दाम बढऩे से सोने के आयात में गिरावट, 23 प्रतिशत तस्करी बढ़ी
   Date06-Sep-2019

 
इन्दौर ठ्ठ व्यापार प्रतिनिधि
सोने के दाम बढऩे से इसका अधिकृत आयात गिरा है। जबकि देश में 23 प्रतिशत सोने की तस्करी बढ़ी है। वही सोना महंगा हो जाने से रिजर्व बैंक ने भी इसकी खरीदी से हाथ खींच लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार देश का स्वर्ण आयात एक साल पहले के मुकाबले अगस्त में 73 प्रतिशत गिरकर तीन साल के निचले स्तर पर आ गया है। दामों में रिकार्ड उछाल और आयात शुल्क में इजाफे से खुदरा खरीद हतोत्साहित होने के कारण ऐसा हुआ है। दुनिया के इस दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता देश द्वारा कम आयात से वैश्विक कीमतों के इजाफे में लगाम लग सकती है जो तकरीबन छह साल के शीर्ष स्तर के आसपास चल रही है। लेकिन आयात में कमी से भारत को अपना व्यापार घाटा कम करने और रुपए को सहारा देने में मदद मिलेगी। भारत ने अगस्त में 30 टन सोने का आयात किया है जो पिछले साल के 111.47 टन से कम रहा। मूल्य के लिहाज से अगस्त का आयात 62 प्रतिशत गिरकर 1.37 अरब डालर रह गया जो अगस्त 2016 के बाद से सबसे कम है। बुधवार को सोने का स्थानीय वायदा भाव सर्वकालिक शीर्ष स्तर 39,770 रु. प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया जो 2019 की तुलना में 26 प्रतिशत से भी अधिक रहा। मूल्य वृद्धि के कारण पिछले कुछ हफ्तों से खुदरा मांग सुस्त रही। कुछेक उपभोक्ता सोने बेच रहे है। पुराने सोने की आपूर्ति में काफी इजाफा हुआ है। पिछले महीने विश्व स्वर्ण परिषद् ने कहा था कि भारत की सोने की मांग सितंबह तिमाही में नरम रहने की संभावना है, क्योंकि रिकार्ड स्तर पर पहुंच चुके स्थानीय दामों से खरीद सीमित हो रही है। अगस्त में व्यापारियों आधिकारिक घरेलू कीमतों की तुलना में प्रति औंस 37 डालर तक की छूट दे रहे थे जो 2016 के बाद से सबसे ज्यादा रही। दूसरी तरफ सीमा शुल्क विभाग ने अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले अवैध सोने की 23 प्रतिशत अधिक खेपों को पकड़ा है। इससे सोने की बढ़ती तस्करी का स्पष्ट संकेत मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में इजाफा भी इसका एक कारण हो सकता है। 2019-20 की पहली तिमाही में विभाग ने 1,197 किलोग्राम सोना जब्त किया, जबकि पिछले साल अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 972 किलोग्राम सोना जब्त किया गया था। वित्त वर्ष 2018-19 में 1,500 करोड़ रु. का मूल्य 4,058 किलोग्राम सोना जब्त किया है जो पिछले वर्ष जब्त किए गए सोने के मुकाबले 25 प्रतिशत ज्यादा है। शुल्क में बढ़ोतरी का असर दूसरी तिमाही में ज्यादा दिखेगा जब मांग बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को इस कीमती धातु के लिए ज्यादा दाम चुकाने होंगे। उन्होंने कहा कि विभाग ने संभावना जताई है कि वह इस साल पिछले साल की तुलना में दोगुनी जब्ती करेगा। इस अवधि के दौरान भारी मात्रा में तस्करी हुई है। विभाग ने 164 करोड़ रु. मूल्य की विदेशी मुद्रा जब्त की है। आंकड़े बताते है कि विदेशी नागरिकों द्वारा सोने और विदेशी मुद्रा की सीधी तस्करी के मामलों में भी तेज वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 19 के दौरान सोने की तस्करी में विभाग द्वारा करीब 210 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 18 में गिरफ्तार लोगों की संख्या 98 थी। इस अवधि के दौरान विदेशी मुद्री की तस्करी में 35 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि पिछले वर्ष केवल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पकड़े गए ज्यादातर लोग भूटान, ताइवान, चीन, अफगानिस्तान, दक्षिण कोरिया, जापान और दुबई के नागरिक है। डीआरआई ने ताइवान के पांच नागरिकों से पूछताछ की और भारत में सोने की तस्करी करने वाले गिरोह और इसकी बिक्री से मिलने वाला पैसा बाहर भेजे जाने का पता लगाया। विश्व स्वर्ण परिषद् (डब्ल्यूजीसी) के प्रबंध निदेशक (भारत) सोमसुंदरम पीआर ने कहा कि सोने का आयात या चालू खाता घाटा अब प्रमुख मसला नहीं है। हाल ही के कुछ महीनों में भारतीय मुद्रा के हिसाब से कीमतों में 25 प्रतिशत की वृद्धि होने की वजह से सोने को पहले ही सुस्त मांग का सामना करना पड़ रहा है जो स्वाभाविक रूप से खरीद में बाधा डाल रही है। आगे किसी भी कमी से न केवल इस उद्योग का संकट बढ़ेगा बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार को सहारा देने वाले पूर्वानुमानों की नकारात्मक धारणा भी बढ़ जाएगी। आयात पहले ही कई वर्ष के निचले स्तर पर है, जिसका स्थान पुराने सोने के बढ़ते स्तर ने ले लिया है। यह 2019 में अभूतपूर्व स्तर पर जा सकता है।