देशभक्तों को कांग्रेस में स्थान नहीं
   Date12-Sep-2019

अनुच्छेद 370 एवं 35(ए) को समाप्त करने के लिए जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया, तो इस विधेयक का विरोध कांग्रेस, कम्युनिस्टों, टीएमसी जैसे दलों ने किया। कांग्रेस में ही कई नेता 370 के प्रावधान को देशहित में समाप्त करने के पक्ष में दिखाई दिए। ज्योतिरादित्य सिंधिया, जनार्दन द्विवेदी आदि करीब एक दर्जन कांग्रेसी इस विधेयक के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। हालत यह हुई कि राज्यसभा में कांग्रेस के सचेतक ने तो कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा देकर कहा कि 370 को हटाने के पक्ष में लाए गए विधेयक का विरोध कर कांग्रेस ने आत्मघाती निर्णय लिया है। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। इसी प्रकार ताजा समाचार है कि महाराष्ट्र विधानसभा के लिए राजनीतिक बिसात बिछाने में जुटी कांग्रेस को गत मंगलवार को तगड़ा झटका उस समय लगा, जब मुंबई कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी। राज्य के पूर्व गृहमंत्री और हिन्दी भाषी समुदाय में गहरी पेठ रखने वाले नेता कृपाशंकर सिंह ने अनुच्छेद 370 पर पार्टी के रुख का विरोध करते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इस बारे में संसद में चली बहस में पार्टी के रवैये से वे आहत है। विलासराव सरकार में गृह राज्यमंत्री रह चुके कृपाशंकर सिंह मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश की जोनपुर जनपद के रहने वाले हैं। वे कांग्रेस में अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। उनसे पहले अभिनेत्री से राजनेता बनी उर्मिला मार्तोंडकर और हर्षवद्र्धन पाटिल भी पार्टी छोडऩे की घोषणा कर चुके हैं। इस बारे में उल्लेखनीय है कि चार राज्यों के विधानसभा चुनाव है, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और झारखंड। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन का मुकाबला कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस से है। वर्तमान में वहां भाजपा-शिवसेना की सरकार थी। वैचारिक दृष्टि से विचार करे तो एक ओर राष्ट्रवादी विचार है और दूसरी ओर है कथित सेकूलर देश विरोधी विचार। वैसे विधानसभा चुनाव राज्य सरकार के कामकाज पर होते हैं, लेकिन वर्तमान में राष्ट्रहित के मुद्दे पर भी जनता प्रभावित हो सकती है। अनुच्छेद 370 एक अलगाववादी प्रावधान था। प्रधानमंत्री पं. नेहरू ने भी कहा था कि यह अनुच्छेद घिसते-घिसते समाप्त हो जाएगा, लेकिन 370 समाप्त होने की बजाय इसके कारण आतंकवादी पैदा हुए। कश्मीर घाटी में लोग यह समझने लगे कि हम भारत से अलग है। कश्मीरियत की धारा राष्ट्रीय धारा से अलग है। अलगाव और आतंकवाद की आग में कश्मीर जलता रहा। गत 70 वर्षों में एक भी सरकार ने इस राष्ट्रघाती अनुच्छेद को समाप्त करने का साहस नहीं दिखाया। पहली बार मोदी सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति से इस अनुच्छेद 370 एवं 35(ए) को समाप्त करने के साथ जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन विधेयक को भी पारित किया। अब लद्दाख यूनियन टेरिटरी होगा और जम्मू-कश्मीर अलग राष्ट्रपति शासित राज्य होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि स्थिति सामान्य होते ही जम्मू-कश्मीर राज्य के चुनाव करा लिए जाएंगे। अनुच्छेद 370 के समर्थन और विरोध से यह भी स्पष्ट है कि कौन राष्ट्रहित के साथ है और कौन विरोध में?
दृष्टिकोण
पाकिस्तान ने उगला सच
पाकिस्तान के हुक्मरान न केवल भीख का कटोरा लेकर दुनिया के अमीर देशों के यहां दस्तक दे रहे हैं और अनुच्छेद 370 होने के बाद कश्मीर का रोना भी रो रहे हैं। कभी अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प से अपनी गुहार लगा रहे और कभी मानवाधिकार की बात करते हैं, जबकि बलूच पीओके और सिंध के लोगों पर पाकिस्तान का दमनचक्र चल रहा है। हाल ही में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का मुद्दा उठाने पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् में पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। भारत ने पाकिस्तान के दुर्भावनापूर्ण अभियान को दृढ़ता से खारिज करते हुए मानवाधिकार परिषद् में कहा कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करना भारतीय संसद द्वारा किया गया एक संप्रभु निर्णय है। भारत अपने आंतरिक मामले में किसी का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं कर सकता। इसी बीच मानवाधिकार का राग अलापते हुए जिनेवा पहुंचे पाक विदेश मंत्री मेहमुद कुरैशी की जुबान पर सच आ ही गया। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि भारत दुनिया को यह दिखाने की कोशिश में है कि जीवन सामान्य हो गया है, अगर सब सामान्य है तो में पूछना चाहता हूँ कि भारत क्यों अंतराष्ट्रीय मीडिया संगठनों, एनजीओ व अन्य को भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में सच जानने के लिए जाने की अनुमति नहीं दे रहा। हालांकि अभी तक पाकिस्तान अपने अधिकारिक बयानों में जम्मू-कश्मीर को भारत अधिकृत कश्मीर कहता था, विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भी पाकिस्तान पिटता जा रहा है। विदेश मंत्रालय की सचिव विजय ठाकुर सिंह ने कहा कि पाकिस्तान मानवाधिकार के बहाने दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक एजेंडे के लिए मानवाधिकार परिषद् का उपयोग करना चाहता है।