निर्मोही अखाड़े के दस्तावेज, सबूत 1982 में डकैत ले गए
   Date08-Aug-2019

नई दिल्ली द्य 7 अगस्त (वा)
निर्मोही अखाड़े के दस्तावेज और सबूत 1982 में डकैत ले गए। ये बात निर्मोही अखाड़े के वकील ने अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कही। अखाड़े के वकील ने यह बात कोर्ट में तब बताई जब चीफ जस्टिस ने अखाड़ा से कहा कि वह सरकार द्वारा 1949 में ज़मीन का अटैचमेंट करने से पहले के जमीन के मालिकाना हक को दर्शाने वाले दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड या अन्य कोई सबूत कोर्ट के समक्ष पेश करे। निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि इस मामले में वे असहाय हैं। वर्ष 1982 में अखाड़े में एक डकैती हुई थी। जिसमें उन्होंने उस समय पैसे के साथ उक्त दस्तावेजों को भी खो दिया था। इस पर चीफ जस्टिस सीजेआई ने पूछा- क्या अन्य सबूत जुटाने के लिए केस से जुड़े दस्तावेजों में फेरबदल किया गया था।
निर्मोही अखाड़ा- इससे पहले जस्टिस बोबडे ने पूछा- क्या निर्मोही अखाड़े को सेक्शन 145 सीआरपीसी के तहत राम जन्मभूमि पर दिसंबर 1949 के सरकार के अधिग्रहण के आदेश को चुनौती देने का अधिकार है ऐसा इसलिए क्योंकि निर्मोही अखाड़े ने इस आदेश को कानून में तय अवधि समाप्त होने के बाद निचली अदालत में चुनौती दी थी। दरअसल अखाड़ा ने तय अवधि (6 साल) समाप्त होने पर 1959 में आदेश को चुनौती दी थी। इस पर अखाड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 1949 में सरकार का अटैचमेंट ऑर्डर था और उस ऑर्डर के खिलाफ मामला 1959 तक निचली अदालत में लंबित था। लिहाजा 1959 में निर्मोही अखाड़े ने निचली कोर्ट में अपनी याचिका दायर की थी। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि अगले 2 घंटे में हम मौखिक और दस्तावेज़ी सबूतों को देखना चाहेंगे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमको असली दस्तावेज दिखाइए।
निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि दस्तावेजों का उल्लेख इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले में शामिल है। सीजेआई ने कहा कि आप अपने तरीके से इसको रखिये। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से कहा कि आप अपने दस्तावेज तैयार करें। हम आपको बाद में सुनेंगे।
श्रीरामलला विराजमान- श्रीरामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील के. परासरन पेश हुए। उन्होंने कहा कि लोग ऐसा मानते हैं और उनका विश्वास है कि राम वहां विराजमान हैं और ये अपने आप में ठोस सबूत है कि वो राम की जन्मस्थली है। ब्रिटिश राज्य में भी जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंटवारा किया था तो उस जगह को मस्जिद की बजाय, राम जन्म स्थान का मंदिर माना था। अंग्रेजों के जमाने के फैसले में भी वहां बाबर की बनाई मस्जिद और राम जन्मस्थान का जिक्र किया था। जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या जिस तरह राम का केस सुप्रीम कोर्ट में आया है कहीं और किसी गॉड का केस आया है, क्या जीसस, बेथलहम में पैदा हुए इस पर किसी कोर्ट में सवाल उठा था। रामलला के वकील ने कहा कि वह इस मसले को चेक कराएंगे। इसके साथ ही अयोध्या मामले की सुनवाई आज पूरी हुई। अब बुधवार को सुबह 10.30 बजे मामले की सुनवाई होगी।
पहले दिन की सुनवाई- इससे पहले मंगलवार को जब पहले दिन की सुनवाई हुई तो निर्मोही अखाड़े के वकील ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल पर 1934 में 5 वक्त की नमाज बंद हुई। हर शुक्रवार सिर्फ जुमे की नमाज होती रही है।