इमरान का भाषण घृणा पर आधारित और मध्ययुगीन सोच का परिचायक
    Date28-Sep-2019

 
संयुक्त राष्ट्र 28 सितम्बर (वा) भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के भाषण को 'घृणा पर आधारितÓ एवं 'मध्ययुगीन सोच वालाÓ करार देते हुए कहा है कि परमाणु युद्ध की धमकी देकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह दूरदृष्टा राजनेता नहीं, बल्कि अस्थिर मन:स्थिति वाले नेता हैं।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण पर जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यह तीखी टिप्पणी की। भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के उनके देश में कोई आतंकवादी संगठन नहीं होने के दावे पर कई प्रश्न भी खड़े किए। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन में प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि ऐसा समझा जाता है कि इस गरिमामय मंच से बोला गया प्रत्येक शब्द इतिहास से जुड़ा है, लेकिन दुर्भाग्य से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के मुंह से जो कुछ सुना गया, उसमें बहुत प्रभावशाली ढंग से दुनिया के दो ध्रुवीय चेहरे को उकेरने का प्रयास किया गया।
यह एक ऐसी पटकथा थी, जो संयुक्त राष्ट्र में विभाजन की रेखा खींचती है, मतभेदों को गहरा करती है और घृणा को बढ़ाती है। आसान शब्दों में कहें तो यह एक 'घृणा पर आधारित भाषणÓ था।
सुश्री मैत्रा ने श्री खान पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच के खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि कूटनीति में शब्दों की अहमियत होती है, लेकिन तबाही, खून-खराबा, नस्लीय श्रेष्ठता, बंदूक उठाना और अंत तक युद्ध जैसे शब्दों के प्रयोग ने एक मध्ययुगीन सोच को उजागर किया है, न कि 21वीं सदी के 'विजनÓ को। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का परमाणु त्रासदी की धमकी देना उनके अस्थिर मति वाले नेता होने का परिचायक है, न कि दूरदृष्टा राजनेता होने का।
सुश्री मैत्रा ने कहा कि आतंकवाद के उद्योग की समूची वैल्यू चेन पर एकाधिकार रखने वाले देश के नेता प्रधानमंत्री इमरान खान का आतंकवाद का बचाव करना घोर निर्लज्ज एवं भड़काऊ व्यवहार है। कोई भद्रजनों के खेल क्रिकेट का खिलाड़ी रहा होगा, लेकिन उनके अंदाज के भाषण से दर्रा आदम खेल की बंदूकों की याद आ गई।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों को यह सत्यापित करने के लिए आमंत्रित किया है कि पाकिस्तान में कोई आतंकवादी संगठन नहीं है, विश्व उन्हें उनके वादे पर अवश्य परखेगा। भारत ने पाकिस्तान के सामने कुछ सवाल रखे और कहा कि सत्यापन के प्रस्तावक के रूप में उसे इन प्रश्नों के उत्तर देने चाहिए।
सुश्री मैत्रा ने पूछा कि क्या पाकिस्तान इस बात की पुष्टि कर सकता है कि उसके यहां आज भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित 130 आतंकवादी और 25 आतंकवादी संगठन मौजूद हैं। क्या पाकिस्तान स्वीकार करेगा कि उसकी सरकार विश्व में एकमात्र सरकार है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा अलकायदा एवं इस्लामिक स्टेट के प्रतिबंधित आतंकवादियों को पेंशन प्रदान करती है। क्या पाकिस्तान बता सकता है कि यहां न्यूयॉर्क में उसके प्रतिष्ठित हबीब बैंक को क्यों बंद करना पड़ा, जिस पर आतंकवादियों को धन मुहैया कराने के आरोप में लाखों डॉलर का जुर्माना लगाया गया था।
भारतीय राजनयिक ने पूछा कि क्या पाकिस्तान इस बात से इंकार करेगा कि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल ने पूरे देश को उसके 27 में से 20 मानदंडों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए उसे नोटिस दिया है तथा क्या पाकिस्तानी प्रधानमंत्री न्यूयॉर्क में इस बात से इंकार करेंगे कि वह ओसामा बिन लादेन के खुलकर बचाव करते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद और घृणा आधारित भाषण को लेकर घिरने के बाद पाकिस्तान अब मानवाधिकारों के मामले में चैम्पियन बनने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह एक ऐसा देश है कि 1947 में अल्पसंख्यक समुदाय 23 प्रतिशत था, जो आज घटकर तीन फीसदी रह गया है। ईसाई, सिख, अहमदिया, हिन्दू, शिया, पश्तून, सिंधी और बलूची खतरनाक ईशनिंदा कानून, शासन द्वारा उत्पीडऩ, दुव्र्यवहार एवं बलात् धर्मांतरण के शिकार हुए हैं।
ठ्ठक्रिकेट खिलाड़ी रहे और जेंटलमैन खेल में विश्वास रखने वाले खान ने आज ऐसा भाषण दिया, जो दर्रा आदम खेल की बंदूकों की मंडी की याद दिलाता है। पाकिस्तान ऐसा देश है, जहां 1947 में 23 फीसदी रहे अल्पसंख्यक समुदाय की संख्या घटकर आज तीन फीसद रह गई है और उसने ईसाइयों, सिखों, अहमदियों, हिंदुओं, शियाओं, पश्तूनों, सिंधियों और बलोचों पर कठोर ईशनिंदा कानून लगाए, व्यवस्थित मुकदमे चलाए, घोर उल्लंघन किए और जबरन धर्म परिवर्तन किया।
ठ्ठहम आपसे अनुरोध करेंगे कि आप इतिहास की अपनी समझ को ताजा करें। साल 1971 में पाकिस्तान द्वारा अपने ही लोगों के खिलाफ किए क्रूर नरसंहार और उसमें लेफ्टिनेंट जनरल एएके निआजी की भूमिका को न भूलें। एक ऐसी कड़वी सच्चाई जिसकी बांग्लादेश की माननीय प्रधानमंत्री ने आज दोपहर को इस महासभा को याद दिलाई।
ठ्ठऐसा माना जाता है कि इस मंच से बोले गए हर शब्द का इतिहास से वास्ता है। दुर्भाग्य से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से हमने आज जो भी सुना, वह दोहरे अर्थों में दुनिया का निर्मम चित्रण था। हम बनाम वह, अमीर बनाम गरीब, उत्तर बनाम दक्षिण, विकसित बनाम विकासशील, मुस्लिम बनाम अन्य था। एक ऐसी पटकथा जो संयुक्त राष्ट्र में विभाजन को बढ़ावा देती है।
ठ्ठ खान की परमाणु विध्वंस की धमकी अस्थिरता का सूचक है, न कि शासन कला की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खान का आतंकवाद पर स्पष्टीकरण भड़काऊ है। उन्होंने कहा- भारत के लोगों को अपने लिए बोलने वाले किसी व्यक्ति की जरूरत नहीं है और कम से कम उनकी तो बिल्कुल नहीं, जिन्होंने नफरत की विचारधारा से आतंकवाद का कारोबार खड़ा किया है।
ठ्ठक्या पाकिस्तान इस बात की पुष्टि कर सकता है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 130 आतंकवादी और 25 आतंकवादी संगठन उसके यहां नहीं है? उन्होंने कहा- क्या पाकिस्तान यह मानेगा कि वह दुनिया में एकमात्र देश है, जो संयुक्त राष्ट्र की अलकायदा और इस्लामिक स्टेट प्रतिबंध सूची में शामिल लोगों को पेंशन देता है।
ठ्ठक्या पाकिस्तान बता सकता है कि यहां न्यूयॉर्क में उसके प्रमुख बैंक हबीब बैंक को आतंकवाद के वित्त पोषण पर लाखों डॉलर के जुर्माने के बाद अपनी दुकान बंद करनी पड़ी?
प्रथम सचिव ने कहा- क्या पाकिस्तान इससे इंकार करेगा कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल ने देश को 27 प्रमुख मानकों में से 20 से अधिक के उल्लंघन के लिए नोटिस दिया?