदर का यही भाव भारतीय शिक्षा पद्धति का आधार है।
श्री कोविंद ने कहा कि देश में आदर्श शिक्षकों की लम्बी परंपरा रही है। तक्षशिला विश्वविद्यालय के प्राचार्य रहे आचार्य विष्णु गुप्त ने अपने शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य के सहारे नैतिक आदर्शों पर आधारित राज्य की स्थापना की थी। राष्ट्रपति ने कहा कि जिस शिक्षा में चरित्र निर्माण का पाठ होता है और वहां आदर्श मूल्यों वाले इंसान का निर्माण होता है और ऐसा इंसान जीवन में प्रत्येक क्षेत्र में अच्छा साबित होता है। उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया का निर्वहन करते हुए शिक्षक विद्यार्थियों को अच्छा इंसान बनाकर राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान देते हैं।