नानाजी देशमुख, प्रणव मुखर्जी भूपेन हजारिका को भारत रत्न
   Date09-Aug-2019

नई दिल्ली द्य 8 अगस्त (वा)
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को आज यहां देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया। उनके अलावा समाजसेवी नानाजी देशमुख और संगीतकार एवं गीतकार भूपेन हजारिका को मरणोपरांत इस अलंकरण से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति भवन में एक आकर्षक समारोह में श्री कोविंद ने प्रशस्ति-पत्र तथा प्रतीक चिन्ह प्रदान किए। इन तीनों विभूतियों को सत्तरवें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत रत्न से विभूषित करने की घोषणा की गई थी। श्री मुखर्जी भारत रत्न से अलंकृत किए गए देश के ऐसे छठे व्यक्ति हैं, जो राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर चुके हैं। इनमें से सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनने से पहले ही यह सम्मान मिला था।
तत्कालीन कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबंधित सूरी विद्यासागर कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद श्री प्रणव मुखर्जी ने इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एम.ए.) तथा कानून की पढ़ाई की। उन्होंने लंबे समय तक शिक्षक, एक वकील एवं पत्रकार के तौर पर काम किया। श्री मुखर्जी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1969 में हुई, जब वह पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इनकी योग्यता से प्रभावित होकर मात्र 35 वर्ष की अवस्था में उन्हें 1969 में कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा का सदस्य बनाया। उसके बाद वे 1975, 1981, 1993 और 1999 में राज्यसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए।
श्री मुखर्जी लोकसभा के लिए पहली बार पश्चिम बंगाल के जंगीपुर निर्वाचन क्षेत्र से 2004 में चुने गए थे और इसी क्षेत्र से दोबारा 2009 में भी लोकसभा के लिए चुने गए। वह लंबे समय तक देश के वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, योजना आयोग के उपाध्यक्ष आदि पदों पर रहे। उन्हें जुलाई 2012 में देश का 13वां राष्ट्रपति चुना गया। श्री मुखर्जी की पत्नी श्रीमती शुभ्रा मुखर्जी का निधन हो गया है और उनके परिवार में पुत्र अभिजीत मुखर्जी और पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी हैं।