371 पर शाह का आश्वासन
   Date11-Sep-2019

एनआरसी में गड़बड़ी की शिकायतों के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में कोई घुसपैठियां नहीं बचेगा। गुवाहाटी में पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद 371 में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। मैं आश्वस्त करना चाहता हूँ कि एक भी घुसपैठियां न असम में रह सकता है और न दूसरे राज्यों में। पूरे देश को घुसपैठियों से मुक्त करना हमारा मकसद है। मोदी सरकार पर लोगों को भरोसा है कि इसके नेताओं द्वारा जो वादे किए, उसे पूरा करके बताया। जिस तरह अनुच्छेद 370 को एक झटके में हटाया, विपक्ष के विरोध की परवाह किए बिना 370 को हटाने का साहसिक निर्णय लिया। असम में एनआरसी की अंतिम सूची घोषित हुई है। उसमें करीब 16 लाख लोगों के नाम नहीं है। कई हिन्दुओं के नाम भी गायब है। हालांकि आवश्यक प्रमाण के साथ ट्रब्यूनल में ऐसे लोग जा सकते हैं, जिनके नाम सूची में नहीं है। एनआरसी का पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री विरोध कर रही है। उन्होंने कहा है कि वे पश्चिम बंगाल में एनआरसी को किसी हालत में लागू नहीं होने देगी। दूसरी ओर भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि वे पश्चिम बंगाल में भी एनआरसी लागू करेंगे। इस संदर्भ में जानना होगा कि असम में तो छात्रों ने विदेशी घुसपैठियों को बाहर करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था। कांग्रेस एनआरसी का इसलिए विरोध करती है कि उससे कांग्रेस को राजनीतिक लाभ मिलता रहा है। मुस्लिम घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में डलवाकर कांग्रेस ने घुसपैठियों को जीत का आधार बनाया। यही स्थिति प. बंगाल की है। जिस तरह घुसपैठियों के कारण असम के डेढ़ दर्जन जिले मुस्लिम बाहुल्य हो गए, उसी तरह प. बंगाल के जिलों का भी मुस्लिमकरण हो रहा है। जो ममता बनर्जी किसी समय घुसपैठियों को बाहर करने की मांग करती थी, अब घुसपैठियों के बल पर ही वे अपनी सरकार को स्थिर रखना चाहती है। घुसपैठियों से मुक्त करने का संकल्प अमित शाह ने किया है। मणिपुर की सरकार ने भी एनआरसी की मांग की है। ऐसा लगता है मोदी सरकार पहले पूर्वांचल राज्यों से घुसपैठियों को बाहर करने के लिए एनआरसी लागू करेगी। वैसे तो बांग्लादेशी घुसपैठिये पूरे देश में फैले हुए है। मुंबई में भी लाखों की संख्या में घुसपैठिये है। एक बार शिवसेना की ओर से कहा गया था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों, गुंडागिर्दी और अपराध करते हैं। अब रोहिंग्या मुस्लिम भी समस्या बन गए हैं। सवाल यह है कि क्या हम भारत को धर्मशाला के रूप में देखना चाहते हैं? यह हमारी उदारता सहिष्णुता के कारण है। इस देश में जो आया, बसता गया। इससे ही कई प्रकार की राष्ट्रघाती समस्याएं पैदा हुई है। कोई भी देश विदेशी घुसपैठियों को बर्दाश्त नहीं करता। यदि मोदी सरकार ने विदेशी घुसपैठियों को बाहर करने के संकल्प को मूर्तरूप दिया तो इससे जनसंख्या का अतिरिक्त भार भी नहीं बढ़ेगा और अपराध का ग्राफ भी घटेगा। विडंबना यही है कि राष्ट्रहित के कार्यों में भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल बाधा डाल रहे हैं। अनुच्छेद 370 के बाद अब 371 को भी कड़ाई से लागू करना चाहिए।
दृष्टिकोण
पाक के अत्याचार का चिट्ठा खुला
पाकिस्तान की सच्चाई जानने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के विधायक बलदेव कुमार जो अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए किसी तरह भारत में आए हैं। उन्होंने वहां अल्पसंख्यकों विशेषकर हिन्दू सिखों पर हो रहे अत्याचारों का कच्चा चिट्ठा प्रस्तुत किया है। बलदेव तीन महीने पहले ही वीजा पर 12 अगस्त को अटारी बार्डर पार कर भारत आए। लुधियाना में उनकी सुसराल है। वे अब पाकिस्तान नहीं जाना चाहते। उन्होंने कहा कि मेरे बुजुर्गों ने पाकिस्तान के लिए कुर्बानिया दी। अब वे भारत इसलिए आए है कि उनकी और परिवार की जान बच सके। जो बलदेव सत्तारूढ़ इमरान की पार्टी के विधायक रहे, यदि पाकिस्तान में उनकी जान को खतरा है तो वहां कोई भी अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है। हाल ही में सिखों की बच्चियों का अपहरण कर उनका धर्म परिवर्तन कराया। इस बारे में उल्लेख करना होगा कि 1947 में जब देश का खूनी विभाजन हुआ, तब हिन्दू सिखों का पंजाब, सिंध एवं बंगाल में कत्लेआम हुआ। विभाजन के बाद पाकिस्तान में 19-20 प्रतिशत हिन्दू सिख थे। वहां अपहरण, बलात्कार, हत्याओं का शिकार हिन्दू सिख हो रहे हैं। गत 72 वर्षों में हिन्दू सिखों की संख्या करीब 20 प्रतिशत से घटकर डेढ़ प्रतिशत भी नहीं है। दूसरी ओर भारत है, जहां मुस्लिम अल्पसंख्यकों को बहुसंख्य हिन्दुओं से अधिक सुविधाएं है।