अंग्रेजी जानने से अच्छा पैसा कमाया जा सकता है, इस सोच को बदलने की जरूरत -भागवत
   Date18-Aug-2019
 
नई दिल्ली 
 18 अगस्त (विप्र)
मातृभाषा की पढ़ाई जरूरी है। इस धारणा को हमें बदलने की जरूरत है कि सिर्फ अंग्रेजी ज्ञान से ही अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। छात्रों को अध्ययन के अन्य विषयों के साथ आध्यात्मिक ज्ञान देने की भी जरूरत है। शिक्षा प्रणाली में भारतीयता की आवश्यकता पर ध्यान देते हुए हमें ध्यान रखना होगा कि अगर कोई व्यक्ति आजीविका चलाने के लिए पढ़ता है तो यह शिक्षा नहीं है, क्योंकि समाज में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां अशिक्षित लोगों ने शिक्षित लोगों को नौकरियां दी हैं।
उक्त प्रखर विचार रा.स्व.संघ के प.पू. सरसंघचालक मा. डॉ. मोहनराव भागवत ने नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में संघ से संबद्ध शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (एसएसयूएन) द्वारा आयोजित शनिवार को 'शिक्षा में भारतीयताÓ विषय पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। डॉ. भागवत ने कहा कि हफ्ते में 20 घंटे, साल में 190 दिन पढ़ाई जरूरी है लेकिन होमवर्क (गृहकार्य)की जरूरत नहीं क्योंकि हमें फिनलैंड जैसी शिक्षा नीति की आवश्यकता है। फिनलैंड के स्कूली बच्चों को हफ्ते में 20 घंटे और साल में 190 दिन पढ़ाया जाता है, जबकि भारत के अधिकतर स्कूलों में हर सप्ताह औसतन 30-33 घंटे बच्चों को पढ़ाया जाता है। भारत में बच्चों को होमवर्क का काफी बोझ होता है। इस बोझ से मुक्ति जरूरी है।
डॉ. भागवत ने फिनलैंड की शिक्षा नीति की तारीफ करते हुए इसे विश्व की सबसे अच्छी शिक्षा नीति बताया है। उन्होंने भारत को यहां की शिक्षा नीति से प्रेरणा लेने को कहा है, क्योंकि फिनलैंड को उसकी शिक्षा नीति के लिए विश्वभर में सराहा जा रहा है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इस हैरत में हैं कि फिनलैंड की शिक्षा नीति कितनी अच्छी है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वहां जीवन के संघर्ष से लडऩा सिखाया जाता है, परीक्षा में ज्यादा अंक लाना नहीं। जैसे उनके यहां उनके देश के मूल्य को शिक्षा में शामिल किया गया है। उसी तरह भारत को भी अपने यहां की शिक्षा में अपने देश के मूल्यों को शामिल करना चाहिए। फिनलैंड की इस शिक्षा नीति के सफल होने के पीछे उस देश के मूल्य नहीं हैं, बल्कि लंबे अरसे से वहां लागू रणनीति इस शिक्षा नीति की सफलता की वजह है।
डॉ. भागवत ने कहा कि भारत में तीन साल के बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं, जबकि फिनलैंड में 6 साल की उम्र से स्कूल जाने की शुरुआत होती है। वहां कोई प्राइमरी, सेकंडरी और हायर सेकंडरी सेक्शन नहीं हैं। फिनलैंड के स्कूली बच्चों को हफ्ते में 20 घंटे और साल में 190 दिन (पढ़ाया जाता है, जबकि भारत के अधिकर स्कूलों में हर सप्ताह औसतन 30-33 घंटे बच्चों को पढ़ाया जाता है। भारत में बच्चों को होमवर्क का काफी बोझ होता है, लेकिन फिनलैंड के बच्चों को होमवर्क नहीं दिया जाता है। इसके अलावा वहां कोई टेस्ट भी नहीं होता है। अमेरिका के डाक्यूमेंट्री फिल्ममेकर माइकल मूरे ने साल 2015 में अपनी एक फिल्म वेयर टू इनवेड नेक्स्ट में फिनलैंड के पूर्व शिक्षा मंत्री क्रिस्ता कियूरू का साक्षात्कार किया था, जिसमें उन्होंने बताया था कि होमवर्क ना होना इस सिस्टम का सबसे अच्छा पहलू है। कुछ अन्य टीचर और बच्चों ने बातचीत के दौरान मूरे से कहा था कि होमवर्क ना होने के कारण बच्चे काफी कुछ नया सीखते हैं, कोई परिवार वालों के साथ वक्त बिताता है, कोई पेड़ पर चढ़ता है, कोई संगीत सीखता है, बच्चे अपनी-अपनी रुचि के हिसाब से नई चीजें सीखते हैं।