पर्यावरण की रक्षा मानवमात्र का धर्म- अशोकजी सोहनी
   Date13-Aug-2019

उज्जैन द्य स्वदेश समाचार
हमारी प्राचीन भारतीय परंपरा में प्रकृति आराधना के साथ ही इसके संवर्धन एवं संरक्षण की अनूठी व्यवस्था रही है, जिसके फलस्वरूप पर्यावरण की रक्षा जीवनशैली का अभिन्न अंग होती है। वर्तमान परिदृश्य और जीवन पद्धति के कारण पर्यावरण असंतुलन का संकट कई चुनौतियों और समस्याओं को जन्म दे रहा है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यक्षेत्र के माननीय क्षेत्र संघचालक अशोकजी सोहनी ने रविवार को शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय परिसर में आयोजित वृहद पौधारोपण कार्यक्रम में कही। श्री सोहनी ने बताया कि सामाजिक कर्तव्य को अनुभव करते हुए संघ ने इस दिशा में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन को अधिकृत गतिविधि के रूप में प्रारंभ किया है। समाज कार्य बैठकों, रैलियों के साथ ही जमीनी स्तर पर मूर्तरूप में दिखने वाली गतिविधि का भी विषय है। पीपल आदि वृक्षों की पूजा के साथ ही उनका रोपण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य है, साथ ही पानी का दुरुपयोग रोकते हुए इसकी शुद्धि एवं संरक्षण हेतु हम सभी को प्रयास करना चाहिए। प्रकृति सबकी पोषक होती है और वह अपना संतुलन करने में स्वयं सक्षम होती है, जिसके अच्छे-बुरे परिणाम मनुष्य को भोगना होते हैं। बढ़ते हुए पर्यावरण असंतुलन को ठीक करना, यह मानवमात्र का धर्म और कर्तव्य है। इसके पालन से मनुष्य जीवन की सार्थकता और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग संभव है। महानगर संघचालक श्रीपाद जोशी ने बताया कि वन विभाग एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालय के सहयोग से संघ द्वारा वेदोक्त मंत्रोच्चार के साथ औषधीय गुणों से युक्त लगभग 700 फलदार छायादार पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में संघ के विभाग प्रचारक विनय दीक्षित, विजय केवलिया, वन विभाग की ओर से जी.पी. मिश्रा, योगेंद्र जटवा, अनिल सेन आदि उपस्थित थे।