कांग्रेस क्या देश के गद्दारों की पार्टी
   Date14-Aug-2019

अनुच्छेद 370 एवं 35(ए) के प्रावधानों को हटाने के बाद मोदी सरकार के इस निर्णय का कुछ देशविरोधी तत्वों के अलावा पूरा देश स्वागत कर रहा है। यह ऐसा ऐतिहासिक फैसला है, जो भारत की एकता, अखंडता को सुनिश्चित करेगा। जम्मू एवं लद्दाख में 370 को हटाने को लेकर जश्न का माहौल है। घाटी क्षेत्र के बारे में कहा जाने लगा था कि वहां देशविरोधी तत्व उपद्रव कर सकते हैं, लेकिन श्रीनगर में भी जुम्मे की नमाज शांति से सम्पन्न हुई। ईद के त्योहार पर सामूहिक नमाज होती है, इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की गई। ईद के दिन भी श्रीनगर सहित पूरे घाटी क्षेत्र में खुशी के साथ ईद मनी। लोगों ने एक दूसरे के गले मिलकर मुबारकबाद दी। कहीं भी कोई एक पत्थर भी नहीं चला, शांतिपूर्ण ईद मनने से कुछ देशविरोधी लोगों का ब्लड प्रेशर इसलिए बढ़ गया है कि वे चाहते थे कि कश्मीर में ईद पर उपद्रव हो और लाशों को दिखाकर दुनिया को यह बताया जाए कि कश्मीर के लोग 370 को नहीं हटाना चाहते थे। कश्मीरियों पर अत्याचार हो रहे हैं, जिन्हें ईद शांति से मनना अखर रहा है। उनसे पूछा जा सकता है कि क्या ये ईद को लोगों के खून से रंगना चाहते थे? अब केन्द्र सरकार को ऐसे लोगों पर शिकंजा कसना चाहिए, जो लोग कश्मीर में आग लगाना चाहते हैं। जो टीवी चैनलों पर कश्मीर के लोगों को भड़काने की बहुत कोशिश की है, ऐसे पाकपरस्त लोगों को खुला नहीं छोडऩा चाहिए। सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी है, यह अंतरिम स्थिति कब तक रहेगी, क्या 370 के समान वर्षों तक बनी रहेगी। कांग्रेस पार्टी की नीति के बारे में भ्रम की स्थिति इसलिए पैदा हो गई कि भारत के भविष्य से रखने का सरोकार 370 से जुड़ा है। एक ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृहमंत्री पी. चिदम्बरम एक सभा में बोल रहे थे कि यदि जम्मू-कश्मीर हिन्दू बाहुल्य होता तो वहां 370 को नहीं हटाया जाता। कांग्रेस के एक ओर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का मानना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो कश्मीर भारत के हाथ से निकल जाएगा। मणिशंकर अय्यर जो इन दिनों पाकिस्तान के प्रवक्ता बने हुए है, कभी पाकिस्तान में जाकर कहते हैं कि जब तक मोदी की सरकार है, तब तक भारत-पाक के बीच चर्चा नहीं हो सकती। अब एक लेख में कह रहे हैं कि मोदी सरकार कश्मीर को फिलिस्तीन बना देंगे। यह विचार व्यक्त करने की आजादी का सवाल नहीं है। लोकतांत्रिक देशों में भी देश के खिलाफ बोलने और लोगों को भड़काने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दूसरा देश होता तो इन दिग्विजय, चिदम्बरम और सच्चर को जेल की कोठरी में डाल देता। जिस तरह अलगाववादी मीरवाइज गिलानी और महबूबा, उमर अब्दुल्ला को हिरासत में लिया गया है, उसी तरह की कार्रवाई इन कांग्रेसी नेताओं पर भी हो। पाकिस्तान तो सीधा दुश्मन है, उससे निपटा जा सकता है, लेकिन जो कश्मीर में आग लगाने की बात करते हैं, जो कि हिन्दू-मुस्लिमों को बांटना चाहते हैं, जो कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करते हैं ये सपौले दुश्मन से अधिक खतरनाक है।
दृष्टिकोण
धवन की दलील अमानवीय
यह हिन्दुओं की उदारता और सहिष्णुता का परिणाम है कि उनके आराध्य भगवान श्रीराम का मामला सन् 1885 से कोर्ट में अटका हुआ है। जन्मस्थान पर भव्य मंदिर निर्माण करना हिन्दू जनता चाहती है, हिन्दुओं का यह देश है। भारत की संस्कृति, परम्परा हिन्दू है। हिन्दू चाहता तो एक झटके में बड़़ा मंदिर निर्माण हो जाता। भारत में कोई भी क्रूर, बर्बर के कमांडर मीरबाकी ने जन्मभूमि बने मंदिर को ध्वस्त कर वहां बाबरी ढांचा खड़ा कर दिया। विदेशी हमलावर की बर्बरता के प्रतीक बाबरी ढांचे को कोई भी बर्दाश्त नहीं करता, कारसेवकों के एक समूह ने इस ढांचे को ध्वस्त कर बाबर की क्रूरता के प्रतीक बाबरी ढांचे को 6 दिसंबर 1992 को ध्वस्त कर दिया, इस स्थान पर रामलला विराजित है, जिनकी नित्य पूजा होता है। केवल भूमि का विवाद सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इस मामले को लटकाने, भटकाने की कोशिश कांग्रेस ने लगातार की। ऐसा इसलिए होता है कि हिन्दुओं की भावना का आदर किया तो मुस्लिम नाराज हो जाएंगे। भारत और दुनिया में बसें करोड़ों हिन्दुओं की अटूट आस्था का केन्द्र राम जन्मस्थान का मामला साजिश के साथ लटकाया, भटकाया और आगे बढ़ाया जा रहा है। कांग्रेस के नेता और वकील कपिल सिब्बल ने बाबरी की ओर से पैरवी करते हुए 2019 के चुनाव के पूर्व दलील दी थी कि इस मामले की सुनवाई चुनाव के बाद की जाए। बीच में अड़ंगा लगाया कि कोर्ट की बेंच में कोई अल्पसंख्यक जज नहीं है, अब जब इस मामले की रोजाना सुनवाई हो रही है तो बाबरी के वकील आर.के. धवन द्वारा दलील दी गई है कि रोजाना सुनवाई अमानवीय है, इससे हमें दस्तावेजों के अध्ययन और तैयारी का समय नहीं मिलता। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को ठुकरा दिया है।