गर्भ में सक्रिय रहती हैं शिशु की इंद्रियां
   Date06-Aug-2019

धर्मधारा
प्रा चीन एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार एवं आज के वैज्ञानिक परिक्षणों के माध्यम से यह सिद्ध होता है कि गर्भावस्था में माता जिनकी शांत प्रसन्न मधुर भाषी एवं तनाव मुक्त होगी, उतना ही जन्म के पश्चात शिशु प्रसन्न और मानसिक शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेगा।
गर्भस्य शिशु अचेतन नहीं होता, बल्कि चेतनावस्था में रहता है। चेतनावस्था में उसकी सारी इंद्रियां, ज्ञानेन्द्रियां व कर्मेन्द्रियां उतनी ही सक्रिय होती है, जितनी की स्वस्थ शिशु की। अत: गर्भावस्था के दौरान माताएं जैसा बच्चा चाहती है, उसके बारे में कल्पना अवश्य करें, क्योंकि उस दौरान माता के विचारों का गर्भस्थ शिशु पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। आदर्श बालक हेतु आदर्श कल्पना आवश्यक है। गर्भावस्था में शिशु सुनने, समझने की क्षमता रखता है। कुछ शिशुओं में कम तथा कुछ की क्षमता अधिक होती है। इसलिए एक वर्ष का बच्चा भी मोबाइल चला लेता है एवं इससे प्रभावित होता है। बच्चा अपनी मां के उदर से ही सिखता मां चलाती है इसलिए, अत: टीवी और मोबाइल का कम से कम उपयोग करना चाहिए, ताकि इनसे होने वाले बुरे परिणामों से बचा जा सके तथा इनके दुष्परिणामों से होने वाली मानसिक और शारीरिक व्याधियों से भी सुरक्षित रह सके, क्योंकि गर्भस्थ शिशु पूर्ण चेतनावस्था में रहता है एवं उसकी सभी इंद्रियां सक्रिय रहती है। अत: प्रत्येक माता को चाहिए कि गर्भावस्था के दौरान धार्मिक प्रवृत्तियों में रूचि रखकर धार्मिक ग्रंथों का पठन-पाठन करना चाहिए तथा मानसिक रूप से तनाव मुक्त रहे तथा प्रसन्नचित रहे व चिड़चिड़ापन नहीं रखे। चिकित्सा विज्ञान के अनुसंधान के अनुसार शिशु गर्भ में जिन ध्वनियों को सुनता है, जन्म लेने पर शिशु उन ध्वनियों को पहचान लेता है। दूसरों की आवाज के बजाय माता की आवाज पर तत्काल आकर्षित होता है। अन्य ी की आवाज पर उतना आकर्षित नहीं होता है। कारण है गर्भावस्था में उस पर पड़े ध्वनि का असर है। इस अवस्था में पड़े प्रभाव के कारण ही शिशु माता को गंध और स्पर्श से भी पहचान लेता है। गर्भावस्था में माता को आहार विहार का भी ध्यान रखना चाहिए। शुद्ध शाकाहारी भोजन करे, कैल्शियम एवं लोह तत्वयुक्त हरी सब्जियां खाए, अंकुरित धान्य का प्रयोग करे। इसके साथ-साथ आराध्य देव का विधि विधान से पूजन करे। इस प्रकार उपरोक्त बातों का ध्यान रखने से भगवत पुत्र-पुत्री की प्राप्ति होती है। नर ही नारायण और नारी ही नारायणी हो जाती है।