कलारीपायत्तू
   Date14-Aug-2019

प्रेरणादीप
क लारीपायत्तू भारतीय युद्ध कला है। आज कला जूडो, कराटे, कुंग-फू आदि के नाम से जो मार्शल आटर््स लोकप्रिय है वे इसी भारतीय युद्ध-कला से निकले हैं। दक्षिण भारत विशेषकर केरलवासियों ने अभी तक इस युद्ध को जीवित रखा है। ऐसी ही एक साधक हैं श्रीमती मीनाक्षी गुरुक्कल। इस समय उनकी आयु 82 वर्ष है और गत 67 सालों में वे बालक-बालिकाओं को उक्त विलक्षण युद्ध कला का ज्ञान दे रही हैं। 6 साल की आयु से वे कलारीपायत्तू सीखने लगीं थीं। सोलह वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया और पति श्री राघवन के सहयोग से वतकरा नामक स्थान पर कदथनादन कलारी संगम प्रारंभ किया। शुरू से ही इसमें नि:शुल्क शिक्षा देने का विचार किया गया। वही परम्परा आज भी चल रही है। युद्ध-कला सीखने के बाद गुरु-दक्षिणा के रूप में शिष्य गण जो कुछ भी देते हैं, उसी से उक्त स्कूल और श्रीमती मीनाक्षी के परिवार का खर्च चलता है।