पूजा के अधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती-निर्मोही अखाड़ा
   Date26-Aug-2019
 
नई दिल्ली   26 अगस्त (वा)।
अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय में आज 12वें दिन की सुनवाई में निर्मोही अखाड़े ने कहा कि सेवादार होने के नाते विवादित स्थल पर पूजा एवं रखरखाव के उसके अधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती।
निर्मोही अखाड़े के वकील सुशीलकुमार जैन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष अपनी जिरह आगे बढ़ाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के सेवादार होने की वजह से उसके पूजा और रखरखाव के अधिकार को किसी ने भी चुनौती नहीं दी थी और अब कैसे कोई उसके अधिकार को चुनौती दे सकता है? संविधान पीठ ने निर्मोही अखाड़ा से पूछा, आप इस याचिका से क्या चाहते हैं? तब श्री जैन ने कहा, हम रखरखाव और जमीन का अधिकार चाहते हैं, पूजा हमारे द्वारा ही कराई जाती है, ये गतिविधियां सेवादार की हैं और मुझे इनका पालन करना है। न्यायालय ने पूछा कि क्या अखाड़ा के सभी साधु संगठन अपने नाम के साथ दास लगते हैं? इस पर श्री जैन ने जवाब दिया कि वह भगवान राम के दास हैं। इसलिए उन्होंने अपने नाम में दास जोड़ा है। कुछ लोग अपने नाम के आगे चरण भी लगाते हैं।
पिछली सुनवाई (23 अगस्त) को निर्मोही अखाड़े ने कहा था कि राम का जन्म स्थान रामपुर है। शीर्ष अदालत अयोध्या के विवादित जमीन को तीन भागों में बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई कर रही है। संविधान पीठ ने इस मामले में मध्यस्थता की प्रक्रिया असफल हो जाने के बाद सप्ताह के पांचों कार्यदिवस को सुनवाई का निर्णय लिया था।