उपकार के बदले में कृतज्ञता मानवीय गुण
   Date05-Aug-2019

धर्मधारा
सृ ष्टि में कोई भी मनुष्य, जीव-जंतु या वृक्ष-वनस्पति आदि सभी परस्पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, एक दूसरे की जरूरतें पूरी करते हैं, एक दूसरे का विभिन्न रूपों में सहयोग करते हैं। यदि इस जीवन चक्र की एक भी कड़ी टूट जाए, तो प्रकृति का यह जीवन चक्र बिगडऩे लगता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम अपने जीवन में दूसरों की अहमियत को समझें और उसके लिए उनका आभार व्यक्त करना न भूलें। यदि कोई अन्य व्यक्ति हमारे लिए कुछ करता है तो उसे यह जताने का प्रयास जरूर करना चाहिए कि उसने जो कुछ भी हमारे लिए किया है, उसकी हम कद्र करते हैं। इसलिए उसे धन्यवाद दे रहे हैं। धन्यवाद कहने में दो चीजें निहित हैं एक तो कृतज्ञता, जो कि एक भावना है और दूसरी-उस भावना की अभिव्यक्ति, जो कि एक प्रदर्शन है।
कभी हमने यह सोचा है कि जो हमारी मदद करते - हैं, वो हमारे लिए कितने खास होते हैं। यदि बीच सड़क में हमारी गाड़ी खराब हो जाए और हमें कोई मैकेनिक न मिले, यदि हमारे घर का नल खराब हो जाए और कोई प्लंबर न मिले, तो हमारा कितना समय बरबाद होता है और हम इसमें कुछ भी नहीं कर पाते। हमारे पास पैसे हैं और साधन भी हैं, लेकिन फिर भी हम अपने लिए वो सब काम नहीं कर सकते; क्योंकि उस काम को वही व्यक्ति कर सकता है, जो उसका जानकार होता है और उस काम को करने में कुशल होता है। जरूरत के समय - हमारी मदद करने वाले लोगों की अहमियत हमारे लिए कितनी बढ़ जाती है, लेकिन वही व्यक्ति जब हमें अपनी सेवा देकर जाता है, तो हम उसे पैसा देकर अपना फर्ज पूरा कर लेते हैं। इस तरह दिनभर में न जाने कितने लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमारे लिए काम करते हैं और हमें इसका एहसास तक नहीं होता। क्या हमने कभी यह सोचा है कि यदि रोजमर्रा के जीवन में सफाई कर्मचारी, घर में काम करने वाला वाचमेन, रिक्शावाला, वेटर, पुलिस, टीचर या डॉक्टर आदि अपना कार्य न करें, तो हमारी जिंदगी में क्या-क्या समस्याएँ आ सकती हैं? तो क्यों न हमें इनके प्रति आभारी होना चाहिए और इनको हृदय से धन्यवाद जरूर कहना चाहिए। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के एक शोध के अनुसार धन्यवाद बोलने के कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं। शोध में यह कहा गया है कि लोगों का आभार जताने वाले व्यक्ति को अच्छी नींद आती है और उसकी प्रतिरोधक क्षमता भी इससे मजबूत होती है। शोध के अनुसार-यदि हम रोजाना के जीवन में आभार व्यक्त करने की आदत अपना लें, तो इससे ब्लडप्रेशर सामान्य रहता है, अवसाद और चिंता से ुछटकारा मिलता है, व्यक्तित्व विकास होता है और हमारी गलत आदतों और गलत व्यवहार में कमी आती है। किसी के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्ति को अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार बनाता है।