उपकृत मानवता
   Date02-Aug-2019

प्रेरणादीप
ए क द्वीप से दूसरे द्वीप और एक देश से दूसरे देश का संपर्क स्थापित करने के लिए जलमार्ग पनामा नहर का निर्माण हो रहा था। उन दिनों वहां मलेरिया का रोग महामारी की तरह फैला हुआ था और इस रोग को असाध्य रोग समझा जाता था। मलेरिया का यह भयंकर रोग पनामा नहर पर काम करने वाले सैकड़ों, हजारों मजदूरों में फैल गया, जिससे जाने कितने मजदूर मर गए और कितने बुरी तरह बीमार पड़ गए। बड़ा हाहाकार मच गया। ऐसा लगने लगा कि इस रोग के कारण न केवल पनामा का निर्माण ही रुक जाएगा, बल्कि अगणित मनुष्य का संहार हो जाएगा। उपचार करने वाले उपचार करने में लग गए और डॉक्टर मलेरिया को समूल नष्ट करने के उपायों में जुट गए। इस रोग के समूल विनाश के लिए डॉक्टरों को कठिन प्रयोग की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने कहा - यदि हमको कुछ ऐसे आदमी मिल जाएं, जिनके शरीर में मलेरिया के कीटाणुओं को प्रवेश कराकर उनकी प्रक्रिया एवं प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जा सके तो संभव है कि हम लोग मलेरिया के समूल विनाश के उपाय खोज निकाले। कठिन कार्य था, मलेरिया के कष्ट से लोग परिचित थे, तब भी क्या किसी कष्ट के भय से मानव-कल्याण के इतने बड़े काम को अधूरा रहने दिया जाए। निदान के लिए अनेक ऐसे आदमी आगे आए, जिन्होंने अपने स्वस्थ शरीर में मलेरिया के कीटाणु प्रवेश कराकर डॉक्टरों को उपचारक उपाय खोज निकालने में सहायता दी, किन्तु जिनका आज तक संसार को पता नहीं लग सका।