नाबालिग होते हैं भगवान, नाबालिग की सम्पत्ति नहीं छीनी जा सकती
   Date21-Aug-2019

नई दिल्ली द्य 21 अगस्त (वा)
उच्चतम न्यायालय में अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि-बाबरी ढंाचा जमीन विवाद की नौवें दिन की सुनवाई आज पूरी हुई, जिसमें रामलला विराजमान ने जहां अपनी बहस पूरी की, वहीं जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील ने भी अपना पक्ष रखा।
रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष दलील दी कि कानून की तय स्थिति में भगवान हमेशा नाबालिग होते हैं और नाबालिग की संपत्ति न तो छीनी जा सकती, न ही उस पर प्रतिकूल कब्जे का दावा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा विवादित जमीन केवल भगवान की है। वह भगवान राम का जन्म स्थान है, इसलिए कोई वहां मस्जिद बनाकर उस पर कब्जे का दावा नहीं कर सकता। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। श्री वैद्यनाथन ने दलील दी कि कब्जा करके ईश्वर का हक नहीं छीना जा सकता। जन्मभूमि के प्रति लोगों की आस्था ही काफी है। मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता देता है। उन्होंने कहा अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं। ऐसे में नाबालिग की संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही छीना जा सकता है।
श्री वैद्यनाथन ने अपनी दलील पूरी की, उसके बाद राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलील रखनी शुरू की। शीर्ष अदालत ने पूछा कि वह किसकी ओर से पेश हो रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा मैं मुकदमा संख्या चार में प्रतिवादी नम्बर 20 हूं। उन्होंने अथर्व वेद के प्रसंग से अपनी दलील शुरू की। उन्होंने कहा विवादित स्थल हमारे सिद्धांत, आस्था और (शेष अंतिम पृष्ठ पर)