मंदिर निर्माण का निर्णय जल्द
   Date09-Aug-2019

तीन तलाक के बारे में कानून और धारा 370 को खत्म करने में मोदी सरकार की साहसिक भूमिका रही। यह भी सच्चाई है कि भाजपा के संकल्प पत्र में जो तीन वैचारिक एजेंडा है, उसमें से धारा 370 को खत्म करने का संकल्प पूरा हो गया। इसी तरह तीन तलाक हर कानून बनाकर सबके लिए समान कानून की ओर सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की जो बाधाएं है, उनको भी न्यायालय या सरकार के द्वारा दूर कर दी जाएगी, यह विश्वास हिन्दू जनता को है। जन्मभूमि के विवाद की सुनवाई अब हर रोज सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। उम्मीद है कि इस बारे में निर्णय आगामी नवंबर तक हो सकता है, क्योंकि चीफ जस्टिस गोगोई नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। इसलिए आगामी नवंबर माह तक इस मामले में निर्णय हो सकता है। हिन्दू जनता को इस बारे में संतोष है कि 70 वर्षों से चल रहे विवादों को निपटाने में कोर्ट सक्रिय हुई है। रोजाना सुनवाई से मामला जल्दी निपटेगा। इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता कि राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का मामला जल्द ही निपटेगा, क्योंकि यह धार्मिक और आस्था का सवाल है। यह भी निश्चित है कि मंदिर निर्माण के अलावा कोई निर्णय हिन्दू जनता को स्वीकार नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि इस मामले पर निर्णय न्यायालय करेगा, अन्य विकल्प भी खुले है। न केवल हिन्दू जनता, बल्कि भाजपा के विरोधी दल भी यह बात स्वीकार करने लगे हैं कि मोदी सरकार किसी भी स्थिति में मंदिर निर्माण के संकल्प को पूरा करेगी। इन ऐतिहासिक तथ्यों को नकारा नहीं जा सकता कि करीब 500 वर्ष पूर्व बर्बर हमलावर बाबर ने राम मंदिर को ध्वस्त कर वहां बाबरी ढांचा खड़ा कर दिया था। हिन्दुओं ने राम मंदिर के लिए संघर्ष किया। कई बलिदान हुए, आजादी के बाद कांग्रेस की सरकारों से उम्मीद थी कि सरकार हिन्दुओं की भावना को ध्यान में रखकर कोई निर्णय लेगी, लेकिन वोट बैंक की तुष्टिकरण नीति के कारण कांग्रेस ने इस मामले में उलझने पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस आस्था के मामले को भी राजनीतिक लाभ-हानि से देखा गया। मंदिर निर्माण का संकल्प भाजपा के संकल्प पत्र में है। उत्तर भारत की चुनावी सभाओं में जन स्थान पर मंदिर निर्माण का संकल्प अमित शाह ने बार-बार दोहराया। अब गृहमंत्री अमित शाह है। इस मामले को निपटाने की जिम्मेदारी भी उन पर है, जो साहसिक निर्णय तीन तलाक और 370 के बारे में लिए गए है। उसी तरह अब मंदिर निर्माण के संकल्प को भी पूरा किया जाएगा। इस संदर्भ में उल्लेख करना होगा कि जब डॉ. मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में एकता यात्रा निकली तो नरेन्द्र मोदी भी सहयात्री थे। लालकृष्ण आडवाणी की रामरथ यात्रा में भी नरेन्द्र मोदी की सक्रिय भूमिका रही। आस्था के सवाल को कानून की तराजू पर तोला नहीं जाता। मोदी सरकार ने जो कहा, उसे पूरा किया। अब बारी है मंदिर निर्माण के संकल्प की।
दृष्टिकोण
भिखारी पाक की बौखलाहट
यदि अस्थाई अनुच्छेद 370 और 35(ए) से छेड़छाड़ की तो आग लग जाएगी। हम भारत से अलग हो जाएंगे। इन घमंडियों के बाद भी कश्मीर की देश से अलग पहचान की रेखा खींचने वाले अनुच्छेद 370 के खात्मे को संसद से पारित करने में जो रणनीति अपनाई गई उससे जम्मू-कश्मीर 370 की बेडिय़ों से मुक्त हो गया। मोदी सरकार पुरानी नींव पर नवभारत के निर्माण की ओर तेजी से बढ़ रही है। उसे अब कोई रोक नहीं सकता। चारों ओर राष्ट्रवादी की विजय का शंखनाद हो रहा है। अब जल्द ही भव्य राम मंदिर में भी आरती और शंखनाद सुनाई देगा। जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 370 को समाप्त होने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। वजीरे आजम इमरान खान अपनी कटी नाक से पाकिस्तान की जनता के सामने मुँह दिखाने लायक नहीं रहा। इमरखान की बैचेनी और बौखलाहट इतनी बढ़ गई है कि सुरक्षा समितियों और सियासी नेतृत्व के साथ बार-बार बैठक कर रहे हैं। 370 हटाने से इमरान सरकार को उम्मीद थी कि कश्मीर में आग लग जाएगी। लेकिन आग तो नहीं लगी, कहीं धुआं भी नहीं दिखा। इससे पाकिस्तान की बौखलाहट और बढ़ गई। वहां की जनता इसे इमरान सरकार की कूटनीतिक पराजय मानती है। जब वहां की संसद में इमरान पर इस मामले में सवाल दागे गए तो उन्होंने बौखलाहट के साथ कहा कि क्या भारत पर हमला कर दूं। कश्मीर के हुक्मरान जानते हैं कि भारत से टकराएगा तो जर्जर पाकिस्तान के अस्तित्व पर संकट पैदा हो जाएगा। अब इमरान सरकार ने भारत से व्यापारिक संबंध तोडऩे के साथ राजनयिक संबंध तोडऩे का भी निर्णय लिया। भारत के उच्चायुक्त को पाक छोडऩे और भारत में पाक उच्चायुक्त को भी वापिस बुला लिया है। व्यापारिक संबंध से तो भिखारी पाकिस्तान को ही मदद मिल रही थी।