संसद सत्र में इतिहास रचा
   Date08-Aug-2019

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले संसद सत्र में तीन तलाक के बारे में कानून बनाने और अस्थाई अनुच्छेद 370 एवं 35(ए) को खत्म कर लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर केन्द्र शासित बना कर जम्मू-कश्मीर को केन्द्र शासित राज्य कर दिया। राज्य सभा में इस संकल्प को पारित कराकर लोकसभा में भी इसे प्रचंड बहुमत से पारित करा दिया। इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की सूझबूझ और रणनीतिकारी परिणाम है कि राज्यसभा में एनडीए को बहुमत नहीं होने और एनडीए के ही सहयोगी जद(यू) के असहयोग के बाद भी तीन तलाक और 370 के खात्मे के विधेयक करीब दो तिहाई सदस्यों के समर्थन से पारित हो गए। यह भी मोदी सरकार की सफल नीति का ही परिणाम है कि संसद के पहले सत्र में ही सरकार के सभी विधेयक दोनों सदन में पारित हो गए। जिस तरह सरकार ने इन दो मुद्दों को कानून बनाकर इतिहास रचा। जिस तरह तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को आजादी मिली और अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भी 70 वर्ष बाद 370 के प्रकोप से आजादी मिली। 370 की मुक्ति से पूरे देश में जश्न का माहौल है, लद्दाख और जम्मू की जनता भी खुशी से झूम रही है, केवल घाटी में अब्दुल्ला और मुफ्ती का परिवार ही मातम में डूबा हुआ है। फारूख अब्दुल्ला आंसू टपका कर छाती पीट रहे हैं। हुर्रियत और अलगाववादी नेता जेल में है या घरों में बंद है। इनके अलावा घाटी के आम लोगों को धारा 370 से मुक्ति का संतोष है। 370 के खात्मे के विधेयक को 370 सदस्यों के भारी बहुमत से पारित होना अर्थात् आंकड़ों की समानता भी कमाल रही। लोकसभा में 36 दलों के सदस्य है, इनमें आठ धुर विरोधी दलों ने भी इस विधेयक का समर्थन किया। कांग्रेस में वैचारिक अराजकता की स्थिति रही। जिनका राष्ट्र चिंतन है, उन कांग्रेसी नेताओं ने भी 370 हटाने के विधेयक का समर्थन किया। कांग्रेस के कद्दावर नेता और जिनका नाम कांग्रेस अध्यक्ष के लिए चल रहा है, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि वे सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हैं। इसके विपरीत राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटना और नेताओं को जेल में डालना संविधान के खिलाफ है। कांग्रेस इस मामले में बंटी दिखाई दी। संसद में कांग्रेस नेताओं नेज तर्क दिए, उससे ऐसा लगा कि कांग्रेस आत्महत्या की ओर बढ़ रही है। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन का यह कहना कि जम्मू-कश्मीर का मामले की मानिटरिंग संयुक्त राष्ट्र संघ कर रहा है। यह विचार न केवल राष्ट्र विरोधी बल्कि स्थापित विदेश नीति के भी खिलाफ है। इस कथन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमित शाह ने सवाल किया कि क्या यह नीति कांग्रेस की अधिकृत नीति है। 370 के खिलाफ मध्यप्रदेश से भी आवाज बुलंद होती रही। 1990 में कांग्रेस के जुझारू मंत्री सुरेश सेठ ने इस अनुच्छेद को हटाने का संकल्प पत्र प्रस्तुत किया था। इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि हम एक है, एक साथ आगे बढ़ेंगे और 130 करोड़ भारतवासियों के सपने पूरे होंगे। जम्मू-कश्मीर से जुड़ा बिल भारी समर्थन के साथ पारित होना हमारे संसदीय लोकतंत्र का सबसे अहम पल है।
दृष्टिकोण
इसी दिन की प्रतीक्षा थी
महिला सशक्तिकरण की प्रतीक एवं पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हमारे बीच नहीं रही। यह न केवल भाजपा की वरन् राष्ट्रीय क्षति है। भारत की महान महिला की प्रखरवाणी अब शांत हो गई। सुषमाजी भारत की प्रथम महिला विदेश मंत्री थी। उन्होंने विजयी दल के नेता से लेकर विदेश मंत्री तक की यात्रा सफलता के साथ पूरी की। राष्ट्रवादी विचारों की प्रखर वक्ता के नाते ही उनकी पहचान रही। 25 वर्ष की आयु में ही वे केबिनेट मंत्री बनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रही। अमेरिकी मेगजिन द वाल स्ट्रीट जनरल ने उन्हें भारत की सबसे प्रिय राजनीतिज्ञ करार दिया था। विधि का विधान भी कैसा है। अनुच्छेद 370 के खात्मे का संकल्प पत्र लोकसभा में पारित होने के 18 मिनिट बाद उन्होंने ट्वीट किया कि - 'मैं जीवन में इसी दिन को देखने की प्रतिक्षा कर रही थी।Ó इस संकल्प को पूरा करने में सुषमाजी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका स्नेहमयी मधुर व्यवहार से सभी प्रभावित होते थे। 67 वर्षीय सुषमाजी के जीवन के कई पड़ाव चुनौतीपूर्ण थे। उनके राष्ट्रवादी विचार में हमेशा प्रखर तेज था। गुर्दा रोग से पीडि़त होने से उन्होंने मंत्री पद पर नहीं रहने का निर्णय लिया। विधि का विधान क्रूर भी रहता है। सुषमाजी में असाधारण प्रतिभा थी, उनका नहीं रहना राष्ट्रीय क्षति है। उनकी आवाज अब शांत हो गई, लेकिन वाणी की गूंज हमेशा सुनाई देगी। इतिहास में उनका स्थान हमेशा रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।