अतिवृष्टि से सोयाबीन की लगभग 30 फीसदी फसल खराब
   Date29-Aug-2019
 
इन्दौर ठ्ठ व्यापार प्रतिनिधि
इंदौर (व्यापार प्रतिनिधि)। देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य म.प्र. सहित महाराष्ट्र, राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में अतिवृष्टि बाढ़ तथा बादलाई मौसम में फसल बर्बाद हुई है या कीटों का प्रकोप बढ़ जाने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही हाजिर और वायदा दोनों में सोयाबीन के भाव 3700 रु. को पार कर गए है। कारोबारियों का कहना है कि बुआई आंकड़े और उत्पादन दोनों में फर्क है। इस बार सोयाबीन की करीब 30 फीसदी फसल खराब हो चुकी है। जिससे उत्पादन प्रभावित होना तय है। बाजार जानकारों के अनुसार खरीफ सीजन की प्रमुख तिलहन फसल सोयाबीन का उत्पादन इस साल करीब 10 फीसदी तक कम हो सकता है। हालांकि सरकारी अनमान में अब भी उत्पादन अधिक होता दिख रहा है। चौथे अग्रिम फसल अनुमान में 2018-19 में 138 लाख टन सोयाबीन होने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जबकि पिछले साल 109 लाख टन उत्पादन हुआ था। इसकी वजह चालू सीजन में बुआई पिछले साल के बराबर होना माना जा रहा है। कृषि मंत्रालय के बुआई आंकड़ों के मुताबिक इस साल देश में 111.47 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल देश में 110.95 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। चालू सीजन की बुआई पिछले साल और सामान्य रकबे से अधिक है। वही किसानों का कहना है कि इस समय सोयाबीन सहित तिलहन फसल पर सेमीलूपर इल्ली ने हमला कर दिया है। जानकारी के मुताबिक इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में सेमीलपूर इल्ली के हमले से सोयाबीन के पौधों में फली नहीं लगने की शिकायतें मिल रही है। प्रदेश के कई जिलों में समीलपूर इल्ली के प्रकोप से सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ है। सोयाबीन के पौधों में लगी सेमीलपूर इल्ली इनके फूल चट कर गई। नतीजतन पौधों में सोयाबीन की फली नहीं लगी और किसानों को नुकसान हुआ।