झाबुआ से कांतिलाल भूरिया के पक्ष में जुटे दिग्विजय!
   Date15-Sep-2019
 
 
 शैलेन्द्र सिंह पंवार
रविवार। झाबुआ विधानसभा उपचुनाव के लिए दिग्विजय सिंह पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के पक्ष में जुट गए हैं। भूरिया को अगर टिकट मिलता है और वे विजयी होते हैं तब कमलनाथ को अपनी सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाना पड़ेगा। अपनी इसी रणनीति के चलते सिंह ने हाईकमान के समक्ष भी भूरिया के नाम की पैरवी कर दी है। भूरिया के उपमुख्यमंत्री बनने पर कमलनाथ सरकार में सिंह का दखल और बढ़ जाएगा।
सितंबर के अंत या फिर अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में झाबुआ विधानसभा उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित हो जाएगा। भाजपा के गुमानसिंह डामोर के विधायक से सांसद बनने पर मई माह में यह सीट रिक्त हुई थी। चूंकि भाजपा और कांग्रेस में आंकड़ों के लिहाज से बेहद ही नजदीकि मामला है, इस कारण दोनों ही दलों ने पिछले कुछ समय से यहां पर अपनी हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित कांग्रेस सरकार के तमाम मंत्रियों का यहां पर आना-जाना लगा हुआ है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, राकेश सिंह सहित भाजपा के भी कई प्रमुख नेताओं ने झाबुआ में विभिन्न आयोजनों के माध्यम से अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। अजजा वर्ग के लिए आरक्षित झाबुआ विधानसभा सीट पर कांग्रेस के प्रमुख दावेदारों में कांतिलाल भूरिया, जेवियर मेड़ा व डॉ. विक्रांत भूरिया शामिल है। जबकि भाजपा की ओर से शांतिलाल बिलवाल सहित आधा दर्जन नाम सुर्खियों में है। बहुत हद तक उम्मीद है कि कांग्रेस उक्त तीनों ही चेहरों में से किसी एक को मौका देगी, वहीं भाजपा किसी नए चेहरे पर विचार कर रही है।
कई मंत्री हो चुके हंै मुखर-वैसे भूरिया के टिकट के पीछे दिग्जिय सिंह की असली मंशा चुनाव जीतने के बाद उनको उपमुख्यमंत्री बनवाने की है। क्योंकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व केन्द्रीय मंत्री तथा आदिवासी वर्ग से नाता रखने के कारण कमलनाथ को उनको हर हाल में उपमुख्यमंत्री ही बनाना पड़ेगा, तब दिग्विजय सिंह का कमलनाथ सरकार में और दखल बढ़ जाएगा। अभी भी उनका कांग्रेस सरकार में खासा दखल है और उनकी दखलअंदाजी के चलते ही उमंग सिंघार, सज्जन सिंह वर्मा सहित कुछ मंत्री मुखर भी हो चुके हैं। भूरिया 10 साल तक दिग्विजय सिंह सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं, वे तभी से सिंह से जुड़े हैं। बीते लोकसभा चुनाव में वे भाजपा के डामोर से पराजित हो गए थे।
जेवियर के पक्ष में कमलनाथ
दिग्विजय सिंह भूरिया तो कमलनाथ जेवियर मेड़ा के पक्ष में है। मेड़ा की बगावत के कारण ही पिछले विधानसभा चुनाव में विक्रांत भूरिया 25 हजार मतों से पराजित हो गए थे, मेड़ा 25 हजार से अधिक मत ले गए थे। मेड़ा 2013 में विधायक रह चुके हंै और वे ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट से है। मेड़ा को टिकट देने पर कमलनाथ, सिंधिया को भी साध लेंगे, जो इन दिनों अपने समर्थकों के माध्यम से प्रदेश में एक नया शक्ति केन्द्र बनाने में जुटे हंै। कांतिलाल भूरिया व जेवियर मेड़ा के नाम पर सहमति नहीं बनने पर विक्रांत भूरिया को भी मौका दिया जा सकता है। हालांकि तब मेड़ा को सरकार में कहीं और उपकृत करना होगा, जबकि कांतिलाल राज्यसभा से भी वंचित हो सकते हैं। विक्रांत, कांतिलाल भूरिया के पुत्र है।
चुनाव कार्यक्रम नजदीक आने से कांग्रेस में टिकट की लड़ाई तेज हो गई है। जूनियर व सीनियर भूरिया के साथ ही मेड़ा ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, वहीं कांग्रेस के दिग्गज भी टिकट किसको मिलना चाहिए और किसे नहीं, इस कवायद में जुटे हैं। सूत्र बताते दिग्विजय सिंह कांतिलाल भूरिया के लिए जोर-शोर से लॉबिंग कर रहे हैं। इसको लेकर वे कांग्रेस हाईकमान के समक्ष भी तर्क दे आए हैं। भूरिया पुराने आदिवासी नेता है और उनकी झाबुआ ही नहीं इस नाते पूरे प्रदेश में पहचान है। वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ ही केन्द्र सरकार में अजजा मामलों के मंत्री भी रह चुके हैं। उनकी संभावनाएं भी दूसरे किसी अन्य उम्मीदवार से चुनाव जीतने की ज्यादा है, वे झाबुआ से चार बार सांसद भी रह चुके हंै, कुछ इस प्रकार के तर्कों से दिग्विजय सिंह ने हाईकमान के समक्ष भूरिया को टिकट देने की पैरवी की है।