कड़े निर्णय की प्रतीक्षा
   Date05-Aug-2019

केन्द्र सरकार की एडवाइजरी के बाद कश्मीर से करीब पचास हजार तीर्थयात्री और पर्यटक वापिस चले गए है, अतिरिक्त सुरक्षा बल कश्मीर में तैनात होने से इस अफवाह का जोर है कि कुछ बड़ा होने वाला है। राज्यपाल ने भी साक्षात्कार में कहा है कि कल क्या होगा इस बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन आतंकवादियों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता अफवाह फैला रहे हैं। जाहिर है कि मेहबूबा मुफ्ती और फारूख और उनका बेटा उमर अब्दुल्ला का ब्लड प्रेशर इस बात से बड़ा हुआ है कि मोदी सरकार कश्मीर में कुछ बड़ा करने वाली है, मेहबूबा ने तो चेतावनी दी है कि यदि अस्थाई धारा 370 और 35(ए) से छेड़छाड़ की गई तो परिणाम घातक होंगे। सवाल यह है कि कश्मीर के बेहतर भविष्य के लिए 35(ए) हटाना ठीक है या सत्ता भोगी अब्दुल्ला और मेहबूबा द्वारा कश्मीरियत का मुद्दा बनाकर घाटी के लोगों को भ्रमित करने की धौंस के दबाव में क्या कश्मीर को आतंकी आग में जलने देना उचित है? यह भी जाहिर हैकि भाजपा के संकल्प पत्र में कश्मीर और भारत के बीच रेखा खींचने वाली अस्थाई धारा 370 और 35(ए) को हटाने की मांग की गई है। प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की मोदी सरकार केन्द्र में है, मोदी सरकार कठोर निर्णय लेने में भी संकोच नहीं करती। नोटबंदी, जीएसटी, तीन तलाक विरोधी कानून और सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक के ऐसे निर्णय लिए जो जनहित और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक थे, मोदी सरकार अन्तर्राष्ट्रीय दबाव की परवाह नहीं करती, यह भी सच्चाई है कि भारत की प्रतिष्ठा और कूटनीतिक दबाव इतना प्रभावी है, पाकिस्तान की सीमा में घुसकर कमांडो एवं एयर स्ट्राइक की गई, उस बारे में चीन, अमेरिका जैसी महाशक्तियों ने भी मुँह नहीं खोला। यदि अब कश्मीर के बारे में कोई कठोर निर्णय लिया गया तब भी भारत पर दबाव बनाने की कोई हिम्मत नहीं कर सकता। सवाल यह है कि धारा 370 और 35(ए) की जंजीरों से जकड़े जम्मू-कश्मीर राज्य के हित में क्या है? 35(ए) को राष्ट्रपति के आदेश से लागू किया गया। इसके लिए किसी संवैधानिक प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। केवल राष्ट्रपति के आदेश से इसे हटाया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय में भी यह मामला चल रहा है। हालत यह है कि 35(ए) के कारण गोरखा केवल चौकीदार की रह सकते हैं और सफाई कर्मचारी के बेटे चाहे उच्च शिक्षा प्राप्त कर ले, लेकिन वे सफाई कर्मचारी ही रहेंगे। इससे कश्मीर में अन्य राज्य का व्यक्ति व्यवसाय नहीं कर सकता। अगर राज्य के बाहर शादी की तो बेटे की सम्पत्ति के मालिक होते हैं, बेटी का कोई अधिकार नहीं रहता। धारा 370 के अनुसार जम्मू-कश्मीर के लिए केवल रक्षा, विदेश और संचार से जुड़े कानून केन्द्र सरकार बना सकती है। 1954 में राष्ट्रपति के द्वारा 35(ए) का प्रावधान किया गया, इसके अनुसार जम्मू-कश्मीर विधानसभा को स्थाई निवासी की परिभाषा करने का अधिकार दिया गया।
दृष्टिकोण
मारे जा रहे हैं घुसपैठिए
भारत में पहली बार राष्ट्रवादी मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टालरेंस की नीति के कारण आतंकी घुसपैठिये हर रोज मारे जा रहे हैं। अब कोई पथराव के द्वारा कार्यवाही में बाधा डालने की हिम्मत नहीं कर पाता। कुछ बड़ा होने की आशंका के बीच सेना ने घुसपैठ की बड़ी कोशिश असफल कर दी। सेक्टर में घुसपैठ करने वाले पांच से सात लोग पाकिस्तानी बार्डर एक्सन टीम के मारे गए। इनमें पाकिस्तानी सैनिक भी शामिल है। सैन्य प्रवक्ता कर्नल राजेश आलिया ने बताया कि 36 घंटे में सेना ने घुसपैठ नाकाम कर दी। आतंकियों और पाक सैनिकों के शव एलओसी पर पड़े है। सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना ने बोफोर्स तोप भी एलओसी पर तैनात कर दी है। गत शनिवार की रात पाक की ओर से पुंछ के मेढर में गांवों और चौकियों पर गोलीबारी की गई। भारतीय सेना ने इसका कड़ा प्रतिकार किया। भारत पर ब्लस्टर बम के उपयोग का आरोप झूठा है। दूसरी ओर यात्रियों एवं पर्यटकों को वापिस लौटने की एडवाइजरी जारी होने 95 प्रतिशत लोग वापिस लौट गए है। अमरनाथ यात्री मार्ग पर जो भंडारे लगाए गए थे, वे भी बंद हो रहे हैं। चाहे राज्यपाल किसी बड़े घटनाक्रम होने की संभावना से इंकार करे, लेकिन कश्मीर के नेता इतने डरे हुए है कि रात को प्रेस कांफ्रेंस करके अपने डर को व्यक्त कर रहे हैं। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि इन राष्ट्रविरोधी प्रावधानों को खत्म कर जम्मू-कश्मीर को भी मूलधारा में शामिल किया जाए। धारा 370 एवं 35(ए) को खत्म करने का समर्थन जम्मू और लद्दाख के लोग भी कर रहे हैं। केवल घाटी के अब्दुल्ला-मुफ्ति आदि नेता ही डरे हुए है। परिसीमन और इन धाराओं को हटाया गया तो सत्ता पर से इन दो परिवारों का एकाधिकार समाप्त हो सकता है।