आर्थिक स्वतंत्रता के लिए लघु उद्योग स्थापित करना होंगे -डॉ. मोहनरावजी
   Date18-Aug-2019

नागपुर द्य  अगस्त (विप्र)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक मा. डॉ. मोहनराव भागवतजी ने कहा कि देश की आर्थिक स्वतंत्रता तथा समाज के स्वावलंबन की प्राप्ति के लिए बड़ी संख्या में लघु उद्योग स्थापित करने की आवश्यकता है।
सरसंघचालकजी लघु उद्योग भारती की स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में रविवार को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1994 में लघु उद्योग भारती की स्थापना हुई थी। इसमें मोरोपंत पिंगलेजी का बड़ा योगदान रहा। अपने यहां देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए संविधान है। राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए संविधान में प्रावधान है। सामाजिक स्वतंत्रता के लिए कुछ निर्देश दिए हैं, वो काम समाज यानी हमारा काम है। ईस्ट इण्डिया कम्पनी जैसी बड़ी कंपनियां दो सौ वर्ष पहले नहीं थीं, पर व्यापार तो होता था। उद्यमिता तो थी। मनुष्य की आर्थिक स्वतंत्रता का विषय महत्वपूर्ण है। इसका ध्यान पहले से रखा गया है। आपस में परस्पर निर्भरता का ध्यान पहले से रखा गया है।
आज दो शब्द महत्वपूर्ण हैं- एक समग्र और दूसरा उद्योग परिवार। उद्योगों से संबंधित परिवार में यदि परिवार भावना से जो निर्भरता होती है, वो स्वतंत्रता को बाधित नहीं करती और व्यापार भावना से जो निर्भरता होती है, वो हो सकता है स्वतंत्रता को बाधित करे, यह चलाने वाले की नीयत पर निर्भर करता है। संबंधों के आधार पर विचार करना, समग्र विचार करना और विकेन्द्रित विचार करना आवश्यक है।किसी भी क्षेत्र की सत्ता का महत्व है, आज अर्थ एक सत्ता है, राज्य एक सत्ता है, सामरिक शक्ति यह सत्ता है, इनका स्वरूप एक-दूसरे से संपर्क में रहे और मानवहित के लिए सदा एक दिशा में चलती रहे। इस मर्यादा तक विकेन्द्रित होने से स्वतंत्रता का लाभ सबको मिलता है और ऐसी स्वतंत्रता आर्थिक क्षेत्र में लाना है तो हमें लघु उद्योग, सूक्ष्म उद्योग, मध्यम उद्योग और कारीगिरी पर जोर देना पड़ेगा। यह विचार आज मानसिक, वैचारिक वातावरण में नदारद है।