नियमों को ठेंगा दिखा सड़कों पर दौड़ रहे गैस किट लगे वाहन
   Date15-Sep-2019

 
भोपाल द्य स्वदेश समाचार
राजधानी की सड़कों पर इन दिनों गैस किट लगे वाहन फर्राटा भरते नजर आएंगे। बल्कि राजधानी ही नहीं अमूमन पूरे प्रदेश की यही कहानी है। इन गैस किट लगे वाहनों का ज्यादातर उपयोग स्कूली छात्रों को लाने ले जाने में किया जा रहा है।
बड़ी बात तो यह है कि, चंद दिन, महीने पहले पड़ोसी राज्य राजस्थान के कोटा में एक कोचिंग संस्थान में हुए हादसे के बाद आनन-फानन में पूरे प्रदेश में कुछ दिन कोचिंग संस्थानों के साथ गैस किट लगे वाहन मालिकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई तो की गई पर नतीजा वही ढाक के तीन पात की तरह सिफर ही रहा। आज भी शहर की सड़कों पर स्कूली बच्चों से भरे गैस किट लगे वाहन दौड़ते नजर आएंगे। बड़ी बात यह है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी इन वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने के निर्देश सभी राज्य सरकारों को दिए हैं, बावजूद इसके गैस किट वाहन स्कूली बच्चों को ढोते हुए नजर आएंगे। इतना ही नहीं इन स्कूली वैनों में क्षमता से ज्यादा स्कूली छात्रों को बैठाया भी जा रहा है। राजधानी में विगत कई वर्षों से लगभग 400 से अधिक स्कूलों में 6000 से ज्यादा वैन नौनिहालों का जीवन खतरे में डाल कर चल रही हैं। स्थिति यह है कि इनमें से अधिकांश के पास स्कूलों में वैन संचालित करने का परमिट भी नहीं है। यह सिर्फ कमर्शियल वाहन के तौर पर चल रही हैं।
कार्रवाई के नाम
पर खानापूर्ति
इस मामले में महत्वपूर्ण यह है कि ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा महज कागजी कार्रवाई कर सिर्फ हिदायत देकर छोड़ दिया जाता है। सरकार के स्तर पर भी यह समीक्षा तक ही सिमट कर रह गया है। हालत यह है कि किसी भी जिले में ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ के पास मांगे जाने पर स्कूल संचालकों और वैन संचालकों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौेरा नहीं रहता है।
साल दर साल बढ़
रही घटनाएं
प्रशासनिक लापरवाही के कारण ही प्रदेश में साल दर साल दुर्घटनाओं में इजाफा हो रहा है। साल 2015 में राजधानी में 42, 2016 में 68 घटनाएं सामने आईं तो 2017 में 97 तथा 2018 में 104 घटनाएं सामने आई हैं।
इनका कहना है...
हमने कुछ स्कूल संचालकों और वैन मालिकों को चिन्हित कर लिया है, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हम ट्रैफिक पुलिस के साथ कार्रवाई कर रहे हैं।
-संजय तिवारी,
आरटीओ, भोपाल