जम्मू-कश्मीर में विकास का अरुणोदय : मंदिर निर्माण भी होगा
   Date10-Sep-2019

जयकृष्ण गौड़
मो दी सरकार ने अस्थायी अनुच्छेद 370 एवं 35 (ए) को समाप्त करने के निर्णय को एक माह हो गया है, दोनों सदनों के दो तिहाई सदस्यों के समर्थन से इस अलगाव के अनुच्छेद को समाप्त किया। इसी तरह लद्दाख को केंद्र शासित क्षेत्र बनाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित राज्य बनाने का विधेयक भी भारी बहुमत से पारित हो गया। जो नेता कहते थे कि 370 को खत्म किया गया तो कश्मीर में तिरंगा को कांधा देने वाला कोई नहीं मिलेगा। विरोध में जो आग भड़केगी, उस पर नियंत्रण करना संभव नहीं होगा।
इसी प्रकार अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के मामले में सुनवाई जारी है। पहले हिन्दू पक्ष के वकीलों ने ऐतिहासिक, पौराणिक और पुरातत्वीय (एएसआई) प्रमाण प्रस्तुत किए। दूसरा दौर बाबरी पक्ष की ओर से दलील देते हुए जो कहा, उस पर चर्चा करेंगे। अनुच्छेद 370 को खत्म करने से कश्मीर घाटी में उपद्रव का जो संदेह था और जो कुछ नेताओं को रिहा करने की बात कर रहे हैं। उनको यह देख निराशा हुई कि घाटी में तेजी से स्थिति सामान्य हो रही है। एक माह में एक भी गोली सुरक्षाबलों की ओर से नहीं चली। केवल एक दुकानदार की हत्या इसलिए कर दी गई कि उसने दुकान खोलने का साहस किया था। इसी तरह दो गुर्जरों की हत्या आतंकियों ने कर दी। 370 के पहले आएदिन गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, लोग मारे जाते थे। जुम्मे के दिन अक्सर भीड़ से सुरक्षाकर्मियों पर पथराव होता था। आतंकवाद घुसपैठ करने में सफल होकर लोगों का खून बहाते थे। लेकिन 370 इतिहास में दर्ज होने के बाद अलगाववादियों, पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले और 370 हटने के बाद जो घाटी में उपद्रव करने की बात करते थे, ऐसे उमर अब्दुल्ला, मेहबूबा मुफ्ती आदि को हिरासत में लेने से गत एक माह में न कोई उपद्रव हुआ और न कोई आग लगी। ईद और जुम्मे की नमाज भी शांति से पढ़ी गई। अब कश्मीर का जनजीवन सामान्य की ओर तेजी से लौट रहा है। विकास की दृष्टि से भी निर्णायक कदम बढ़ाए हैं। पचास हजार जवानों को नौकरी देने की घोषणा के साथ इस बारे में प्रक्रिया भी प्रारंभ हो गई है। सरपंचों की मांगें भी पूरी करने का आश्वासन गृह मंत्री अमित शाह ने दिया। घाटी में अधिकांश स्कूल खुल गए हैं। इंटरनेट, मोबाइल और टेलीफोन सेवाएं भी चालू कर दी गई हैं। पाबंदी केवल अतिसंवेदनशील क्षेत्र में है। 29 हजार युवकों की सेना में भर्ती होने की रैली हुई। इससे भारत माता की जय, वंदे मातरम की जय की गूंज सुनाई। जब सारा देश अनुच्छेद 370 को खत्म करने के निर्णय के साथ खड़ा है। ऐसे समय कांग्रेस जनभावना के विपरीत आचरण कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर रही है। 370 हटाने का संसद में न केवल कांग्रेस ने विरोध किया, बल्कि कांग्रेस के नेता अधिरंजन चौधरी ने कश्मीर को राष्ट्र संघ में मॉनीटरिंग की बात कहते हुए सवाल उठाया कि कश्मीर क्या केवल भारत का आंतरिक मामला है। इसका गुस्से में जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, पीओके के सहित भारत का अभिन्न अंग है। इसके लिए हम जान भी दे देंगे। गुलाम नबी आजाद ने तो कहा कि यह निर्णय बम के धमाके की तरह है, कश्मीर अशांत है, इसलिए 370 के निर्णय को वापस लेना चाहिए। जिस तरह कोई मानसिक विकृति का व्यक्ति आत्महत्या की ओर प्रेरित होता है, उसी तरह कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद अपने साथ देश तोड़क कम्युनिस्टों और 370 को खत्म करने का विरोध करने वाले कुछ नेताओं को साथ लेकर कश्मीर की स्थिति का जायजा लेने के नाम पर कश्मीर में हिंसा को भड़काने के लिए श्रीनगर गए। वहां के एयरपोर्ट से ही प्रशासन ने इन्हें वापस लौटा दिया। राहुल गांधी के इस कथन का पाकिस्तान ने फायदा उठाया कि कश्मीर की स्थिति खराब है, वहां लोग मर रहे हैं। जब इसी कथन का संदर्भ देकर पाकिस्तान ने राष्ट्र संघ को पत्र लिखा। जब कांग्रेस को लगा कि उसकी स्थिति सौ अंडे और सौ जूते खाने वाले जैसी हो गई है। तब राहुल का ट्वीट आया कि सरकार से असहमति होने के बाद भी कश्मीर भारत का अंग है, इसमें किसी अन्य देश का दखल नहीं होना चाहिए। 370 को हटाने के विरोध में कांग्रेस को जनता की लताड़ मिली और मोदी सरकार की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। अब भी पीडीपी और एनसी के कुछ नेता हायतौबा करते हुए सोशल मीडिया में चिल्लाते रहते हैं। अब कह रहे हैं बंदी नेताओं को रिहा करो, फिर पता चलेगा कि 370 को हटाने पक्ष में कश्मीरी है या नहीं। मतलब कश्मीर में उपद्रव होने या करने के लिए विलाप कर रहे हैं। 370 के हटने से जम्मू-कश्मीर में विकास का अरुणोदय हुआ है। इससे संदर्भ में उल्लेख करना होगा कि जम्मू क्षेत्र में 370 के हटने का जश्न मना, जबकि लद्दाख को केंद्र शासित करने से वहां उत्सव जैसा माहौल है। जम्मू हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र होने से वहां कोई समस्या नहीं है। लद्दाख बौद्धों का क्षेत्र है। पहले से ही क्षेत्र को केंद्र शासित करने की मांग की जा रही थी। समस्या है कश्मीर घाटी के कुछ क्षेत्र की, क्योंकि वहां के मुस्लिमों को भड़काने की पाकिस्तान की साजिश लगातार चल रही है। अब पाक सेना का जमावड़ा नियंत्रण रेखा पर हो रहा है। वहां के सेना प्रमुख बाजवा कह रहे हैं कि हम अंतिम गोली, अंतिम सिपाही और अंतिम सांस तक लड़ेंगे। लड़ते-लड़ते खत्म होने की नियति पाकिस्तान की है तो फिर कोई क्या कर सकता है। राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई में जन्मभूमि पक्ष की ओर से स्कंद पुराण, रामायण और पुरातत्वीय उत्खनन में हिन्दू मंदिर होने के प्रमाण प्रस्तुत किए गए। ये प्रमाण इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि जन्मभूमि पर भव्य मंदिर था और बाबर के सिपाहसालार मीर बांकी ने इसे ध्वस्त कर बाबरी ढांचा खड़ा कर दिया। यह भी बहुस हुई कि धर्म को प्रमाण माना जाए या नहीं। हिन्दू पक्ष की ओर से धार्मिक पुस्तकों का संदर्भ देकर प्रमाण प्रस्तुत किए गए। यदि सनातन धर्म के प्रमाण सही नहीं हैं। ये काल्पनिक हैं तो फिर कुरान, हदीस और पर्सनल लॉ का भी कोई मतलब नहीं, फिर पैगम्बर को मानना भी केवल कल्पना की उड़ान है। विडंबना यह है कि बाबरी पक्ष के वकील राजीव धवन ने पहले तो रोजाना सुनवाई का विरोध कर कहा कि पैरवी के अध्ययन के लिए रोजाना सुनवाई से समय नहीं मिलेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने जब धवन की दलील को नकार दिया तो फिर धवन उटपटांग तर्क देने लगे। रामायण के राम की कथा को उन्होंने काल्पनिक बताया। ऐसे ही हलफनामा कांग्रेस के यूपीए शासन की ओर से रामसेतु के मामले में प्रस्तुत कर श्रीराम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए गए थे। उसी तरह पैरवी धवन ने की। रामसेतु मानव निर्मित है, इसकी पुष्टि नासा ने की। इसी तरह अयोध्या से श्रीलंका तक श्रीराम कथा के जीवंत प्रमाण है। जिस मार्ग से श्रीराम, सीता एवं लक्ष्मण वन में गए और श्रीराम के लंका तक पहुंचने के मार्ग के प्रमाण हैं। मूर्तियां बाद में छल से रखी गई। धवन का यह भी सवाल था कि अदालत ने वेद स्कंद पुराण के साक्ष्य मानेगी या 1858 में प्रारंभ हुई कानून व्यवस्था का? हालांकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने माना कि जन्मभूमि पर हिन्दू पूजा करते हैं। इस संदर्भ में शिया बोर्ड की यह दलील भी महत्व की है कि मीर बांकी, जिसने मंदिर को ध्वस्त किया, वह शिया था, इसलिए बाबरी ढांचा पर शिया का अधिकार बनता है। शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि इस पूरी जन्मभूमि की जमीन हिन्दुओं को देने को तैयार है, ताकि वहां भव्य मंदिर का निर्माण हो सके। अब रहा सुन्नी वक्फ बोर्ड, जो आपसी सहमति की हर तरह की पहल को नकारते हुए सुप्रीम कोर्ट में मामला उलझाए रखना चाहता है। अब यह भी कहा जा रहा है कि यदि मामले को लटकाने, उलझाने की साजिश जारी रही तो सरकार अध्यादेश के द्वारा मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर सकती है। राम जन्मभूमि के मामले को उलझाने की पहल बार-बार कांग्रेस द्वारा की गई। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने मामले को चुनाव बाद करने की दलील दी। रोजाना सुनवाई से हिन्दू साधु-संतों और जनता को उम्मीद है कि आगामी दिवाली तक मंदिर निर्माण के बारे में निर्णय हो जाएगा। हिन्दुओं के सब्र का बांध टूट रहा है। 370 को हटाने के बाद भारत की जनता को भरोसा है कि अब पीओके भी मुक्त होगा और राम जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण भी होगा। (लेखक- वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक)