दुनिया साथ खड़ी है, जरूरत एक कदम बढ़ाने की
   Date10-Sep-2019

धर्मधारा
(गतांक से आगे)
मु झे मालूम है किस्मत का लिखा भी बदलता है। मशहूर शायर वशीर वद्र का यह शेर रानू की जिंदगी पर फिट बैठता है। हाथ की सारी लकीरें कभी मिटने के बाद उग आती हैं। शायद रानू मंडल के साथ भी यही हुआ। हालांकि बॉलीवुड की दुनिया में उसका कॅरियार बहुत लंबा नहीं है, क्योंकि रानू जिंदगी के 60वें मोड़ पर पहुंच चुकी है। वह 1960 में पैदा हुई। उसने कहा भी है कि उसकी जिंदगी में इतने मोड़ हैं, उस पर पूरी फिल्म बन सकती है। रानू जब छह माह की थी, तभी उसका साथ माता-पिता से छूट गया। दादी ने किसी तरफ पालन-पोषण किया। बाद में उसने अपनी शादी बॉलीवुड स्टार फिरोज खान के रसोइये बाबू मंडल से कर ली, जिसके बाद वह मुंबई चली आई, लेकिन इस शादी के बाद से उसके जीवन का संघर्ष शुरू हो गया। परिवार में दरार बढऩे लगा। बाद में उसके पति की मौत हो गई और जिंदगी चलाने के लिए उसने रानाघाट को अपनी मंजिल बना लिया। स्टेशन पर रफी साहब के गीत जिसे लता मंगेशकर ने स्वर दिया था। उसी सदाबहार गीत एक प्यार को नगमा है को गाकर आजीविका चलाने लगी। उसी नगमे ने उसे नगमा बना दिया। रानू मंडल की आवाज में गजब की कशिश है। जिस आजाव को अब तक कोई नहीं पढ़ पाया था। उसे यतींद्र चक्रवर्ती ने पढ़ा और वीडियो सूट कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिस पर हिमेश रेशमिया के साथ कई नामचीन हस्तियों की निगाह पड़ी। लेकिन कहते हैं हीरे की पहचान जौहरी ही करता है। आखिर हिमेश सबसे पहले बाजी मार ले गए। हिमेश के साथ गाये रानू के वीडियो इतने वायरल हुए कि वह बॉलीवुड की स्टार संगीतकार बन गई। जबकि उसका भाग्य विधाता यतींद्र चक्रवर्ती रानू का मैनेजर बनकर उसका कामधाम संभालने लगा है। (क्रमश:)